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Gorakhpur Lockdown: यहां कोरोना के डर से परिवारवालों ने बनाई अपनों से दूरी, चाय पीने के लिए भी नहीं हैं पैसे
Fri, 27 Mar 2020 02:34 PM IST
vivek shukla
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 27 Mar 2020 02:34 PM IST
सार
- बंदियों के पास पैसे न होने से नहीं खरीद पा रहे कैंटीन से खरीददारी
- केवल 148 बंदी ही कर पा रहे जेल के पीसीओ से बात
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गोरखपुर जेल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना को लेकर हुए लॉकडाउन के कारण मुलाकात बंद होने से अधिकांश बंदी परेशान हैं। वे अपने घरवालों का हालचाल नहीं ले पा रहे हैं। उनके पास पैसे भी समाप्त हो गए हैं, लिहाजा वे कैंटीन से चाय, नमकीन, बिस्किट जैसे सामान भी नहीं ले पा रहे हैं। जेल प्रशासन अभी तक इसके लिए व्यवस्था नहीं कर पाया है।
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सूत्रों के अनुसार एक वर्ष पहले मंडलीय कारागार में बंदियों का उनके घरवालों से बात कराने के लिए जेल में पीसीओ लगवाया गया था। उस समय 148 बंदियों को रजिस्ट्रेशन कराकर उनकी बात कराने की शुरूआत की गई थी। धीरे-धीरे यह व्यवस्था ढीली हो गई। अन्य बंदियों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया गया। लिहाजा पीसीओ की व्यवस्था चरमरा गई थी।
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अब इस समय मुलाकात बंद होने के बाद जेल प्रशासन ने एक बार फिर यह व्यवस्था शुरू की है। लेकिन अधिकांश बंदी घरवालों का हालचाल नहीं ले पा रहे हैं क्योंकि सिर्फ उन्हीं 148 रजिस्टर्ड बंदियों की ही बात घरवालों से हो पा रही है, जबकि वर्तमान समय में करीब 1700 से ज्यादा बंदी हैं।
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बताया जा रहा है कि अब जेल प्रशासन बंदियों को एक महीने के लिए कुछ रुपये का कूपन देने की तैयारी कर रही है, जिससे उन्हें कैंटीन से उधार सामान मिल सके। बाद में स्थित सामान्य होने पर बंदियों से रकम चुकता किया जाएगा।
वरिष्ठ जेल अधीक्षक, डॉ रामधनी ने कहा पीसीओ से पहले से रजिस्टर्ड बंदियों की बात कराई जा रही है। अन्य बंदियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। रुपये न होने से कैंटीन से सामान लेने की समस्या का भी कोई न कोई हल निकाला जाएगा।