कोरोना का असर: पोस्ट कोविड मरीजों के दो साल बाद भी झड़ रहे बाल, जानिए डॉक्टर क्या दे रहे सलाह
डॉ. राजकुमार जायसवाल ने बताया कि ऑक्सीजन पर पूरी तरह से सपोर्ट रहने वाले कई मरीज गंजे हो गए। धीर-धीरे वह जब प्राकृतिक ऑक्सीजन की सपोर्ट पर आए तो भी उनके बाल उतने नहीं आए, जितने आने चाहिए थे। ऐसे मरीजों का फालोअप चल रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना की पहली, दूसरी और तीसरी लहर से ठीक होने के बाद पोस्ट कोविड मरीजाें में कई तरह की समस्याएं अभी भी देखने को मिल रही हैं। इनमें सबसे बड़ी समस्या बाल झड़ने की है। दूसरी और तीसरी लहर में यह मामले ज्यादा तेजी से बढ़े हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इसकी बड़ी वजह फेफड़ों में ऑक्सीजन की कमी और तनाव है। साइंस की भाषा में इस बीमारी को टेलोजन एफ्लूवियम कहते हैं। हालांकि, इन मरीजों का दो साल बाद भी फालोअप चल रहा है। धीरे-धीरे इन मरीजों के बाल आ रहे हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभाग की ओपीडी में हर दिन 150 से अधिक मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इनमें करीब 30 से 40 फीसदी मरीज पोस्ट कोविड के हैं। इन मरीजों में बाल झड़ने की शिकायत सबसे अधिक है। मरीजों का कहना है कि बालों में कंघी करने पर, नहाने पर, बालों में हाथ मारने पर बाल टूटकर हाथ में आ जा रहे हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार ने बताया कि पोस्ट कोविड मरीजों में यह समस्या आम हो गई है। इसका सबसे बड़ा कारण फेफड़े तक ऑक्सीजन का न पहुंचना और तनाव रहा है। ऑक्सीजन के न पहुंचने की वजह से रक्त का संचार कोशिकाओं में सही तरीके से नहीं हुआ और फेफड़ों में फाइब्रोसिस की समस्या हो गई। इसकी वजह से सिर में जाने वाली कोशिकाएं और टिश्यू में रक्त का संचार अच्छे से नहीं हुआ।
इसके कारण बाल झड़ने की समस्याएं शुरू हुई। उस पर लोगों ने तनाव भी लेना शुरू कर दिया। बताया कि जब तक ऑक्सीजन की सप्लाई फेफड़े में ठीक नहीं होगी तब तक रक्त की सप्लाई भी कोशिकाओं में अच्छी नहीं होगी। इसकी वजह से शरीर में कई तरह की दिक्कतें आनी शुरू होती है। जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके वर्मा ने बताया कि ऐसे मरीजों का लगातार फालोअप किया जा रहा है।
ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहने वाले हो गए गंजे
डॉ. राजकुमार जायसवाल ने बताया कि ऑक्सीजन पर पूरी तरह से सपोर्ट रहने वाले कई मरीज गंजे हो गए। धीर-धीरे वह जब प्राकृतिक ऑक्सीजन की सपोर्ट पर आए तो भी उनके बाल उतने नहीं आए, जितने आने चाहिए थे। ऐसे मरीजों का फालोअप चल रहा है। लेकिन, उनके बाल आने में ज्यादा समय लगेगा, लेकिन अगर उन्हें फिर कोई बीमारी हो गई तो बाल आना काफी मुश्किल है।
दो तरह के होते हैं बाल
डॉ. राजकुमार ने बताया कि सभी के बालों में दो फेज होते हैं। पहला ग्रोइंग फेज और दूसरा रेस्टिंग फेज। 70 से 80 प्रतिशत हमारे बाल ग्रोइंग के फेज होते हैं और बाकी रेस्टिंग फेज के होते हैं। ऐसे में जब शरीर को ऑक्सीजन बेहतर नहीं मिलता है तो सबसे पहले ग्राेइंग फेज के बाल झड़ने शुरू होते हैं। अगर यहीं पर स्थिति को नियंत्रण में कर ली जाए तो यह नुकसान रेस्टिंग फेज तक नहीं पहुंचता। क्योंकि, एक बार अगर रेस्टिंग फेज में बाल झड़ने शुरू हो गए तो उसे बचान पाना काफी कठिन हो जाता है। कोरोना के मरीजों में भी यही हुआ, जिनके बाल ग्राेइंग फेज के झड़े उनके आने शुरू हो गए हैं।