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Bhaum pradosh vrat 2021: जानिए कब है भौम प्रदोष, किस विधि से पूजन करने पर महादेव होते हैं प्रसन्न
Mon, 21 Jun 2021 03:54 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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Published by: vivek shukla
Updated Mon, 21 Jun 2021 03:54 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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भगवान शिव के प्रति आस्था निवेदित करने का पर्व प्रदोष व्रत 22 जून को रखा जाएगा। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि मंगलवार को पड़ने के कारण इस प्रदोष को भौम प्रदोष कहा जाएगा। भौम प्रदोष को बहुत ही शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव के साथ ही महावीर हनुमान की भी कृपा भक्तों को प्राप्त होती है।
भौम प्रदोष व्रत का महत्व
पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र के अनुसार, इस व्रत को करने वाले भक्तों पर भगवान शिव और हनुमान की कृपा बनी रहती है। व्रती सभी कर्ज से मुक्त हो जाता है और आर्थिक रुप से उसे मजबूती मिलती है। संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत में फलाहार का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन प्रातः दूध का सेवन करने के बाद पूरे दिन निर्जला व्रत करना चाहिए और प्रदोष काल में पूजन के पश्चात फलाहार लेना चाहिए।
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भौम प्रदोष व्रत का महत्व
पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र के अनुसार, इस व्रत को करने वाले भक्तों पर भगवान शिव और हनुमान की कृपा बनी रहती है। व्रती सभी कर्ज से मुक्त हो जाता है और आर्थिक रुप से उसे मजबूती मिलती है। संतान प्राप्ति के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत में फलाहार का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन प्रातः दूध का सेवन करने के बाद पूरे दिन निर्जला व्रत करना चाहिए और प्रदोष काल में पूजन के पश्चात फलाहार लेना चाहिए।
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प्रदोष व्रत पूजन विधि
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करके भगवान का स्मरण करते हुए व्रत का संकल्प लें। फिर पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित करें और भगवान को फल अर्पित करें। शाम के समय स्नानादि करके साफ कपड़े पहनें। फिर मंदिर जाकर या घर में ही पूजन करें। भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक करें और चंदन लगाएं। धूप-दीप प्रज्वलित करें और शिवजी को धतूरा, भांग, बेलपत्र, मदार का फूल आदि अर्पित करें। फल और मिष्ठान से भगवान शिव के साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा भी करें। इसके बाद वहीं पर बैठकर शिव चालीसा या मंत्र जाप करें। इसके पश्चात हनुमान चालीसा का भी पाठ करें। पूजा के बाद शिवजी और हनुमान जी की आरती करें।
पूजन मुहूर्त
भौम प्रदोष काल 22 जून को शाम 07 बजकर 22 मिनट से रात्रि 09 बजकर 23 मिनट तक।
पूजन मुहूर्त
भौम प्रदोष काल 22 जून को शाम 07 बजकर 22 मिनट से रात्रि 09 बजकर 23 मिनट तक।