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संकट: पूर्वांचल की बेटियों और गर्भवतियों में मिल रही कुपोषण की दिक्कत, आईएमए महिला विंग की जांच में हुआ खुलासा
Tue, 16 Nov 2021 12:55 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 16 Nov 2021 12:55 PM IST
सार
आईएमए महिला विंग की जांच में हुआ खुलासा, 22 फीसदी से अधिक गर्भवतियां हैं कुपोषित, छात्राओं में 3 से लेकर 8 मिली ग्राम तक हीमोग्लोबिन पाया गया।
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बाएं डॉ दीप्ति चतुर्वेदी और दाएं डॉ बबिता शुक्ला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
पूर्वांचल में बेटियां और गर्भवतियां, दोनों कुपोषित मिल रही हैं। 22 फीसदी से अधिक गर्भवती महिलाएं कुपोषण का शिकार हैं। इनमें शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक की गर्भवतियां शुमार हैं। इतना ही नहीं शहर में छात्राओं में भी कुपोषण की समस्या मिल रही है जो उनके भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की महिला विंग की जांच में यह खुलासा हुआ है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों के पास हर दिन इस तरह के मामले पहुंच रहे हैं। इस पर डॉक्टरों ने चिंता जाहिर की है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर सही समय पर इन्हें खानपान नहीं मिला तो यह उनके भविष्य के लिए ज्यादा खतरनाक साबित होगा।
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आईएमए महिला विंग की अध्यक्ष व स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दीप्ति चतुर्वेदी ने बताया कि पूर्वांचल में महिलाओं की स्थिति काफी खराब है। गर्भवतियां ज्यादा कुपोषण का शिकार हो रही हैं। हर दिन 10 में से तीन से चार गर्भवतियां इलाज के लिए आती हैं जो कुपोषण से पीड़ित हैं। इनमें खून की कमी से लेकर, वजन, लंबाई और शारीरिक विकास भी कम देखने को मिल रहा है। इसमें शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं शामिल हैं। इतना ही नहीं शहर की बेटियां भी कुपोषित मिल रही हैं।
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शहर के आर्य कन्या इंटर कॉलेज की 209 बेटियों की हीमोग्लोबिन की जांच की गई। सभी छात्राओं में खून की कमी देखने को मिली है। कई बेटियों में तो तीन से लेकर चार मिलीग्राम तक खून का स्तर मिला है। इसके अलावा उनका शारीरिक विकास भी कम हुआ है। उनके वजन भी कम मिले हैं। यह बेहद चिंता की बात है। अगर सही समय पर इन्हें इलाज नहीं मिला तो आने वाले दिनों में इन्हें तमाम शारीरिक परेशानियों से गुजरना पड़ेगा।
छात्राओं को भविष्य में होगी दिक्कत
डॉ. दीप्ति चतुर्वेदी ने बताया कि जिन छात्राओं में खून की कमी है। वह सभी शहर की रहने वाली हैं। यह ज्यादा चिंता की बात है। उनका शारीरिक विकास भी बेहद कम हो रहा है। ऐसे स्थिति में उन्हें भविष्य में तमाम कठिनाइयों से गुजरना पड़ सकता है। शादी के बाद मां बनने में काफी परेशानी होगी। अगर सही समय पर इलाज या बेहतर खानपान नहीं मिला तो उन्हें लगातार दिक्कतें रहेंगी। मासिक चक्र से लेकर अन्य शारीरिक परेशानियां भी झेलनी पड़ेंगी।
इंट्रा यूट्राइन ग्रोथ रिटाडिएशन का खतरा
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. बबिता शुक्ला ने बताया कि गर्भावस्था के पहले से ही पर्याप्त पोषण आहार मिलना सबसे जरूरी है। इससे बच्चे का विकास नहीं रुकता। लेकिन अगर सही खानपान नहीं मिलता है तो बच्चों में जन्मजात विकृति जैसे कटे होंठ-तालू, रीढ़ की हड्डी की दिक्कत जैसी बीमारियां होती हैं। कुपोषण की शिकार महिलाओं में इंट्रा-यूट्राइन ग्रोथ रिटाडिएशन देखने को मिलता है। इसमें बच्चे का गर्भ में पर्याप्त विकास नहीं होता है। इतना ही नहीं कई केस में तो बच्चे की जान भी चली जाती है।
इन जिलों की महिलाएं आती हैं इलाज कराने
गोरखपुर की बात करें तो यहां गोरखपुर और बस्ती मंडल समेत बिहार और नेपाल से महिलाएं इलाज के लिए आती हैं। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, महराजगंज, नेपाल, बिहार के गोपालगंज, सिवान, छपरा, बेतिया, मऊ जैसे जिले शामिल हैं।
इंट्रा यूट्राइन ग्रोथ रिटाडिएशन का खतरा
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. बबिता शुक्ला ने बताया कि गर्भावस्था के पहले से ही पर्याप्त पोषण आहार मिलना सबसे जरूरी है। इससे बच्चे का विकास नहीं रुकता। लेकिन अगर सही खानपान नहीं मिलता है तो बच्चों में जन्मजात विकृति जैसे कटे होंठ-तालू, रीढ़ की हड्डी की दिक्कत जैसी बीमारियां होती हैं। कुपोषण की शिकार महिलाओं में इंट्रा-यूट्राइन ग्रोथ रिटाडिएशन देखने को मिलता है। इसमें बच्चे का गर्भ में पर्याप्त विकास नहीं होता है। इतना ही नहीं कई केस में तो बच्चे की जान भी चली जाती है।
इन जिलों की महिलाएं आती हैं इलाज कराने
गोरखपुर की बात करें तो यहां गोरखपुर और बस्ती मंडल समेत बिहार और नेपाल से महिलाएं इलाज के लिए आती हैं। गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, महराजगंज, नेपाल, बिहार के गोपालगंज, सिवान, छपरा, बेतिया, मऊ जैसे जिले शामिल हैं।