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‘हम शहीद की बहनें हैं’
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‘हम शहीद की बहनें हैं’
प्रदीप अग्रहरि
फरेंदा। शहीद पंकज त्रिपाठी की दोनो बहनें रविवार को हरपुर बेलहिया पहुंचीं। सबसे पहले रास्ते में ही पार्क में स्थापित शहीद भाई की प्रतिमा पर नमन कर घर पहुंचीं तो पिता ओम प्रकाश त्रिपाठी को प्रणाम कर फफक पड़ी। पिता भी उस वक्त भावुक होकर बेटियों को समझाने लगे। यह तस्वीर देख हर कोई बहन की पीड़ा समझ गया। शहीद की बहनों ने अपने आप को संभाला और गर्व के साथ सिर ऊंचा कर बोलीं हम शहीद की बहनें हैं।
बड़ी बहन महिमा ने कहा कि भाई पंकज हम सबके दुलारे थे। उनकी कमी तो आजीवन खलती रहेगी। वह जब भी घर आते थे तो उनसे बातें करते करते वक्त कब गुजर जाता था, पता ही नहीं चलता था। वह किसी भी बात को बेहद सहज भाव से बताते थे। उनकी वाणी में कोई बनावटीपन नहीं रहता था। छोटी बहन ममता भी आंसू पोंछते हुए बोली कि भैया की शहादत पर हम सभी को गर्व है। बहादुर जवान की बहन हूं। भैया की प्रेरणादायी सीख आज भी काम आती है। यह कहते हुए वह अपने छोटे भाई शुभम त्रिपाठी को देखकर बोली मेरा यह भी भाई बहादुर सिपाही है। इसे भी मौका मिलेगा तो वह भी देश की सेवा करने के लिए सीमा पर पहुंचेगा। संवाद
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दोस्त को श्रद्धांजलि देने पहुंचा जवान
महराजगंज। शहीद पंकज त्रिपाठी के दोस्त उपेंद्र सिंह कुशीनगर जिले के कोहड़ौली गांव के रहने वाले हैं। यह इन दिनो श्रीनगर में सीआरपीएफ में चालक के पद पर कार्यरत हैं। वर्तमान में छुट्टी लेकर घर आए थे।
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रविवार को शहीद मित्र श्रद्धांजलि देने वे हरपुर बेलहियां पहुंचे। जैसे ही वे शहीद पंकज की प्रतिमा के पास पहुंचे भाई शुभम को पकड़ कर फफक पड़े। शुभम को सांत्वना देते हुए कहा कि मेरे छोटे भाई हो, जब भी जरूरत पडे़ तो मैं भी तुम्हारे बडे़ भाई की तरह ही सेवा करूंगा। यह कहते हुए वह अपने सीने से शुभम को चिपका लिया।
कुशीनगर जिले के कोहड़ौली गांव के रहने वाले सीआरपीएफ जवान उपेंद्र सिंह ने बताया कि शहीद पंकज उनके गहरे दोस्त थे। ड्यूटी के दौरान वह अक्सर अपने छोटे भाई को कामयाब बनाने की बात करते थे। उन्होंने बताया कि पंकज हमेशा कहते थे कि मां बाप ने बड़े ही परिश्रम से पढ़ाया लिखाया है। उनके सपनो को पूरा करना है। अच्छा सा घर बनवाना है। साथ ही भाई को अधिकारी बनाना है। वह हर छोटी बड़ी बात को शेयर करते थे। वह काफी मिलनसार थे। उनके मन में किसी के लिए कोई दुर्भावना नहीं रहती थी। मुझे भी फक्र है कि मैं शहीद का दोस्त हूं। उनकी बहादुरी हमें नाज है। संवाद
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हमेशा खलती रहेगी पंकज की कमी
शहीद पंकज के पिता ओम प्रकाश त्रिपाठी बोले, बेटे की कमी तो हमेशा खलती रहेगी। शहीद सैनिक का पिता हूं। बेटे की शहादत पर हम सभी को गर्व है। मेरे लिए तो हर चीज मिट्टी के समान है। मेरा बेटा ही मेरे लिए हीरा था।
भैया के सपने को साकार करूंगा
शहीद पंकज के छोटे भाई शुभम त्रिपाठी ने कहा, भैया के सपने को साकार करूंगा। मन लगाकर पढ़ाई कर रहा हूं। भैया की शहादत के बाद लगा की अब आगे नहीं बढ़ पाऊंगा लेकिन धैर्य के साथ काम ले रहा हूं। निश्चित रूप से कामयाबी हासिल करूंगा।
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प्रदीप अग्रहरि
फरेंदा। शहीद पंकज त्रिपाठी की दोनो बहनें रविवार को हरपुर बेलहिया पहुंचीं। सबसे पहले रास्ते में ही पार्क में स्थापित शहीद भाई की प्रतिमा पर नमन कर घर पहुंचीं तो पिता ओम प्रकाश त्रिपाठी को प्रणाम कर फफक पड़ी। पिता भी उस वक्त भावुक होकर बेटियों को समझाने लगे। यह तस्वीर देख हर कोई बहन की पीड़ा समझ गया। शहीद की बहनों ने अपने आप को संभाला और गर्व के साथ सिर ऊंचा कर बोलीं हम शहीद की बहनें हैं।
बड़ी बहन महिमा ने कहा कि भाई पंकज हम सबके दुलारे थे। उनकी कमी तो आजीवन खलती रहेगी। वह जब भी घर आते थे तो उनसे बातें करते करते वक्त कब गुजर जाता था, पता ही नहीं चलता था। वह किसी भी बात को बेहद सहज भाव से बताते थे। उनकी वाणी में कोई बनावटीपन नहीं रहता था। छोटी बहन ममता भी आंसू पोंछते हुए बोली कि भैया की शहादत पर हम सभी को गर्व है। बहादुर जवान की बहन हूं। भैया की प्रेरणादायी सीख आज भी काम आती है। यह कहते हुए वह अपने छोटे भाई शुभम त्रिपाठी को देखकर बोली मेरा यह भी भाई बहादुर सिपाही है। इसे भी मौका मिलेगा तो वह भी देश की सेवा करने के लिए सीमा पर पहुंचेगा। संवाद
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दोस्त को श्रद्धांजलि देने पहुंचा जवान
महराजगंज। शहीद पंकज त्रिपाठी के दोस्त उपेंद्र सिंह कुशीनगर जिले के कोहड़ौली गांव के रहने वाले हैं। यह इन दिनो श्रीनगर में सीआरपीएफ में चालक के पद पर कार्यरत हैं। वर्तमान में छुट्टी लेकर घर आए थे।
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रविवार को शहीद मित्र श्रद्धांजलि देने वे हरपुर बेलहियां पहुंचे। जैसे ही वे शहीद पंकज की प्रतिमा के पास पहुंचे भाई शुभम को पकड़ कर फफक पड़े। शुभम को सांत्वना देते हुए कहा कि मेरे छोटे भाई हो, जब भी जरूरत पडे़ तो मैं भी तुम्हारे बडे़ भाई की तरह ही सेवा करूंगा। यह कहते हुए वह अपने सीने से शुभम को चिपका लिया।
कुशीनगर जिले के कोहड़ौली गांव के रहने वाले सीआरपीएफ जवान उपेंद्र सिंह ने बताया कि शहीद पंकज उनके गहरे दोस्त थे। ड्यूटी के दौरान वह अक्सर अपने छोटे भाई को कामयाब बनाने की बात करते थे। उन्होंने बताया कि पंकज हमेशा कहते थे कि मां बाप ने बड़े ही परिश्रम से पढ़ाया लिखाया है। उनके सपनो को पूरा करना है। अच्छा सा घर बनवाना है। साथ ही भाई को अधिकारी बनाना है। वह हर छोटी बड़ी बात को शेयर करते थे। वह काफी मिलनसार थे। उनके मन में किसी के लिए कोई दुर्भावना नहीं रहती थी। मुझे भी फक्र है कि मैं शहीद का दोस्त हूं। उनकी बहादुरी हमें नाज है। संवाद
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हमेशा खलती रहेगी पंकज की कमी
शहीद पंकज के पिता ओम प्रकाश त्रिपाठी बोले, बेटे की कमी तो हमेशा खलती रहेगी। शहीद सैनिक का पिता हूं। बेटे की शहादत पर हम सभी को गर्व है। मेरे लिए तो हर चीज मिट्टी के समान है। मेरा बेटा ही मेरे लिए हीरा था।
भैया के सपने को साकार करूंगा
शहीद पंकज के छोटे भाई शुभम त्रिपाठी ने कहा, भैया के सपने को साकार करूंगा। मन लगाकर पढ़ाई कर रहा हूं। भैया की शहादत के बाद लगा की अब आगे नहीं बढ़ पाऊंगा लेकिन धैर्य के साथ काम ले रहा हूं। निश्चित रूप से कामयाबी हासिल करूंगा।