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Exclusive: छोटे कामों से बड़ी सहूलियत देने में जुटा रेलवे, तेज गति से चल सकेंगी ट्रेनें

Wed, 22 Feb 2023 03:04 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 22 Feb 2023 03:04 PM IST
सार

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे में लाइन की क्षमता बढ़ाने के लिए तेजी से दोहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। मल्हौर से डालीगंज वाया गोमतीनगर, बादशाहनगर के दोहरीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

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Railway engaged in providing great convenience from small works
ट्रेन - फोटो : istock

विस्तार

बड़ी परियोजनाओं के इतर रेलवे अब छोटे-छोटे काम कराकर यात्रियों को बड़ी सहूलियत देने में जुटा है। पूर्वोत्तर रेलवे में चार ऐसे ही कामों को प्राथमिकता के तौर पर पूरा कराया गया है। ये काम डबल, वाई लाइन और नई बाईपास लाइन के हैं। इनके बन जाने से ट्रेनों की गति बढ़ जाएगी और समय की बचत होगी।

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मल्हौर से डालीगंज तक 20 मिनट बचेगा
मल्हौर से डालीगंज (लखनऊ) तक 12.6 किमी लंबाई में डबल लाइन बिछाई जा रही है। यह रूट लखनऊ शहर के बीच से होकर गुजरता है। इसे तय करने में करीब 40 मिनट लग जाते हैं। सिंगल लाइन होने से ट्रेनें 20 से 30 किमी प्रति घंटे की गति से ही चलती हैं। अगर कोई ट्रेन विपरीत दिशा से आ रही है तो एक ट्रेन को रोकना पड़ता है। लेकिन, दूसरी लाइन बिछ जाने से ट्रेनें आती-जाती रहेंगी। इससे न तो ट्रेनों को रोकना पड़ेगा और न ही गति धीमी होगी। इससे करीब 20 मिनट बचेंगे।
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ऐशबाग-मानकनगर बाईपास लाइन बनेगा विकल्प
कानपुर-दिल्ली जाने के लिए ट्रेनें ऐशबाग-मानकनगर रूट से जाती हैं। लेकिन, पाथ पर कुछ समय तक ट्रेनों की संख्या ज्यादा होती है। ऐसे में गोरखपुर की ओर से जाने वाली ट्रेनें लखनऊ जाती हैं और फिर घूमकर आती हैं। ऐशबाग-मानकनगर बाईपास लाइन बनने से रेलवे को नया विकल्प मिल जाएगा।
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गाजीपुर-ताड़ीघाट वाई लाइन से होगी दूरी कम

गाजीपुर-ताड़ीघाट वाई लाइन बनाई जा रही है। इस लाइन पर दो छोर से ट्रेनें आएंगी-जाएंगी। क्योंकि इसका आकार वाई जैसा है। इसके लिए गंगा नदी पर एक पुल भी बनाया जा रहा है। इसके बन जाने से मुगलसराय-गया जाने के लिए लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वाई लाइन से ही ट्रेनें चली जाएंगी और दूरी करीब 40 किमी कम हो जाएगी। वहीं, एक घंटे के समय की बचत भी होगी।

भटनी-पिवकोल बाईपास लाइन बनने से भी समय बचेगा
भटनी से पिवकोल और सलेमपुर के रास्ते वाराणसी जाने के लिए रेल लाइन तो है, लेकिन बिहार से आने वाली ट्रेनों के लिए यह रेललाइन सीधी नहीं है। भटनी पहुंचने वाली ट्रेनों के इंजन को रेक के आगे या पीछे करना पड़ता है। इंजन को बदलने में ही अतिरिक्त समय लग जाता है। जबकि ट्रेनों का ठहराव दो से पांच मिनट का ही होता है। ऐसे में जब बाईपास लाइन बन जाएगी तो इन ट्रेनों के ठहराव समय में लगभग आधे घंटे की बचत होगी। यह रेल लाइन भटनी से एकडंगा, साहोपार, महदेवा, चांदपार, सोनरापार, मिश्रौली से होते हुए पिवकोल के बीच बिछ रही है। इस मार्ग पर कुल चार पुल हैं, जिसमें तीन छोटे (अंडरपास) और एक बड़ा पुल शामिल है।

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे में लाइन की क्षमता बढ़ाने के लिए तेजी से दोहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। मल्हौर से डालीगंज वाया गोमतीनगर, बादशाहनगर के दोहरीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसी प्रकार भटनी-पिवकोल बाईपास लाइन, गाजीपुर-ताड़ीघाट वाई लाइन के बनने से ट्रेनों का संचलन सुगम हो जाएगा।
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