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रोक के बावजूद हो रहा सौदा: गोरखपुर में प्रतिबंध के बाद भी मिल रही दवाएं, बस रसीद न मांगे

Tue, 23 May 2023 12:55 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 23 May 2023 12:55 PM IST
सार

प्रतिबंधित नारकोटिक्स दवाओं का पूर्वांचल बड़ा हब बनता जा रहा है। गोरखपुर में इस काम को कई बड़े दवा व्यापारी करते हैं। नारकोटिक्स में शामिल दो करोड़ से अधिक की फेंसिडिल सीरप करीब छह माह पहले पकड़ी गई थी। मामले में भालोटिया के गुप्ता बंधु समेत आगरा के दो बड़े दवा व्यापारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

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Restricted medicines available at medical stores around District Hospital and Betiahata gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : social media

विस्तार

गोरखपुर में हर दिन प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री मेडिकल स्टोर से खुलेआम हो रही है, जिन पर विभाग अंकुश नहीं लगा पा रहा है। जबकि ये दवाएं बिना पर्चे के लोगों को नहीं मिल सकती हैं। यह खेल जिला अस्पताल, बेतियाहाता और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आसपास के मेडिकल स्टोरों पर खुलेआम चल रहा है, लेकिन इस पर विभाग की नजर नहीं पड़ रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने करीब 344 दवाओं को प्रतिबंधित कर रखा है। इन दवाओं की बिक्री तभी हो सकेगी, जब मरीज पर्चा लेकर मेडिकल स्टोर पर जाएगा।

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जानकारों की माने तो यह फिक्स डोज कांबिनेशन (एफडीसी) वाली दवाएं हैं। एफडीसी में दो दवाएं मिक्स होती हैं। इसका इस्तेमाल डॉक्टर मानसिक रोग या फिर दर्द निवारक में करते हैं। जब ज्यादा दर्द होता है या फिर मानसिक स्थिति ज्यादा खराब होती है, तभी डॉक्टर लिखते हैं।
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इन दवाओं की बिक्री पूरी तरह से पर्चे पर होती है, लेकिन शहर में ये बिना पर्चे के मिल रही हैं। अगर कोई इन दवाओं की रसीद मेडिकल स्टोर संचालकों से मांग लेता है तो वह उसे लौटा देते हैं। इनमें हैलोब्रीड, क्लोट्रिमाजोल, लेवोडोपा, पेडर्स, ग्लूकोनार्म, ल्यूपिडीक्लाक्स, टैक्सीन जैसी दवाएं शामिल हैं।
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नारकोटिक्स की दवाएं पहले भी पकड़ी जा चुकी है

प्रतिबंधित नारकोटिक्स दवाओं का पूर्वांचल बड़ा हब बनता जा रहा है। गोरखपुर में इस काम को कई बड़े दवा व्यापारी करते हैं। नारकोटिक्स में शामिल दो करोड़ से अधिक की फेंसिडिल सीरप करीब छह माह पहले पकड़ी गई थी।

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मामले में भालोटिया के गुप्ता बंधु समेत आगरा के दो बड़े दवा व्यापारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके अलावा हाल ही में एसटीएफ ने प्रतिबंधित डाइजीपाॅम इंजेक्शन भी बरामद किया था। मामले में दो आरोपी भी गिरफ्तार किए गए थे। इसके अलावा पहले भी कई बार प्रतिबंधित दवाएं पकड़ी जा चुकी हैं। इसके बाद भी यह खेल रुक नहीं रहा है।

ड्रग इंस्पेक्टर जय सिंह ने कहा कि प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री केवल डॉक्टर के पर्चे पर ही की जा सकती है। इसे लेकर समय-समय पर मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्देश दिए जाते हैं। अगर बिना पर्चे के प्रतिबंधित दवाओं की बिक्री की जा रही है, तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।

 

ये दो केस तो महज बानगी हैं...

केस-एक
जिला अस्पताल रोड पर एक मेडिकल स्टोर पर एक युवक पहुंचा। ट्रॉमाडोल की पांच गोली के लिए 50 रुपये दिए। इस दौरान उसने ट्रॉमाडोल ने कहकर धीरे से दवा का शार्ट नाम डोल कहा था। मेडिकल स्टोर संचालक ने तत्दकाल दवा दे दी और युवक आगे बढ़ गया। इस दवा का इस्तेमाल दिमाग में होने वाले दर्द को कम करने के लिए किया जाता है, लेकिन युवा इसका इस्तेमाल नशे के रूप में हैं।

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केस-दो
बेतियाहाता के एक मेडिकल स्टोर पर क्लोबा दवा खरीदने के लिए एक युवक पहुंचा। उसने दवा के दो पत्ते मांगे, इस पर मेडिकल स्टोर संचालक ने पर्चे मांगे, तो वह दिखा नहीं सका। इस पर उसने रसीद न मांगने की बात कही और एक पत्ता देकर उसे चलता किया। इस दवा का इस्तेमाल मानसिक रूप से बीमार मरीज करते हैं।
 

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