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Gorakhpur News: नुकसानदायक है प्रोसेस फूड .... बचपन में ही दांत खो दे रहे बच्चे

Sat, 24 Aug 2024 05:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Sat, 24 Aug 2024 05:31 AM IST
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Process food is harmful...children are losing teeth in childhood.
एम्स के दंत रोग विभाग में दांतों में कीड़े लगने की समस्या लेकर पहुंच रहे 30 प्रतिशत बच्चे
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भविष्य में दांतों को न हो नुकसान, फिलिंग कर बचाए जा रहे दांत

संवाद न्यूज एजेंसी



गोरखपुर। प्रोसेस फूड दांतों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बड़ों के साथ बच्चों के दांतों के लिए भी यह नुकसानदायक हैं। इसके सूक्ष्म कण दांत में चिपक जाते हैं। कुछ समय बाद दांतों में कीड़े लगने शुरू हो जाते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे दांत खराब हो जाते हैं। एम्स के दंत रोग विभाग की ओपीडी में 30 प्रतिशत ऐसे बच्चे आते हैं, जिनके दांतों में कीड़े लगने की शिकायत रहती है। इन बच्चों की उम्र तीन से छह साल के बीच रहती है।

डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे प्राय: चाकलेट, टाॅफी, जैली, चिप्स, पिज्जा, बर्गर व अन्य प्रोसेस फूड का सेवन करते हैं। इसके सूक्ष्म कण दांतों में चिपक जाते हैं, जो कभी-कभी ब्रश करने के बाद भी दांतों से अलग नहीं हाेते हैं। इन कणों के चिपके रहने के कारण दांत की सतह कमजोर पड़ने लगती है। इसके बाद दांतों में कीड़े लगने शुरू हो जाते हैं। दांतों में पड़ने वाले काले धब्बे समय के साथ फैल जाते हैं। एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. दिपांशु कुमार बताते हैं कि कीड़े लगने का कारण दांतों की सही से सफाई नहीं करने के साथ प्रोसेस फूड भी है। दो समय खाना खाने के बीच में मीठा खाना भी दांतों को नुकसान पहुंचाता है। खाने के दौरान लार के साथ निकलने वाला कैल्शियम खाने के पीएच को संतुलित करता है। खाने के बाद बीच में कुछ न कुछ खाते रहने से यह संतुलन नहीं हो पाता है। जिसके कारण दांतों की दिक्कत शुरू हो जाती है। दांतों में शुरू में दर्द होता है, इसके बाद मसूड़ों में सूजन के साथ और भी समस्या बढ़ जाती है। बाद में दांतों को भरवाना पड़ता है। समस्या और ज्यादा बढ़ने पर दांत को निकलवाना भी पड़ता है।
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क्यों जरूरी है बच्चों के दांतों की फिलिंग



छोटे बच्चों के दूध के दांत टूटने के बाद अन्य दांत उम्र के अनुसार निकलते जाते हैं। दूध के दांत में कीड़े लगने के बाद वह धीरे-धीरे खराब हो जाते हैं। खराब दांतों की जगह को खाली छोड़ने पर पास के दांत वहां टेढ़े-मेढ़े होकर निकलने लगते हैं। जिसके बाद उस स्थान का दांत विकृत रूप में दिखता है। इसलिए दांतों की फिलिंग आवश्यक है।
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केस एक: सात वर्षीय लड़के के आगे के दांत पूरी तरह से सड़ जाने के कारण उसके माता-पिता परेशान थे। डॉक्टर को दिखाने पर पता चला चिप्स और चॉकलेट ज्यादा खाने के कारण उसके दांतों पर खाद्य पदार्थ की परत जम गई थी। जिसके कारण दांत में कीड़े लग गए थे। लड़के के सड़े दांतों का इलाज चल रहा है।




केस दो: एक दो वर्षीय बच्चे के दांत कीड़े लगने के कारण खराब हो गए थे। एम्स में बच्चे को लाने के बाद उसके दांतों की फिलिंग करने के बाद नसों का इलाज चल रहा है।

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दांतों की सुरक्षा के उपाय

- दांतों की नियमित सफाई करते रहें

- तीन से छह महीने के अंतराल में ब्रश बदल दें
- प्रत्येक छह माह में डॉक्टर से एक बार दांतों को दिखा लें

- दांतों के दर्द को हल्के में बिल्कुल न लें
- दांतों में सफेद परत दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
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