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गोरखपुर जेल के 'आलू' ने जीता प्रदर्शनी में प्रथम पुरस्कार, इसका वजन जानकर हो जाएंगे हैरान
Thu, 11 Feb 2021 01:13 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 11 Feb 2021 01:13 PM IST
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गोरखपुर जेल में उगाया गया 500 ग्राम का आलू।
- फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर जेल के फार्म हाउस में बंदी-कैदियों द्वारा उगाए गए आधा किलोग्राम के आलू को प्रथम पुरस्कार मिला है। राजभवन में बीते 6, 7 और 8 फरवरी को आयोजित प्रादेशिक फल, शाक-भाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी में सरकार की ओर से सराहना के साथ ही कैदी-बंदियों को पुरस्कृत भी किया गया है।
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इस उपलब्धि पर वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी ने कैदी-बंदियों की सराहना की है। जानकारी के मुताबिक, मंडलीय कारागार के 13 एकड़ के फार्म हाउस में बंदी तरह-तरह की सब्जियां उगा रहे हैं। गोरखपुर जेल से दूसरी जेलों में सब्जियों की आपूर्ति भी की जा रही है। जेल के फार्म हाउस में इस बार आठ एकड़ में आलू की बुवाई की गई है।
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जेल प्रशासन के मुताबिक, आलू की बुवाई के लिये शासन से 2350 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक मदद मिल रही है। हालांकि वर्तमान में लागत 5725 रुपये प्रति एकड़ आ रही है। जेल परिसर में आलू बुवाई का काम चालू है। पिछले सीजन में 549 क्विंटल आलू की पैदावार हुई थी। आलू की पैदावार इतनी होती है कि पूरे साल इसे खरीदना नहीं पड़ता। पिछले वर्ष देवरिया जेल को पचास क्विंटल आलू की आपूर्ति की गई थी।
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इन सब्जियों की होती है पैदावार
कैदियों-बंदियों ने इस समय बैंगन दो बिस्सा, गोभी एक एकड़, टमाटर एक बिस्सा, ढोकली पांच बिस्सा, मूली दस बिस्सा, पालक पांच बिस्सा, नेनुआ एक एकड़, भिंडी एक एकड़, सरसों का साग, चौराई इत्यादि की खेती कर रखी है।
प्रभारी जेल अधीक्षक प्रेमसागर शुक्ला ने कहा कि कैदी-बंदियों को स्वास्थ्यवर्धक और सुपाच्य भोजन के लिए जेल परिसर में ही सब्जियों की बुआई कराई जाती है। पूरे साल बाजार से सब्जी खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। अच्छे उत्पादन के लिए शासन से ट्रैक्टर एवं कृषि संबंधी आधुनिक मशीनों की मांग की गई है। राजभवन में आयोजित प्रदर्शनी में गोरखपुर जेल को पुरस्कार मिला है।