फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Protect animals from heat stroke in summer

Gorakhpur News: गर्मी में पशुओं को हीट स्ट्रोक से बचाएं

Mon, 29 Apr 2024 04:44 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Apr 2024 04:44 AM IST
विज्ञापन
Protect animals from heat stroke in summer
-पशुपालक न करें लापरवाही, अन्यथा पशु हो जाएंगे बीमार, हो सकती है मौत
विज्ञापन

-पशुओं के रियुमन में भोज्य पदार्थों के खिसकने की गति कम हो जाती है
गोरखपुर। तीखी धूप व गर्मी से इंसान तो परेशान होते ही हैं, साथ में बेजुबान भी मुश्किल में आ जाते हैं। उन पर हीट स्ट्रोक का खतरा मंडराने लगता है। ऐसे में पशुओं की देखभाल में जरा सी भी लापरवाही हुई तो पशुओं को नुकसान पहुंच सकता है। लापरवाही से मवेशी संकट में आए तो पशुपालकों की भी दिक्कत बढ़ेगी। यदि शीघ्र उपचार नहीं मिला तो पशुओं की मौत तक हो सकती है। साथ ही साथ गर्मी से प्रभावित पशु का दुग्ध उत्पादन भी कम हो सकता है।
यह कहना है पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह का, वे कृषि विज्ञान केंद्र बेलीपार में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि यदि पशु के शरीर के तापमान में एक डिग्री सेंटीग्रेड की वृद्धि होती है, तो दुग्ध उत्पादन में 10-15 प्रतिशत की हानि होती है। पशुओं के शरीर में बाइकार्बोनेट आयनों की कमी और रक्त के पीएच में वृद्धि हो जाती है। पशुओं के रियुमन में भोज्य पदार्थों के खिसकने की गति कम हो जाती है, जिससे पाच्य पदार्थों के आगे बढ़ने की दर में कमी हो जाती है और रियुमन की फर्मेंटेशन क्रिया में बदलाव आ जाता है।
विज्ञापन

उनके शुष्क पदार्थ ग्रहण करने की क्षमता 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है, जिसके कारण दुग्ध उत्पादन में कमी आ जाती है। अत्यधिक गर्मी एवं लू के कारण पशुओं को हीट स्ट्रोक की समस्या हो जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

--------
हीट स्ट्रोक के लक्षण
-सुबह के समय मवेशी के शरीर का सामान्य तापमान 100 से 102 डिग्री तथा दोपहर से शाम तक 104 से 106 डिग्री फारेनहाइट तक हो जाता है, तो हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखने लगते हैं।
-गर्मी में पशुओं का स्वशन गति बढ़ जाता है, तथा पशु हांफने लगता है। साथ ही उसके मुंह से लार भी गिरने लगती है। शरीर का तापमान बढ़ने के कारण मवेशी खाना पीना छोड़ देते हैं। दुधारु पशु दूध कम कर देते हैं। पशुओं में पानी की आवश्यकता बढ़ जाती है। शरीर में पानी की कमी होने से गोबर रुक जाता है।
--------
गर्मी से बचाव हेतु आहार प्रबंधन
-गर्मी से बचाव के लिए पशुओं को हरा चारा देना चाहिए। अगर हरा चारा उपलब्ध न हो तो पेड़ की पत्ती जैसे आम की पत्ती, बबूल की पत्ती, जामुन के पत्ते इत्यादि देने चाहिए।
-चूंकि गर्मी में पशु आहार खाना कम कर देते हैं, इसलिए संतुलित राशन के साथ-साथ 50 ग्राम खनिज मिश्रण नमक के साथ देना चाहिए, जिससे पशुओं की उत्पादन क्षमता बनी रहे।
-गर्मी में पैदा की गई ज्वार, बाजरा या चरी जहरीला हो सकता है। जो पशुओं के लिए हानिकारक होता है। अत: इस मौसम में यदि बारिश नहीं हुई है तो ज्वार खिलाने के पहले खेत में 2-3 बार पानी लगाने के बाद ही खिलाना चाहिए।

-------
गर्मी से बचाव संबंधित सावधानियां
पशुओं को छायादार स्थान पर रखें। धूप में चरने के लिए न छोड़ें। गर्मी में पशुओं को प्रात: काल 9:00 बजे से पहले एवं शाम 5:00 बजे के बाद चराना चाहिए। क्योंकि इस समय तापमान कम रहता है। धूप से लाने के बाद कुछ देर छाया में बांधें तब पानी पिलाएं। सुबह और शाम को सूर्यास्त के बाद नहलाने का प्रयास करें। पशुशाला के ऊपर पुआल डालें, ताकि वह गर्म न हो।हमेशा पशुओं को बांधने के लिए छायादार और हवादार स्थान का ही चयन करें। पशु को पीने के लिए ठंडा साफ पानी हर समय उपलब्ध होना चाहिए। भैंसों को गर्मी में 3-4 बार और गायों को कम से कम दो बार नहलाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed