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Gorakhpur News: समय पर मिले उपचार तो फंदा लगाने वालों की जान बचाना भी संभव
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- एम्स के डॉक्टरों का शोध ''''जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर'''' में प्रकाशित
- एम्स के डॉक्टरों ने नई तकनीक से आत्मघाती कदम उठाने वाले 10 लोगों की बचाई जान
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। फंदा लगाकर जान देने की कोशिश करने वाले शख्स को अगर घंटे भर के भीतर किसी ऐसे अस्पताल पहुंचा दिया जाए, जहां ऑपरेशन कर ऑक्सीजन सपोर्ट मिल जाए तो जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। गोरखपुर एम्स के डॉक्टरों ने ऐसा करके अब तक 10 मरीजों की जान बचाई है। यह उपलब्धि शोध के रूप में ''''जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर'''' में प्रकाशित हुई है।
एम्स के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों ने चार महीने में आए ऐसे चार मामलों का अध्ययन किया। इनमें से तीन आत्महत्या की कोशिश और एक मामला आकस्मिक दुर्घटना का था, जबकि एक मामले में महिला का दुपट्टा आटा चक्की में फंसने के कारण दम घुटने से बेहोश हो गई था।
डॉक्टरों ने बताया कि फंदा लगाकर आत्महत्या की कोशिश करने वाले मरीजों के गले और गर्दन पर गंभीर चोटें आती हैं। गर्दन में फ्रैक्चर होने के कारण सांस रुक जाती है। बाहर से ऑक्सीजन सपोर्ट देने के लिए श्वास नली में ट्यूब डालना चुनौतीपूर्ण होता है लेकिन ये विधि ऐसे मरीजों की जान बचाने के लिए काफी कारगर साबित हुई है। डॉक्टरों ने ऐसे ही ट्यूब के माध्यम से मस्तिष्क को ऑक्सीजन पहुंचाया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी।
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इसी आधार पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि ऐसे मरीजों को एक घंटे के भीतर अस्पताल लाने पर उनके बचने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है। कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि यह शोध आने वाले समय में ऐसे गंभीर दूसरे मरीजों की जान बचाने के काम आएगा।
अब तक 10 लोगों की बचाई जा चुकी है जान
डॉ. अरुण पांडेय ने बताया कि एम्स में आठ महीने पहले 24 वर्षीय मरीज के फंदा लगाने का केस आया था, जिसमें मरीज को आधे घंटे के भीतर एम्स में भर्ती किया गया। समय पर इलाज शुरू होने पर मरीज की जान बचाई गई। इसके बाद तीन अन्य मरीजों की इसी तकनीकी के माध्यम से जान बचाई गई। उपचार की इस नई पद्धति को लेकर एम्स की तरफ से ऐसे गंभीर मरीज और उपचार को लेकर शोध किया गया। ऐसे मामलों में मरीज को एक से दो घंटे के भीतर अस्पताल लाना जरूरी है। एम्स के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डाॅ. अरविंद, डॉ. सुहास, डॉ. अरुण पांडेय, डॉ. राहुल, डॉ. श्रीश्रा एवं डाॅ. नागास्वामी ने फांसी लगाने वाले केसों में मरीजों के समय से उपचार कर उनकी जान बचाई।
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- एम्स के डॉक्टरों ने नई तकनीक से आत्मघाती कदम उठाने वाले 10 लोगों की बचाई जान
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। फंदा लगाकर जान देने की कोशिश करने वाले शख्स को अगर घंटे भर के भीतर किसी ऐसे अस्पताल पहुंचा दिया जाए, जहां ऑपरेशन कर ऑक्सीजन सपोर्ट मिल जाए तो जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। गोरखपुर एम्स के डॉक्टरों ने ऐसा करके अब तक 10 मरीजों की जान बचाई है। यह उपलब्धि शोध के रूप में ''''जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन एंड प्राइमरी केयर'''' में प्रकाशित हुई है।
एम्स के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञों ने चार महीने में आए ऐसे चार मामलों का अध्ययन किया। इनमें से तीन आत्महत्या की कोशिश और एक मामला आकस्मिक दुर्घटना का था, जबकि एक मामले में महिला का दुपट्टा आटा चक्की में फंसने के कारण दम घुटने से बेहोश हो गई था।
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डॉक्टरों ने बताया कि फंदा लगाकर आत्महत्या की कोशिश करने वाले मरीजों के गले और गर्दन पर गंभीर चोटें आती हैं। गर्दन में फ्रैक्चर होने के कारण सांस रुक जाती है। बाहर से ऑक्सीजन सपोर्ट देने के लिए श्वास नली में ट्यूब डालना चुनौतीपूर्ण होता है लेकिन ये विधि ऐसे मरीजों की जान बचाने के लिए काफी कारगर साबित हुई है। डॉक्टरों ने ऐसे ही ट्यूब के माध्यम से मस्तिष्क को ऑक्सीजन पहुंचाया, जिससे उसकी जान बचाई जा सकी।
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इसी आधार पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि ऐसे मरीजों को एक घंटे के भीतर अस्पताल लाने पर उनके बचने की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है। कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने कहा कि यह शोध आने वाले समय में ऐसे गंभीर दूसरे मरीजों की जान बचाने के काम आएगा।
अब तक 10 लोगों की बचाई जा चुकी है जान
डॉ. अरुण पांडेय ने बताया कि एम्स में आठ महीने पहले 24 वर्षीय मरीज के फंदा लगाने का केस आया था, जिसमें मरीज को आधे घंटे के भीतर एम्स में भर्ती किया गया। समय पर इलाज शुरू होने पर मरीज की जान बचाई गई। इसके बाद तीन अन्य मरीजों की इसी तकनीकी के माध्यम से जान बचाई गई। उपचार की इस नई पद्धति को लेकर एम्स की तरफ से ऐसे गंभीर मरीज और उपचार को लेकर शोध किया गया। ऐसे मामलों में मरीज को एक से दो घंटे के भीतर अस्पताल लाना जरूरी है। एम्स के ट्रॉमा एवं इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के डाॅ. अरविंद, डॉ. सुहास, डॉ. अरुण पांडेय, डॉ. राहुल, डॉ. श्रीश्रा एवं डाॅ. नागास्वामी ने फांसी लगाने वाले केसों में मरीजों के समय से उपचार कर उनकी जान बचाई।