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लाइन बॉक्स की जगह ट्रॉली बैग देने का मामला: 105 वर्षीय नरमू महामंत्री को आश्वासन देकर मुकर गया रेल प्रशासन, पढ़िए पूरी जानकारी
Tue, 07 Sep 2021 09:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 07 Sep 2021 09:19 AM IST
सार
अब भी लोको पायलट को दिया जा रहा है ट्रॉली बैग। लखनऊ मंडल में लोको पायलटों ने ट्रॉली बैग लेने से इनकार कर दिया है और कुछ सामान अपने बैग में साथ लेकर जा रहे हैं।
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नरमू महामंत्री केएल गुप्त।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
रेलवे में लोको पायलट को लाइन बॉक्स की जगह ट्रॉली बैग देने के विरोध में दो दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) के महामंत्री 105 वर्षीय केएल गुप्त को आश्वासन देने के बाद रेल प्रशासन मुकर गया है। लोको पायलट को अब भी ट्रॉली बैग ही दिया जा रहा है। वहीं, लखनऊ मंडल में लोको पायलटों ने ट्रॉली बैग लेने से इनकार कर दिया है और सेफ्टी के कुछ सामान अपने बैग में साथ लेकर जा रहे हैं। गोरखपुर जंक्शन से दो तरफ के स्टाफ ड्यूटी करते हैं। पूर्व की ओर वाराणसी मंडल और पश्चिम की ओर लखनऊ मंडल के रनिंग स्टाफ जाते हैं।
वाराणसी मंडल में कुछ रनिंग स्टाफ ने ट्रॉली बैग लिया है जबकि ज्यादातर ट्रेनों में अभी बॉक्स को बॉक्स पोर्टर पहुंचा रहे हैं। वहां कार्यरत एक बॉक्स पोर्टर ने बताया कि गार्ड को तो अभी लाइन बॉक्स ही दिया जा रहा है, लेकिन लोको पायलट को ट्रॉली बैग देने का आदेश है। हालांकि लखनऊ मंडल में लोको पायलट ने ट्रॉली बैग लेने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि महाप्रबंधक ने खुद आश्वस्त किया है कि ट्रॉली बैग उन्हें नहीं दिया जाएगा। ऐसे में अधिकारी उनके भी आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। किसी भी कीमत पर हम ट्रॉली बैग नहीं ले जाएंगे। सभी लोको पायलट झंडी, ट्राई कलर टॉर्च व पटाखा के लिए डेटोनेटर साथ लेकर जा रहे हैं। किसी ने ट्रॉली बैग रिसीव नहीं किया है।
उत्तर रेलवे के लोको पायलट को निर्देश
उत्तर रेलवे से ट्रेन या मालगाड़ी लेकर आने वाले लोको पायलट से भी कहा गया है कि वे अपने यहां से लाइन बॉक्स लेकर न आएं। ट्रॉली बैग में ही संरक्षा उपकरण रखें। दरअसल, लाइन बॉक्स को उतारने व चढ़ाने के लिए बॉक्स पोर्टर की जरूरत पड़ती है। इस समय गोरखपुर में लोको पायलट के लिए लाइन बॉक्स व्यवस्था बंद होने से स्टाफ की दिक्कत हो गई है।
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रनिंग स्टॉफ इसलिए कर रहे विरोध
ट्राली बैग में संरक्षा उपकरण होने से वजन 15 किलो से ज्यादा होगा। जबकि इस बैग को लोको पायलट और गार्ड को ही ढोना पड़ेगा। वहीं, लाइन बॉक्स को संविदा पर रखे कर्मचारी ढोते हैं। कभी-कभी मालगाड़ी प्लेटफार्म पर नहीं खड़ी होती है, ऐसे में रेल लाइन तक ट्रॉलीबैग को लोको पायलट को ही ले जाना पड़ेगा। गार्ड और ड्राइवर ड्यूटी के बाद गाड़ी के लिए दूसरे स्टेशन पर रुकते हैं, ऐसे में ट्रॉलीबैग की सुरक्षा भी उन्हें ही करनी पड़ेगी।
क्षेत्रीय महामंत्री ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टॉफ एसोसिएशन विनय शर्मा ने बताया कि महाप्रबंधक के आश्वासन के बाद भी लाइन बॉक्स में संरक्षा उपकरण की लोडिंग नहीं हो रही है। साथ ही आदेश भी निरस्त नहीं किया गया है। इस समय कोई भी लोको पायलट ट्रॉली बैग नहीं ले रहा है। संरक्षा के उपकरण दो लाल व एक झंडी, ट्राई कलर टॉर्च, डेटोनेटर आदि हम साथ ले जा रहे हैं। अगर लाइन बॉक्स में संरक्षा उपकरण रखकर नहीं दिए गए तो आगे भी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
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वाराणसी मंडल में कुछ रनिंग स्टाफ ने ट्रॉली बैग लिया है जबकि ज्यादातर ट्रेनों में अभी बॉक्स को बॉक्स पोर्टर पहुंचा रहे हैं। वहां कार्यरत एक बॉक्स पोर्टर ने बताया कि गार्ड को तो अभी लाइन बॉक्स ही दिया जा रहा है, लेकिन लोको पायलट को ट्रॉली बैग देने का आदेश है। हालांकि लखनऊ मंडल में लोको पायलट ने ट्रॉली बैग लेने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि महाप्रबंधक ने खुद आश्वस्त किया है कि ट्रॉली बैग उन्हें नहीं दिया जाएगा। ऐसे में अधिकारी उनके भी आदेश का उल्लंघन कर रहे हैं। किसी भी कीमत पर हम ट्रॉली बैग नहीं ले जाएंगे। सभी लोको पायलट झंडी, ट्राई कलर टॉर्च व पटाखा के लिए डेटोनेटर साथ लेकर जा रहे हैं। किसी ने ट्रॉली बैग रिसीव नहीं किया है।
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उत्तर रेलवे के लोको पायलट को निर्देश
उत्तर रेलवे से ट्रेन या मालगाड़ी लेकर आने वाले लोको पायलट से भी कहा गया है कि वे अपने यहां से लाइन बॉक्स लेकर न आएं। ट्रॉली बैग में ही संरक्षा उपकरण रखें। दरअसल, लाइन बॉक्स को उतारने व चढ़ाने के लिए बॉक्स पोर्टर की जरूरत पड़ती है। इस समय गोरखपुर में लोको पायलट के लिए लाइन बॉक्स व्यवस्था बंद होने से स्टाफ की दिक्कत हो गई है।
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रनिंग स्टॉफ इसलिए कर रहे विरोध
ट्राली बैग में संरक्षा उपकरण होने से वजन 15 किलो से ज्यादा होगा। जबकि इस बैग को लोको पायलट और गार्ड को ही ढोना पड़ेगा। वहीं, लाइन बॉक्स को संविदा पर रखे कर्मचारी ढोते हैं। कभी-कभी मालगाड़ी प्लेटफार्म पर नहीं खड़ी होती है, ऐसे में रेल लाइन तक ट्रॉलीबैग को लोको पायलट को ही ले जाना पड़ेगा। गार्ड और ड्राइवर ड्यूटी के बाद गाड़ी के लिए दूसरे स्टेशन पर रुकते हैं, ऐसे में ट्रॉलीबैग की सुरक्षा भी उन्हें ही करनी पड़ेगी।
क्षेत्रीय महामंत्री ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टॉफ एसोसिएशन विनय शर्मा ने बताया कि महाप्रबंधक के आश्वासन के बाद भी लाइन बॉक्स में संरक्षा उपकरण की लोडिंग नहीं हो रही है। साथ ही आदेश भी निरस्त नहीं किया गया है। इस समय कोई भी लोको पायलट ट्रॉली बैग नहीं ले रहा है। संरक्षा के उपकरण दो लाल व एक झंडी, ट्राई कलर टॉर्च, डेटोनेटर आदि हम साथ ले जा रहे हैं। अगर लाइन बॉक्स में संरक्षा उपकरण रखकर नहीं दिए गए तो आगे भी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।