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Gorakhpur News: सुपरअल्कली के प्रयोग से बढ़ा सकते हैं हाइड्रोजन स्टोरेज की क्षमता
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंबरीश श्रीवास्तव की एक महत्वपूर्ण शोध समीक्षा ‘फ्रंटियर्स इन केमिस्ट्री’ जर्नल में प्रकाशित हुई है। इसमें उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि सुपरअल्कली का प्रयोग कर हाइड्रोजन स्टोरेज की क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
यह समीक्षा जर्नल के ‘रासायनिक भौतिकी एवं भौतिक रसायन’ खंड में प्रकाशित हुई है। यह शोध कार्य वैश्विक स्तर पर ‘बेहतर हाइड्रोजन भंडारण समाधानों के लिए परमाणु-अतिपुंजों का उपयोग’ के विशेष विषय के तहत जारी किया गया है। डॉ. अंबरीश ने बताया कि सुपरअल्कली विशेष रासायनिक अणु या अतिपुंज (क्लस्टर) होते हैं, जिनकी आयनीकरण ऊर्जा पारंपरिक क्षार धातुओं (जैसे सोडियम या लिथियम) से भी कम होती है। अपनी इस अनूठी विशेषता के कारण ये बेहद शक्तिशाली अपचायक (रिड्यूसिंग एजेंट) के रूप में कार्य करते हैं और उन्नत पदार्थों के निर्माण में इनका व्यापक उपयोग होता है।
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यह समीक्षा जर्नल के ‘रासायनिक भौतिकी एवं भौतिक रसायन’ खंड में प्रकाशित हुई है। यह शोध कार्य वैश्विक स्तर पर ‘बेहतर हाइड्रोजन भंडारण समाधानों के लिए परमाणु-अतिपुंजों का उपयोग’ के विशेष विषय के तहत जारी किया गया है। डॉ. अंबरीश ने बताया कि सुपरअल्कली विशेष रासायनिक अणु या अतिपुंज (क्लस्टर) होते हैं, जिनकी आयनीकरण ऊर्जा पारंपरिक क्षार धातुओं (जैसे सोडियम या लिथियम) से भी कम होती है। अपनी इस अनूठी विशेषता के कारण ये बेहद शक्तिशाली अपचायक (रिड्यूसिंग एजेंट) के रूप में कार्य करते हैं और उन्नत पदार्थों के निर्माण में इनका व्यापक उपयोग होता है।
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