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गोरखपुर में बाढ़ का खतरा सिर पर: राप्ती-रोहिन के ठहराव पर न जाएं, अक्तूबर तक बरपाती है कहर

Wed, 05 Jul 2023 03:24 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 05 Jul 2023 03:24 PM IST
सार

मौसम विभाग के जानकारों के अनुसार, 15 जून से लेकर 30 सितंबर तक मानसून का सीजन होता है। इस दौरान होने वाली अधिकाधिक बारिश से जलभराव की स्थिति बनती है। वर्ष 2022 में विलंब से आकर मानसून देरी से लौटा था। इस बार भी इसी तरह के अनुमान हैं।

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Rapti river will swell even in October when monsoon returns
गोरखपुर में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इस बार पूर्वी यूपी में मानसून देर से आया, लेकिन मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह देर से लौटेगा भी। यानी, मानसून सितंबर की बजाय अक्टूबर तक बरकरार रहेगा। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही से नदियों की बाढ़ तबाही मचा सकती है। शासन-प्रशासन को अब ज्यादा सजग और मुस्तैद रहने की जरूरत है, क्योंकि आंकड़े गवाह हैं कि राप्ती नदी बीते कुछ वर्षों में अक्टूबर में भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी।

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इधर, कुछ दिनों से नेपाल में बारिश थमने से राप्ती और रोहिन समेत सभी नदियां या तो स्थिर हैं, या फिर उनके जलस्तर में मामूली वृद्धि हो रही है। लेकिन बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। मौसम विभाग के जानकारों के मुताबिक, मानसून देर से लौट सकता है। नेपाल में फिर से बारिश जोरदार हुई तो नदियां फिर उफनाएंगी। ऐसे में बाढ़ बचाव कार्य को लेकर मुस्तैद रहने की जरूरत है।
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दरअसल, इधर कुछ वर्षों से मानसून के ढर्रे में परिवर्तन दिख रहा है। खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह देखा जा रहा है कि यह देर से आ रहा। शुरुआत में उस तरह की बारिश भी नहीं हो रही। मानसून के लौटने का समय सितंबर माना जाता है, लेकिन यह अब अक्टूबर तक बरकरार रह रहा है। इसी दौरान लापरवाही हो जाती है। बाढ़ बचाव कार्य धीमे पड़ जाते हैं और लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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सिंचाई विभाग के आंकड़े भी मानसून के बदलते ढर्रे की गवाही देते हैं। जुलाई, अगस्त और सितंबर के अलावा अक्टूबर माह में भी बाढ़ आ रही है। वर्ष 2022 में 24 अक्टूबर तक राप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर बही थी। जबकि इसके पूर्व वर्ष 2021 में 16 सितंबर तक राप्ती का जलस्तर 74.940 मीटर गेज था। इस साल भी मानसून में विलंब हुआ है। मौसम विभाग के जानकारों के अनुसार इस बार भी 10 अक्टूबर के बाद तक बारिश होने का अनुमान है।

मौसम विभाग के जानकारों के अनुसार, 15 जून से लेकर 30 सितंबर तक मानसून का सीजन होता है। इस दौरान होने वाली अधिकाधिक बारिश से जलभराव की स्थिति बनती है। वर्ष 2022 में विलंब से आकर मानसून देरी से लौटा था। इस बार भी इसी तरह के अनुमान हैं।

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ऐसे में अक्टूबर माह तक बाढ़ की स्थिति बनी रहेगी। जलवायु में हो रहे बदलाव के कारण बारिश भी आगे खिसकती जा रही है। इसका असर बाढ़ पर पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि बीते साल अक्टूबर माह में हुई बारिश पिछले 50 साल की तुलना में सर्वाधिक थी।

 

चढ़ाव पर है राप्ती नदी और उतार पर रोहिन

मंगलवार को जारी सूचना के मुताबिक, नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार काफी कम है। राप्ती नदी जहां चढ़ाव पर रही, वहीं रोहिन नदी का पानी भौराबारी में घटाव पर रहा। तुर्तीपार में घाघरा, बर्डघाट में राप्ती सहित अन्य नदियों का जलस्तर चढ़ाव पर दर्ज किया गया। सिंचाई विभाग के लोगों का कहना है कि अभी नदी का बढ़ाव जारी रहेगा।

मंगलवार की सुबह आठ बजे और शाम चार बजे नदी का जलस्तर

नदी स्थान खतरे का निशान सुबह आठ बजे शाम चार बजे
घाघरा अयोध्या पुल 92.73  91.270 91.270
घाघरा तुर्तीपार 64.01 61.810 61.890
कुआनो मुखलिसपुर 78.65    75.710 75.730
राप्ती बांसी 84.90  82.420 00
राप्ती बर्डघाट 74.98 79.890 00
रोहिन
रोहिल
त्रिमुहानी
भौराबारी
82.44
79.00
79.890
75.400
00
75.350


नोट: जलस्तर मीटर में है।

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वर्ष 15 जून से 29 अक्टूबर तक कुल वर्षा अधिकतम बारिश
2022 1105.30 मिमी 164.00 मिमी (15 सितंबर 2022)
2021 1504.80 मिमी 130.60 मिमी (21 अक्तूबर 2021)
2020 2140.70 मिमी 156.40 मिमी (31 अगस्त 2020)



 

बर्डघाट में राप्ती नदी का तीन साल जलस्तर

वर्ष 2022 स्तर
09 अक्तूबर 75.170
24 अक्तूबर 75.110
वर्ष 2021 स्तर
16 अगस्त 75.020
16 सितंबर 74.940
वर्ष 2020 स्तर
15 जुलाई 75.240
09 अगस्त 75.120



 

जिम्मेदारों ने क्या कहा

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने कहा कि जलवायु में बदलाव के कारण मानसून का ढर्रा भी बदला है। इसके विलंब से आने और देरी से लौटने की वजह से यह नौबत आई है। यदि समय से बारिश हो तो नदी में बाढ़ भी समय से आकर खत्म हो जाएगी। लेकिन दो, तीन साल से यह गड़बड़ी देखी जा रही है।

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मौसम वैज्ञानिक कैलाश पांडेय ने कहा कि  नेपाल में नदी के कैचमेंट एरिया (जल प्रभावित क्षेत्र) में बारिश होने से राप्ती और रोहिन का पानी बढ़ता है। पिछले हफ्ते में वहां बारिश हुई थी। इससे नदियों का जलस्तर बढ़ा। मानसून भी खिसककर अक्टूबर माह तक पहुंच जा रहा है। इससे बारिश विलंब से हो रही है।

सिंचाई विभाग अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने कहा कि नेपाल में बारिश होने पर राप्ती और रोहिन का पानी बढ़ेगा। हाल के दिनों में कम बारिश हुई है। इसलिए अभी नदी धीमी गति से बढ़ रही है। बाढ़ को देखते हुए तैयारी पूरी कर ली गई है।

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