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Gorakhpur News: फर्जी स्टांप सिंडिकेट पर बड़ी कार्रवाई, 2.25 करोड़ की संपत्ति जब्त
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गोरखपुर। कैंट पुलिस ने करोड़ों रुपये के राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले अंतरराज्यीय फर्जी स्टांप सिंडिकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत 2.25 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।
एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि जब्त संपत्तियों में कोतवाली क्षेत्र के दीवान बाजार निवासी रामलखन जायसवाल की लगभग 1.50 करोड़ रुपये मूल्य की तीन मंजिला इमारत और जगन्नाथपुर निवासी रविदत्त मिश्रा का 75 लाख रुपये का मकान शामिल है। इस गिरोह का सरगना बिहार के सिवान जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र स्थित नई बस्ती निवासी नवाब आरजू उर्फ लालू है जो कूटरचित भारतीय स्टांप पेपर, डाक टिकट और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार कर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सप्लाई करता था।
एसपी सिटी ने बताया कि जांच में सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क बिहार, गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर तक फैला हुआ था। मामले का खुलासा एक स्टांप रिफंड आवेदन की जांच के दौरान हुआ, जिसमें नासिक स्थित भारत प्रतिभूति मुद्रणालय से प्राप्त रिपोर्ट में 10 स्टांप फर्जी पाए गए। इसके बाद कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच के दौरान कई आरोपियों की भूमिका सामने आई, जिसमें रवि मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पूरे गिरोह का पर्दाफाश हुआ।
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उन्होंने बताया कि बाद में एटीएस ने भी कार्रवाई करते हुए रेलवे स्टेशन के पास नवाब आरजू और उसके सहयोगी राजू यादव को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। 21 मार्च 2025 को प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह ने गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू कराई थी।
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एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि जब्त संपत्तियों में कोतवाली क्षेत्र के दीवान बाजार निवासी रामलखन जायसवाल की लगभग 1.50 करोड़ रुपये मूल्य की तीन मंजिला इमारत और जगन्नाथपुर निवासी रविदत्त मिश्रा का 75 लाख रुपये का मकान शामिल है। इस गिरोह का सरगना बिहार के सिवान जिले के मुफ्फसिल थाना क्षेत्र स्थित नई बस्ती निवासी नवाब आरजू उर्फ लालू है जो कूटरचित भारतीय स्टांप पेपर, डाक टिकट और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार कर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में सप्लाई करता था।
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एसपी सिटी ने बताया कि जांच में सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क बिहार, गोरखपुर, देवरिया और कुशीनगर तक फैला हुआ था। मामले का खुलासा एक स्टांप रिफंड आवेदन की जांच के दौरान हुआ, जिसमें नासिक स्थित भारत प्रतिभूति मुद्रणालय से प्राप्त रिपोर्ट में 10 स्टांप फर्जी पाए गए। इसके बाद कैंट थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। जांच के दौरान कई आरोपियों की भूमिका सामने आई, जिसमें रवि मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पूरे गिरोह का पर्दाफाश हुआ।
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उन्होंने बताया कि बाद में एटीएस ने भी कार्रवाई करते हुए रेलवे स्टेशन के पास नवाब आरजू और उसके सहयोगी राजू यादव को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने इस मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। 21 मार्च 2025 को प्रभारी निरीक्षक संजय सिंह ने गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू कराई थी।