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प्रिया हत्याकांड: ''''पति-पत्नी और वो'''' की इस कहानी में भरोसे का कत्ल भी
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हत्यारोपी विजय पुलिस की गिरफ्त में। स्रोत सोशल मीडिया
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पुलिस ने किया पर्दाफाश, दंपती समेत तीन आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल
आरोपियों ने बचने की खूब कोशिश की, लेकिन सीसीटीवी ने पकड़ लिया शातिरपन
भरोसा देकर लाई गई थी प्रिया, मंदिर में साथ जीने-मरने की कसमें तक खाईं फिर दे दिया दगा
वर्ष 2012 में हुई थी प्रिया से विजय की पहली मुलाकात, फिर प्यार, लिव-इन और मंदिर की शादी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पीपीगंज क्षेत्र में प्रिया हत्याकांड ''''पति-पत्नी और वो'''' के साथ ही भरोसे के कत्ल की भी कहानी है। सहजनवां के विजय के प्यार में पागल प्रिया उसके साथ की चाह में मुंबई से भागी चली आई। यहां विजय ने मंदिर में साथ जीने-मरने की कसमें खाईं। यहीं से शुरू हुआ विजय का शातिरपना। प्रिया उसकी साजिशें समझ नहीं पाई जिसकी कीमत उसे जान देकर चुकानी पड़ी। हालांकि विजय और अन्य आरोपियों ने बचने की बहुत कोशिशें कीं, लेकिन सीसीटीवी फुटेज ने उनकी कलई खोल दी।
एसपी साउथ दिनेश पुरी ने सोमवार को इस वारदात का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने मामले में विजय साहनी, उसकी पत्नी संध्या और साजिश रचने के आरोप में विजय के ससुर रामबिलास साहनी को गिरफ्तार कर सोमवार को कोर्ट मेंं पेश किया। वहां से तीनों को जेल भेज दिया गया। पूछताछ में विजय ने स्वीकार किया कि वह प्रिया के दबाव से डर चुका था। पत्नी के साथ मिलकर उसने सुनियोजित तरीके से हत्या की।
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एसपी साउथ ने बताया कि पुलिस की गिरफ्त में आया आरोपी विजय कुमार साहनी मूल रूप से सहजनवां थाना क्षेत्र के माडर गांव पोस्ट पाली का रहने वाला है। वह लंबे समय से महाराष्ट्र के मुंबई स्थित चारकोप, कांदिवली में रह रहा था। विजय ने हाईस्कूल और कॉमर्स से ग्रेजुएशन मुंबई से ही अपने बड़े भाई के पास रहकर की। वर्ष 2012 में उसे एक प्राइवेट बैंक में एजेंट की नौकरी मिली।
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काम के सिलसिले में विजय ने विज्ञापन के जरिये अपना मोबाइल नंबर सार्वजनिक किया। इसी नंबर के माध्यम से प्रिया शेट्टी उसके संपर्क में आई। प्रिया एक निजी कंपनी में कार्यरत थी और क्लाइंट उपलब्ध कराने के बदले विजय से कमीशन लेती थी। यहीं से दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और पेशेवर रिश्ता निजी संबंध में बदल गया। धीरे-धीरे विजय और प्रिया का मेलजोल बढ़ता गया।
प्रिया ने नौकरी बदली तो विजय ने उसे किराए पर एक मकान दिलाया। इसके बाद दोनों ने मंदिर में शादी कर ली और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। वर्ष 2013 में प्रिया के गर्भवती होने के बाद रिश्तों में बदलाव आने लगा। विजय दूरी बनाने लगा। हालात बिगड़ने पर प्रिया कांदिवली थाने पहुंची, लेकिन बाद में दोनों में सुलह हो गई। बच्चे के जन्म के समय विजय ने अस्पताल के दस्तावेजों में पिता के रूप में हस्ताक्षर भी किए। इसी बीच विजय ने दो बार नौकरी बदली, इसके बाद दोनों में फिर से दूरियां बढ़ने लगीं।
दूसरी शादी के बाद विजय ने रचा तलाक का खेल, बनाई दूरियां
एसपी साउथ दिनेश पुरी ने बताया कि वर्ष 2014 में विजय और प्रिया के बीच फिर विवाद शुरू हो गया। इसी बीच विजय के पिता रामकेश साहनी ने उसकी शादी पीपीगंज के तिघरा टोला सपहिया निवासी, रिटायर्ड रेलवे कर्मी रामबिलास की बेटी संध्या से तय कर दी। इधर, प्रिया विजय पर उसे अपने घर ले जाने का दबाव बना रही थी। शादी के बाद विजय ने प्रिया से दूरी बना ली और कोर्ट में तलाक का केस फाइल कर दिया। कोर्ट से भेजा गया समन प्रिया ने रिसीव नहीं किया। करीब तीन साल तक इंतजार के बाद वर्ष 2015 में विजय के परिजनों ने संध्या से उसकी शादी कर दी। विजय ने अपने फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद कर दिए ताकि पुराना रिश्ता सामने न आ सके। वर्ष 2019 में विजय गांव आया और वर्ष 2022 में पत्नी संध्या व तीन बच्चों के साथ दोबारा मुंबई चला गया। इसी दौरान इंस्टाग्राम के जरिये विजय और प्रिया की फिर से बातचीत शुरू हो गई। दोनों दोबारा संपर्क में आ गए।
विजय ने मुंबई में पत्नी से कराई प्रिया की मुलाकात, फिर बढ़ता गया तनाव
पुलिस के अनुसार, प्रिया शराब की लती थी। मुंबई से विजय के लौटने के बाद वह लोगों के घर खाना बनाकर अपने 13 वर्षीय बेटे का पालन-पोषण कर रही थी। दोबारा संपर्क में आने के बाद विजय उसे खर्च देने लगा। मोबाइल के जरिये यह जानकारी पत्नी संध्या तक पहुंची, जिससे पति-पत्नी के बीच कई बार विवाद हुआ। विजय ने दोनों की मुलाकात भी कराई, लेकिन हालात और बिगड़ते चले गए। विजय अक्सर दो से तीन महीने तक गायब हो जाता था। इसे लेकर संध्या ने स्थानीय थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। पुलिस ने तीन बार विजय को प्रिया के घर से पकड़ा था। हर बार प्रिया ठिकाना बदल लेती थी जिससे पुलिस को भी जांच में कठिनाई हो रही थी।
बच्चों के भविष्य को लेकर शुरू हुआ टकराव
पुलिस के मुताबिक, संध्या ने अपने बच्चों का दाखिला महंगे निजी स्कूल में कराया था, जबकि प्रिया का बेटा सरकारी स्कूल में पढ़ता था। बच्चों के हक और भविष्य को लेकर प्रिया और संध्या के बीच विवाद गहराता चला गया। वर्ष 2025 में संध्या ने इसकी जानकारी अपने पिता रामबिलास को दी। इसके बाद रामबिलास ने प्रिया को घर लाने की बात कही। वारदात के चार दिन पहले विजय, संध्या और प्रिया ट्रेन से शहर पहुंचे। पहला दिन प्लेटफॉर्म नंबर एक पर बिताया। अगले दिन तीनों बुढ़िया माई स्थान गए, जहां विजय और प्रिया ने साथ रहने की कसमें खाईं। इसके बाद गोरखनाथ मंदिर में दर्शन किए। मंदिर दर्शन के बाद तीनों एक होटल के कमरे में रुके, जहां विजय और प्रिया ने जमकर शराब पी। करीब डेढ़ दिन रुकने के बाद नशे की हालत में तीनों 200 रुपये में ऑटो बुक कर पीपीगंज के लिए निकल पड़े।
सीसीटीवी में कैद हुआ तीनों का आखिरी मूवमेंट
पीपीगंज पहुंचने पर रुपये को लेकर ऑटो चालक से विवाद हुआ, जिसे वहां मौजूद एक परिचित व्यक्ति ने सुलझाया। यही व्यक्ति बाद में हत्याकांड का अहम सुराग बना। इसके बाद विजय ने ससुर से स्कूटी मंगवाई। स्टेशन रोड पर प्रिया एक दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। रात करीब 10 बजे तीनों स्कूटी से सहजनवां की ओर रवाना हुए। रास्ते में कई बार रुककर शराब पी गई। नशे की हालत में प्रिया बार-बार हंगामा कर रही थी। पुल के पास झोपड़ी में रहने वाली बुजुर्ग महिला के जागने और चिल्लाने के बाद तीनों शांत हुए। पुलिस के अनुसार, प्रिया को उग्र हालत में देख विजय और संध्या ने उसे घर न ले जाने का फैसला किया और हत्या की साजिश रची। सुनसान स्थान पर नशे की हालत में अचेत प्रिया की गला दबाकर हत्या कर दी गई। पहचान मिटाने के लिए ईंट से चेहरे और सिर पर वार किए गए। उसके कपड़े उतारकर स्कूटी में रख दिए गए।