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Gorakhpur News: चुड़े से अग्नि प्रज्वलित कर सती हो गई थीं राणी सती दादी
Mon, 04 Sep 2023 02:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 04 Sep 2023 02:36 AM IST
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गोरखपुर। श्री राणीसती दादी में मारवाड़ी समाज के लोगों की गहरी आस्था है क्योंकि, ये समाज उन्हें मां दुर्गा का रूप मानने के साथ ही अपनी आराध्य व कुलदेवी मानता है। महानगर का मारवाड़ी समाज राणी सती दादी (नारायणी) मंगलपाठ का आयोजन कर विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर उनके प्रति आस्था निवेदित करता है।
मान्यता के अनुसार, श्री राणी सती दादी का जुड़ाव महाभारत काल से है। राणी सती दादी द्वापर में अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा थीं। अभिमन्यु की मृत्यु के बाद जब उत्तरा गर्भवती होते हुए जब सती होने जा रही थीं, भगवान कृष्ण ने उन्हें रोक दिया और कहा कि कलयुग में तुम्हारा जन्म होगा उस समय लोग तुम्हें मेरे नाम यानी (नारायणी) के नाम से जानेंगे।
कलयुग में नारायणी का जन्म हरियाण के डोकवा गांव में हुआ था। नारायणी शुरू से ही तेजस्वी थीं। शिक्षा दीक्षा के बाद उनका विवाह अभिमन्यु के रूप में हरियाणा के हिसार में जन्में तनधन दास से हुआ जो दिल्ली के नवाब के यहां दीवान थे। नवाब को तनधन के विवाह से आपत्ति थी।
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जब तनधन दास अपनी पत्नी का गवना कराकर ला रहे थे, तब नवाब ने अपनी सेना के साथ उन्हें रोक लिया और तनधन दास की हत्या करवा दी। जिसके बाद नारायणी ने दुर्गा का रूप धारण कर लिया और अपने तेज से वहां कुआं बनाया और चिता सजा दी। कुआं में स्नान के बाद उन्होंने अपने चुड़े से चिता की अग्नि प्रज्वलित की और उसमें बैठकर खुद को सती कर लिया। मारवाड़ी समाज के तुल्सयान और जालान परिवार तनधन राम के भाई कमला राम को अपना वंशज मानते हैं।
कोट
दादी परिवार महिला मंडल समिति की ओर से प्रत्येक वर्ष मंगलपाठ का आयोजन होता है। इसमें बड़ी संख्या में मारवाड़ी समाज के लोगों की सहभागिता रहती है।
- मंजूश्री जालान, दादी परिवार महिला मंडल समिति
राणी सती दादी में मारवाड़ी समाज के लोगों की गहरी आस्था है। इस आयोजन में विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर दादीजी के प्रति आस्था निवेदित करते हैं।
- संजू तुल्सयान, दादी परिवार महिला मंडल समिति
मारवाड़ी समाज के लोग श्री राणी सती दादी को अपनी आराध्य व कुल देवी मानते हैं। 20 वर्षों से इस उत्सव का आयोजन धूमधाम से किया जा रहा है।
- पवन सिंघानिया, श्री राणी सती दादी सेवा मंडल
दो दिनों के इस उत्सव में मारवाड़ी समाज के लोगों में उत्सव का माहौल रहता है। आयोजन तो दादी महिला सेवा मंडल करती है, लेकिन इसमें उनका पूरा सहयोग किया जाता है।
- भरत जालान, श्री राणी सती दादी सेवा मंडल
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मान्यता के अनुसार, श्री राणी सती दादी का जुड़ाव महाभारत काल से है। राणी सती दादी द्वापर में अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा थीं। अभिमन्यु की मृत्यु के बाद जब उत्तरा गर्भवती होते हुए जब सती होने जा रही थीं, भगवान कृष्ण ने उन्हें रोक दिया और कहा कि कलयुग में तुम्हारा जन्म होगा उस समय लोग तुम्हें मेरे नाम यानी (नारायणी) के नाम से जानेंगे।
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कलयुग में नारायणी का जन्म हरियाण के डोकवा गांव में हुआ था। नारायणी शुरू से ही तेजस्वी थीं। शिक्षा दीक्षा के बाद उनका विवाह अभिमन्यु के रूप में हरियाणा के हिसार में जन्में तनधन दास से हुआ जो दिल्ली के नवाब के यहां दीवान थे। नवाब को तनधन के विवाह से आपत्ति थी।
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जब तनधन दास अपनी पत्नी का गवना कराकर ला रहे थे, तब नवाब ने अपनी सेना के साथ उन्हें रोक लिया और तनधन दास की हत्या करवा दी। जिसके बाद नारायणी ने दुर्गा का रूप धारण कर लिया और अपने तेज से वहां कुआं बनाया और चिता सजा दी। कुआं में स्नान के बाद उन्होंने अपने चुड़े से चिता की अग्नि प्रज्वलित की और उसमें बैठकर खुद को सती कर लिया। मारवाड़ी समाज के तुल्सयान और जालान परिवार तनधन राम के भाई कमला राम को अपना वंशज मानते हैं।
कोट
दादी परिवार महिला मंडल समिति की ओर से प्रत्येक वर्ष मंगलपाठ का आयोजन होता है। इसमें बड़ी संख्या में मारवाड़ी समाज के लोगों की सहभागिता रहती है।
- मंजूश्री जालान, दादी परिवार महिला मंडल समिति
राणी सती दादी में मारवाड़ी समाज के लोगों की गहरी आस्था है। इस आयोजन में विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर दादीजी के प्रति आस्था निवेदित करते हैं।
- संजू तुल्सयान, दादी परिवार महिला मंडल समिति
मारवाड़ी समाज के लोग श्री राणी सती दादी को अपनी आराध्य व कुल देवी मानते हैं। 20 वर्षों से इस उत्सव का आयोजन धूमधाम से किया जा रहा है।
- पवन सिंघानिया, श्री राणी सती दादी सेवा मंडल
दो दिनों के इस उत्सव में मारवाड़ी समाज के लोगों में उत्सव का माहौल रहता है। आयोजन तो दादी महिला सेवा मंडल करती है, लेकिन इसमें उनका पूरा सहयोग किया जाता है।
- भरत जालान, श्री राणी सती दादी सेवा मंडल