UP Chunav 2022: नोटा का बटन दबाने जा रहे तो कर लें मंथन, आपका मत हो सकता है बेकार
किसी विधानसभा में नोटा के मतों का बहुमत होने के बाद भी अवैध ही माने जाएंगे। नोटा के बाद सबसे ज्यादा मत पाने वाले प्रत्याशी को विजयी घोषित किया जाएगा।
विस्तार
मतदान के दौरान उम्मीदवार पसंद नहीं आने पर, यदि नन ऑफ द एबव (नोटा) का बटन दबाने जा रहे हैं तो एक बार और मंथन कर लें। नोटा का विकल्प अपनाकर आप अपना विरोध तो दर्ज करा देंगे, मगर इससे प्रत्याशियों की जीत-हार पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। नोटा के मत अवैध ही माने जाएंगे और सबसे ज्यादा मत हासिल करने वाले प्रत्याशी को विजयी घोषित किया जाएगा। यानी नोटा का बटन दबाकर प्रत्याशियों को आईना दिखाया जा सकता है, लेकिन नतीजे नहीं बदले जा सकते हैं।
नोटा के बाद मत पाने वाले उम्मीदवार को मिलेगी जीत
स्पष्ट तौर पर ऐसे समझा जा सकता है कि यदि किसी विधानसभा क्षेत्र में सभी प्रत्याशियों को मिले वोटों से नोटा का मत अधिक पड़ता है तो भी वही उम्मीदवार विजयी घोषित किया जाएगा, जिसे नोटा के बाद सबसे ज्यादा मत मिले हों। ऐसे में उस विधानसभा के उम्मीदवार यह तो दर्शा सकते हैं कि वहां जितने भी उम्मीदवार, चुनावी मैदान में खड़े हैं, उनमें से कोई भी नोटा दबाने वाले मतदाताओं की उम्मीदों या पसंद पर खरा नहीं है। मगर, जीत-हार का फैसला वही मतदाता करेंगे, जिसने किसी उम्मीदवार को वोट दिया है।
वर्ष 2013 में शुरू हुआ नोटा का विकल्प, गुलाबी रंग का होता है बटन
नोटा का मतलब ‘इनमें से कोई नहीं’ है। संदेश है कि आपको चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार में से कोई भी पसंद नहीं है। ईवीएम में नोटा का बटन गुलाबी रंग का होता है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने दिसंबर 2013 के विधानसभा चुनावों से नोटा का विकल्प दिया था। वोटों की गिनती के समय नोटा पर डाले गए वोट भी गिने जाते हैं।
नोटा में कितने लोगों ने वोट किया, इसका भी आकलन किया जाता है। चुनाव के माध्यम से मतदाता का किसी भी उम्मीदवार के अपात्र, अविश्वसनीय और अयोग्य व नापसंद का संदेश होता है। बता दें कि भारत, ग्रीस, यूक्रेन, स्पेन, कोलंबिया और रूस समेत कई देशों में नोटा का विकल्प दिया गया है।
बैलेट पेपर के समय भी विरोध दर्ज कराने का था अधिकार
चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल से पहले जब बैलेट पेपर का उपयोग होता था, तब भी मतदाताओं के पास बैलेट पेपर को खाली छोड़कर अपना विरोध दर्ज कराने का अधिकार होता था। इसका मतलब यह था कि मतदाताओं को चुनाव लड़ने वाला कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि किसी मतदाता को यदि अपनी विधानसभा या लोकसभा क्षेत्र का कोई भी उम्मीदवार पसंद नहीं है तो वह नोटा का बटन दबाकर अपना विरोध दर्ज करा सकता है। नोटा के वोटों की गिनती होती है, मगर यह मत अवैध ही माने जाते हैं। यह विरोध दर्ज कराने का माध्यम है। नोटा छोड़कर जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलेगा, वही विजयी माना जाएगा।