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Gorakhpur News: कमीशन का लालच, खाते का इस्तेमाल और करोड़ों की साइबर ठगी
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गोरखपुर। बैंक खाते पर कमीशन का लालच साइबर ठगी के नेटवर्क में फंसा सकता है। गोरखपुर में पकड़े गए गिरोह की जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को खपाने के लिए जालसाजों ने कई स्तरों पर व्यवस्था बनाई थी। कोई बैंक खाते और दस्तावेज जुटाता था तो कोई नकदी निकालता था। रकम को क्रिप्टोकरेंसी यूएसडीटी में बदल दिया जाता था। इस तरह लेन-देन की कड़ियां छिपाने की कोशिश की जाती थी। हर किसी की भूमिका तय थी, जिससे रकम एक हाथ से दूसरे हाथ तक पहुंचती रहे और उसके असली स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का काम केवल लोगों को ठगने तक सीमित नहीं था। साइबर फ्रॉड और निवेश के नाम पर ठगी गई रकम को बैंकिंग व्यवस्था से बाहर निकालना भी इसकी अहम रणनीति थी। इसके लिए पहले ऐसे लोगों की तलाश की जाती थी, जो कमीशन के बदले अपने बैंक खाते इस्तेमाल करने देने को तैयार हों। इन खातों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ठगी की रकम पहुंचाई जाती थी। इसके बाद एटीएम कार्ड और चेक के जरिये नकदी निकाली जाती थी। रकम को सीधे किसी एक व्यक्ति के पास रखने के बजाय अलग-अलग सदस्यों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता था। अंतिम चरण में विदेशी एजेंटों की मदद से नकदी को यूएसडीटी में बदलकर निर्धारित क्रिप्टो वॉलेट में भेजा जाता था। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद लेनदेन की कड़ियों को उलझाना और रकम के स्रोत को छिपाना था।
पकड़े गए पांचों आरोपियों की अलग-अलग थी जिम्मेदारी
पुलिस के अनुसार, नवनीत पांडेय गिरोह का स्थानीय लीडर था। वह सोशल मीडिया ग्रुपों के जरिये बैंक खातों की जानकारी जुटाता, ठगी की रकम मंगवाता और नकदी को क्रिप्टो करेंसी में बदलवाने की व्यवस्था करता था। वह पिछले एक साल से इस काम में शामिल था। रवि वर्मा लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और चेकबुक जुटाता था। नकदी निकालने के बदले वह 10 प्रतिशत कमीशन रखता था। आदर्श सिंह और प्रज्ञा रतन की भूमिका नकदी को यूएसडीटी में बदलवाने में थी। वे नवनीत से नकदी लेकर मकसूद के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में बदलवाते थे। इसके बदले उन्हें प्रति यूएसडीटी 160 रुपये कमीशन मिलता था। मकसूद आलम खान गिरोह की अहम कड़ी था। वह विदेशी एजेंटों के संपर्क में रहकर नकदी को क्रिप्टोकरेंसी में बदलवाता और रकम को बताए गए वॉलेट में ट्रांसफर कराता था। पुलिस के मुताबिक, उसके कब्जे से 12.76 लाख रुपये नकद और 19 एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं।
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12 राज्यों से जुड़ी शिकायतों ने बढ़ाया जांच का दायरा
34 बैंक खातों में 4.09 करोड़ रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड से जुड़े लेन-देन की पुष्टि होने के बाद जांच का दायरा कई राज्यों तक पहुंच गया है। बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से जुड़ी शिकायतों की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों का इस्तेमाल किन लोगों ने कराया और ठगी की रकम किन-किन वॉलेट तक पहुंची। पांच अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि नेटवर्क के पीछे मौजूद मुख्य संचालक कौन हैं और कितने लोग इस व्यवस्था से जुड़े हैं।
बोले अधिकारी
गिरोह से जुड़े खाताधारकों और भागे आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस की कोशिश है कि ठगी की रकम के लेन-देन की पूरी कड़ी का पता लगाकर मुख्य आरोपियों तक पहुंचा जाए।
- अयोध्या प्रसाद, एसपी क्राइम
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पुलिस के अनुसार, गिरोह का काम केवल लोगों को ठगने तक सीमित नहीं था। साइबर फ्रॉड और निवेश के नाम पर ठगी गई रकम को बैंकिंग व्यवस्था से बाहर निकालना भी इसकी अहम रणनीति थी। इसके लिए पहले ऐसे लोगों की तलाश की जाती थी, जो कमीशन के बदले अपने बैंक खाते इस्तेमाल करने देने को तैयार हों। इन खातों में देश के अलग-अलग हिस्सों से ठगी की रकम पहुंचाई जाती थी। इसके बाद एटीएम कार्ड और चेक के जरिये नकदी निकाली जाती थी। रकम को सीधे किसी एक व्यक्ति के पास रखने के बजाय अलग-अलग सदस्यों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता था। अंतिम चरण में विदेशी एजेंटों की मदद से नकदी को यूएसडीटी में बदलकर निर्धारित क्रिप्टो वॉलेट में भेजा जाता था। इस पूरी प्रक्रिया का मकसद लेनदेन की कड़ियों को उलझाना और रकम के स्रोत को छिपाना था।
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पकड़े गए पांचों आरोपियों की अलग-अलग थी जिम्मेदारी
पुलिस के अनुसार, नवनीत पांडेय गिरोह का स्थानीय लीडर था। वह सोशल मीडिया ग्रुपों के जरिये बैंक खातों की जानकारी जुटाता, ठगी की रकम मंगवाता और नकदी को क्रिप्टो करेंसी में बदलवाने की व्यवस्था करता था। वह पिछले एक साल से इस काम में शामिल था। रवि वर्मा लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड और चेकबुक जुटाता था। नकदी निकालने के बदले वह 10 प्रतिशत कमीशन रखता था। आदर्श सिंह और प्रज्ञा रतन की भूमिका नकदी को यूएसडीटी में बदलवाने में थी। वे नवनीत से नकदी लेकर मकसूद के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में बदलवाते थे। इसके बदले उन्हें प्रति यूएसडीटी 160 रुपये कमीशन मिलता था। मकसूद आलम खान गिरोह की अहम कड़ी था। वह विदेशी एजेंटों के संपर्क में रहकर नकदी को क्रिप्टोकरेंसी में बदलवाता और रकम को बताए गए वॉलेट में ट्रांसफर कराता था। पुलिस के मुताबिक, उसके कब्जे से 12.76 लाख रुपये नकद और 19 एटीएम कार्ड बरामद हुए हैं।
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12 राज्यों से जुड़ी शिकायतों ने बढ़ाया जांच का दायरा
34 बैंक खातों में 4.09 करोड़ रुपये से अधिक के साइबर फ्रॉड से जुड़े लेन-देन की पुष्टि होने के बाद जांच का दायरा कई राज्यों तक पहुंच गया है। बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से जुड़ी शिकायतों की कड़ियां खंगाली जा रही हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों का इस्तेमाल किन लोगों ने कराया और ठगी की रकम किन-किन वॉलेट तक पहुंची। पांच अन्य आरोपियों की तलाश भी जारी है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि नेटवर्क के पीछे मौजूद मुख्य संचालक कौन हैं और कितने लोग इस व्यवस्था से जुड़े हैं।
बोले अधिकारी
गिरोह से जुड़े खाताधारकों और भागे आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस की कोशिश है कि ठगी की रकम के लेन-देन की पूरी कड़ी का पता लगाकर मुख्य आरोपियों तक पहुंचा जाए।
- अयोध्या प्रसाद, एसपी क्राइम