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Gorakhpur News: 65 साल हो सेवानिवृत्ति की उम्र, तय हो जवाबदेही, बढ़े अनुदान
Sun, 11 Oct 2026 03:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 11 Oct 2026 03:06 AM IST
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गोरखपुर। शिक्षक विधान परिषद चुनाव में अब उच्च शिक्षा के शिक्षकों ने भी अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की मांग है कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए, पुरानी पेंशन बहाल हो और विश्वविद्यालयों को मिलने वाला अनुदान बढ़ाया जाए। शिक्षकों का कहना है कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों की सेवा शर्तों, आर्थिक सुरक्षा और संसाधनों पर भी ध्यान देना जरूरी है। चुनाव में प्रत्याशी शिक्षक हितों की पैरवी के दावे कर रहे हैं, लेकिन शिक्षकों की नजर इस बात पर है कि उनकी वर्षों पुरानी मांगों को पूरा करने के लिए कौन ठोस कार्ययोजना और समयबद्ध पहल का भरोसा देता है।
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शिक्षक हितों की रक्षा और जवाबदेही हो प्राथमिकता
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. अजय कुमार शुक्ल का कहना है कि शिक्षक एमएलसी प्रत्याशियों को शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा और अकादमिक स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए। शिक्षक प्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल चुनाव के समय वादे करना नहीं, बल्कि शिक्षकों की समस्याओं को सदन में प्रभावी ढंग से उठाना और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करना है। एक सशक्त शिक्षक प्रतिनिधि वही है, जो शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करे, उनकी समस्याएं सुने और हर परिस्थिति में उनके बीच उपलब्ध रहकर उनकी आवाज को मजबूत मंच प्रदान करे।
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शिक्षकों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 वर्ष हो, पुरानी पेंशन बहाल करे सरकार
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रो. शरद मिश्र ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जानी चाहिए। इससे अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं का लाभ विद्यार्थियों और शोध कार्यों को मिलेगा। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलना जरूरी है। विश्वविद्यालयों को पर्याप्त अनुदान दिया जाए, ताकि आधारभूत सुविधाओं का विकास हो सके, शोध कार्यों को बढ़ावा मिले और शिक्षण व्यवस्था मजबूत बने।
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स्ववित्तपोषित शिक्षकों को मिले यूजीसी वेतनमान, हो विनियमितीकरण
गोरखपुर। महात्मा गांधी पीजी कॉलेज, गोरखपुर के वाणिज्य विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नितिन कुमार बख्शी ने अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित शिक्षकों को यूजीसी वेतनमान देने और उनका विनियमितीकरण करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक ही संस्थान में समान काम करने के बावजूद शिक्षकों के बीच दोहरी व्यवस्था लागू है। इससे स्ववित्तपोषित शिक्षकों को आर्थिक असमानता का सामना करना पड़ता है। सरकार को इस व्यवस्था में बदलाव कर उन्हें भी सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देना चाहिए।
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शिक्षक नेताओं की जवाबदेही तय हो
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग के डॉ. गौरी शंकर चौहान ने कहा कि शिक्षक नेताओं की जवाबदेही शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने में होनी चाहिए। उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव दिलाने के साथ शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए। पठन-पाठन में अनावश्यक हस्तक्षेप रोकना और शैक्षणिक संस्थानों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक नेताओं का मूल्यांकन पद से नहीं, बल्कि उनके कार्यों से होना चाहिए। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सभी को सहयोग करना चाहिए।
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शिक्षक हितों की रक्षा और जवाबदेही हो प्राथमिकता
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. अजय कुमार शुक्ल का कहना है कि शिक्षक एमएलसी प्रत्याशियों को शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा और अकादमिक स्वायत्तता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए। शिक्षक प्रतिनिधि की जिम्मेदारी केवल चुनाव के समय वादे करना नहीं, बल्कि शिक्षकों की समस्याओं को सदन में प्रभावी ढंग से उठाना और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करना है। एक सशक्त शिक्षक प्रतिनिधि वही है, जो शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा करे, उनकी समस्याएं सुने और हर परिस्थिति में उनके बीच उपलब्ध रहकर उनकी आवाज को मजबूत मंच प्रदान करे।
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शिक्षकों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 वर्ष हो, पुरानी पेंशन बहाल करे सरकार
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रो. शरद मिश्र ने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जानी चाहिए। इससे अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं का लाभ विद्यार्थियों और शोध कार्यों को मिलेगा। उन्होंने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग करते हुए कहा कि शिक्षकों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलना जरूरी है। विश्वविद्यालयों को पर्याप्त अनुदान दिया जाए, ताकि आधारभूत सुविधाओं का विकास हो सके, शोध कार्यों को बढ़ावा मिले और शिक्षण व्यवस्था मजबूत बने।
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स्ववित्तपोषित शिक्षकों को मिले यूजीसी वेतनमान, हो विनियमितीकरण
गोरखपुर। महात्मा गांधी पीजी कॉलेज, गोरखपुर के वाणिज्य विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नितिन कुमार बख्शी ने अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित शिक्षकों को यूजीसी वेतनमान देने और उनका विनियमितीकरण करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक ही संस्थान में समान काम करने के बावजूद शिक्षकों के बीच दोहरी व्यवस्था लागू है। इससे स्ववित्तपोषित शिक्षकों को आर्थिक असमानता का सामना करना पड़ता है। सरकार को इस व्यवस्था में बदलाव कर उन्हें भी सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देना चाहिए।
शिक्षक नेताओं की जवाबदेही तय हो
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग के डॉ. गौरी शंकर चौहान ने कहा कि शिक्षक नेताओं की जवाबदेही शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करने में होनी चाहिए। उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ बिना भेदभाव दिलाने के साथ शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए। पठन-पाठन में अनावश्यक हस्तक्षेप रोकना और शैक्षणिक संस्थानों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षक नेताओं का मूल्यांकन पद से नहीं, बल्कि उनके कार्यों से होना चाहिए। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सभी को सहयोग करना चाहिए।