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Gorakhpur News: राप्ती की कटान तेज हुई तो बोल्डर-पिचिंग की याद आई
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बोक्टा-बरवार बांध पर बाढ़ बचाव का काम अब तक अधूरा
बरहुआ के पास बंधा सुरक्षित नहीं, वाहनों के आने जाने के लिए काटा गया बंधा, जस का तस
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने के चलते कटान तेज हुई तो जिम्मेदारों को गोरखपुर-लखनऊ हाइवे के किनारे बने बोक्टा-बरवार बांध को दुरूस्त करने की याद आई है। राप्ती नदी के बाईं तरफ स्थित इस बंधे की कटान को रोकने के लिए अब मिर्जापुर स्टोन से बोल्डर स्लोप पिंचिंग का कार्य कराया जा रहा है।
बरहुआ के पास राप्ती नदी बंधे से सटककर बहती है। बुधवार की दोपहर 2.29 मिनट पर यहां बंधे पर बने रेन कट्स भरे जा रहे थे। साथ कटान रोकने के लिए ठोकर पर तेजी से बोल्डर पिंचिंग की जा रही थी। जगदीश यादव और महात्मा के घर के सामने बंधे पर नदी में तेज बहाव नजर आया। यहां जेसीबी के सहारे बोल्डर डालकर स्लोप पिच करने का काम चल रहा था। पिंचिंग को बहाव से बचाने के लिए जाली रखी गई थी।
मजदूरों ने बताया कि बोल्डर लगाने के बाद जाली से बांधा जाएगा। यहां से कुछ दूर बंधे पर अरविंद और मुख्तार रेनकट्स में मिट्टी भर रहे थे। दोनाें ने बताया कि ठोकर पर कुछ काम बाकी था, जिसे पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा नदी की कटान रोकने के लिए जीरो बैग लगा दिया गया है। अभी पानी बढ़ने से जीरो बैग छिप गए हैं। बाढ़ आने तक काम पूरा हो जाएगा।
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नौसड़ से शुरू होने वाले बंधे पर बीते चार महीने से बोल्डर पिचिंग सहित अन्य काम कराए जा रहे हैं। इस बंधे पर बरहुआ से बड़गहन, एकडंगा से शेरगढ़ सहित आधा दर्जन जगहों पर नदी की कटान का खतरा रहता है। नौसड़ से आगे जाने पर शेरगढ़ के पास वाहनों के आने-जाने के लिए बंधे को तीन फीट की गहराई तक काटा गया है। अब बाढ़ आने वाली हैं, लेकिन यहां मिट्टी नहीं भरी गई है।
शेरगढ़ के श्रीकांत और अनिल ने बताया राप्ती का जलस्तर ज्यादाा बढ़ा तो यहां से पानी ओवरफ्लो करके हाइवे पर पहुंच जाएगा। यहां पर एक तरफ बोल्डर पिंचिंग काम कराया गया है। लेकिन काम अधूरा है। ग्रामीणों ने कहा कि चार दिनों से काम ठप है। यहां से आगे जाने पर एकडंगा के पास बंधे को करीब चार फीट की गहराई में काटा गया है। इससे मिट्टी खनन के वाहन नदी की ओर आते जाते है। फिलहाल इस रास्ते का इस्तेमाल नदी के किनारे बोल्डर पहुंचाने में किया जा रहा है।
इस कटान के सामने किराना की दुकान चलाने वाले सतीश कुमार ने बताया कि वर्ष 1998 में आई बाढ़ में पूरा इलाका डूबा था। अब बरसात आ गई है। इसलिए मरम्मत हो जानी चाहिए थी। लेकिन सिंचाई विभाग के लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे बंधे के टूटने का खतरा रहेगा।
दो दिनों खतरे के निशान पार कर सकती है राप्ती
गोरखपुर। जिले में राप्ती, रोहिन सहित अन्य नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नेपाल के कैचमेंट एरिया में हो रही बारिश से आने वाले दिनों में बाढ़ की आशंका तेज हो गई है। सिद्धार्थनगर के ककरही में बुधवार को बूढ़ी राप्ती खतरे के निशान को पार कर चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले दो दिनों में गोरखपुर में भी राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान पार कर सकता है। ककरही में खतरे का निशान 85.65 मीटर है। बुधवार को यहां पर बूढ़ी राप्ती का जलस्तर 86.150 मीटर पहुंच गया। सिंचाई विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि बूढ़ी राप्ती के असर से राप्ती का पानी बढ़ेगा। आने वाले दो दिनों में जलस्तर खतरे के निशान को पार कर सकता है। बर्डघाट में राप्ती नदी का खतरे का निशान 74.98 मीटर तय है। यहां बुधवार की शाम चार बजे राप्ती का जलस्तर 73.600 मीटर दर्ज किया गया है। रोहिन सहित अन्य नदियों के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है। उधर, जिला प्रशासन के अधिकारियों का दावा है कि तटबंधों की सुरक्षा के साथ ही बाढ़-बचाव और राहत के कार्य को लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है।
बुधवार को यह रहा नदियों का जलस्तर
नदी स्थान खतरे का निशान सुबह आठ बजे शाम चार बजे
घाघरा अयोध्या पुल 92.73 91.150 91.100
घाघरा तुर्तीपार 64.01 62.720 62.610
कुआनो मुखलिसपुर 78.65 75.670 75.650
राप्ती बांसी 84.90 78.800 81.800
राप्ती बर्डघाट 74.98 73.490 73.600
रोहिन त्रिमुहानी 82.44 80.680 80.230
रोहिन भौराबारी 79.00 75.900 76.100
गोर्रा पिंडरा 70.50 67.950 67.300
बूढ़ी राप्ती ककरही 85.65 86.230 86.230
नोट: जलस्तर मीटर में है।
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अभी फिलहाल बूढ़ी राप्ती का पानी तेजी से बढ़ा है। इस वजह से राप्ती में बहाव है। यदि नेपाल में बरसात हुई तो दो दिनों के भीतर राप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर बढ़ जाएगी। बाढ़ की आशंका को देखते हुए नदियों के उतार चढ़ाव पर नजर रखी जा रही है। बुधवार की शाम छह बजे राप्ती बैराज से 18720 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। नदी बढ़ाव की ओर है।
दिनेश सिंह, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
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बोक्टा बरवार बांध की सुरक्षा के लिए करीब 80 फीसदी काम पूरा करा लिया गया है। बोल्डर पिंचिंग का कुछ काम बाकी है, जिसे कराया जा रहा है। खनन के वाहन ले जाने के लिए कुछ लोगों ने बंधे को काट दिया था। इसकी मरम्मत भी कराई जाएगी।
रुपेश कुमार खरे, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड दो
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बरहुआ के पास बंधा सुरक्षित नहीं, वाहनों के आने जाने के लिए काटा गया बंधा, जस का तस
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने के चलते कटान तेज हुई तो जिम्मेदारों को गोरखपुर-लखनऊ हाइवे के किनारे बने बोक्टा-बरवार बांध को दुरूस्त करने की याद आई है। राप्ती नदी के बाईं तरफ स्थित इस बंधे की कटान को रोकने के लिए अब मिर्जापुर स्टोन से बोल्डर स्लोप पिंचिंग का कार्य कराया जा रहा है।
बरहुआ के पास राप्ती नदी बंधे से सटककर बहती है। बुधवार की दोपहर 2.29 मिनट पर यहां बंधे पर बने रेन कट्स भरे जा रहे थे। साथ कटान रोकने के लिए ठोकर पर तेजी से बोल्डर पिंचिंग की जा रही थी। जगदीश यादव और महात्मा के घर के सामने बंधे पर नदी में तेज बहाव नजर आया। यहां जेसीबी के सहारे बोल्डर डालकर स्लोप पिच करने का काम चल रहा था। पिंचिंग को बहाव से बचाने के लिए जाली रखी गई थी।
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मजदूरों ने बताया कि बोल्डर लगाने के बाद जाली से बांधा जाएगा। यहां से कुछ दूर बंधे पर अरविंद और मुख्तार रेनकट्स में मिट्टी भर रहे थे। दोनाें ने बताया कि ठोकर पर कुछ काम बाकी था, जिसे पूरा किया जा रहा है। इसके अलावा नदी की कटान रोकने के लिए जीरो बैग लगा दिया गया है। अभी पानी बढ़ने से जीरो बैग छिप गए हैं। बाढ़ आने तक काम पूरा हो जाएगा।
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नौसड़ से शुरू होने वाले बंधे पर बीते चार महीने से बोल्डर पिचिंग सहित अन्य काम कराए जा रहे हैं। इस बंधे पर बरहुआ से बड़गहन, एकडंगा से शेरगढ़ सहित आधा दर्जन जगहों पर नदी की कटान का खतरा रहता है। नौसड़ से आगे जाने पर शेरगढ़ के पास वाहनों के आने-जाने के लिए बंधे को तीन फीट की गहराई तक काटा गया है। अब बाढ़ आने वाली हैं, लेकिन यहां मिट्टी नहीं भरी गई है।
शेरगढ़ के श्रीकांत और अनिल ने बताया राप्ती का जलस्तर ज्यादाा बढ़ा तो यहां से पानी ओवरफ्लो करके हाइवे पर पहुंच जाएगा। यहां पर एक तरफ बोल्डर पिंचिंग काम कराया गया है। लेकिन काम अधूरा है। ग्रामीणों ने कहा कि चार दिनों से काम ठप है। यहां से आगे जाने पर एकडंगा के पास बंधे को करीब चार फीट की गहराई में काटा गया है। इससे मिट्टी खनन के वाहन नदी की ओर आते जाते है। फिलहाल इस रास्ते का इस्तेमाल नदी के किनारे बोल्डर पहुंचाने में किया जा रहा है।
इस कटान के सामने किराना की दुकान चलाने वाले सतीश कुमार ने बताया कि वर्ष 1998 में आई बाढ़ में पूरा इलाका डूबा था। अब बरसात आ गई है। इसलिए मरम्मत हो जानी चाहिए थी। लेकिन सिंचाई विभाग के लोग इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे बंधे के टूटने का खतरा रहेगा।
दो दिनों खतरे के निशान पार कर सकती है राप्ती
गोरखपुर। जिले में राप्ती, रोहिन सहित अन्य नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नेपाल के कैचमेंट एरिया में हो रही बारिश से आने वाले दिनों में बाढ़ की आशंका तेज हो गई है। सिद्धार्थनगर के ककरही में बुधवार को बूढ़ी राप्ती खतरे के निशान को पार कर चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगले दो दिनों में गोरखपुर में भी राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान पार कर सकता है। ककरही में खतरे का निशान 85.65 मीटर है। बुधवार को यहां पर बूढ़ी राप्ती का जलस्तर 86.150 मीटर पहुंच गया। सिंचाई विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि बूढ़ी राप्ती के असर से राप्ती का पानी बढ़ेगा। आने वाले दो दिनों में जलस्तर खतरे के निशान को पार कर सकता है। बर्डघाट में राप्ती नदी का खतरे का निशान 74.98 मीटर तय है। यहां बुधवार की शाम चार बजे राप्ती का जलस्तर 73.600 मीटर दर्ज किया गया है। रोहिन सहित अन्य नदियों के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है। उधर, जिला प्रशासन के अधिकारियों का दावा है कि तटबंधों की सुरक्षा के साथ ही बाढ़-बचाव और राहत के कार्य को लेकर तैयारी पूरी कर ली गई है।
बुधवार को यह रहा नदियों का जलस्तर
नदी स्थान खतरे का निशान सुबह आठ बजे शाम चार बजे
घाघरा अयोध्या पुल 92.73 91.150 91.100
घाघरा तुर्तीपार 64.01 62.720 62.610
कुआनो मुखलिसपुर 78.65 75.670 75.650
राप्ती बांसी 84.90 78.800 81.800
राप्ती बर्डघाट 74.98 73.490 73.600
रोहिन त्रिमुहानी 82.44 80.680 80.230
रोहिन भौराबारी 79.00 75.900 76.100
गोर्रा पिंडरा 70.50 67.950 67.300
बूढ़ी राप्ती ककरही 85.65 86.230 86.230
नोट: जलस्तर मीटर में है।
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अभी फिलहाल बूढ़ी राप्ती का पानी तेजी से बढ़ा है। इस वजह से राप्ती में बहाव है। यदि नेपाल में बरसात हुई तो दो दिनों के भीतर राप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर बढ़ जाएगी। बाढ़ की आशंका को देखते हुए नदियों के उतार चढ़ाव पर नजर रखी जा रही है। बुधवार की शाम छह बजे राप्ती बैराज से 18720 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। नदी बढ़ाव की ओर है।
दिनेश सिंह, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग
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बोक्टा बरवार बांध की सुरक्षा के लिए करीब 80 फीसदी काम पूरा करा लिया गया है। बोल्डर पिंचिंग का कुछ काम बाकी है, जिसे कराया जा रहा है। खनन के वाहन ले जाने के लिए कुछ लोगों ने बंधे को काट दिया था। इसकी मरम्मत भी कराई जाएगी।
रुपेश कुमार खरे, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड दो
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