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पाकिस्तान-अफगानिस्तान से आ सकता है पोलियो वायरस: डॉ. विश्वकर्मा
Mon, 20 Jan 2020 11:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jan 2020 11:57 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर।
भारत में पोलियो का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को कोलकता में मिला था। बावजूद इसके पल्स पोलियो अभियान लगातार चलाकर पूर्ण प्रतिरक्षण कराया जा रहा है। इसकी वजह पाकिस्तान और अफगानिस्तान है। इन देशों में अब भी पोलियो के वायरस मौजूद हैं। ऐसे में बच्चों को दो बूंद पिलाकर रोग से प्रतिरक्षण करना जरूरी है। ये बातें एसीएमओ और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. आईवी विश्वकर्मा ने रविवार को पल्स पोलियो अभियान का आरंभ करते हुए कहीं।
उन्होेंने कहा कि जब तक पड़ोसी देशों मेें पोलियो का पूरी तरह उन्मूलन नहीं हो जाता तब तक इस अभियान में सभी को गंभीरता से शामिल होना होगा। रविवार को शुरू हुए पल्स पोलियो अभियान के तहत जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों के पोलियो बूथोें पर 2.88 लाख बच्चों को पोलियो से बचाव के लिए दवा पिलाई गई। इस बार शहरी क्षेत्रों के लिए 10 डोज का वॉयल दिया गया है।
इससे पहले 20 डोज का वॉयल आता था। अधिक समय तक बाहर रहने से इसकी क्षमता घटने या खराब होने का अंदेशा रहता था। अभियान में विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ, यूएनडीपी समेत कई स्वयंसेवी संगठन अभियान में मदद करेंगे। अभियान को सफल बनाने में शिक्षा विभाग, आईसीडीएस समेत सभी संबंधित विभागों से सहयोग मांगा गया है।
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उन्होेंने कहा कि जब तक पड़ोसी देशों मेें पोलियो का पूरी तरह उन्मूलन नहीं हो जाता तब तक इस अभियान में सभी को गंभीरता से शामिल होना होगा। रविवार को शुरू हुए पल्स पोलियो अभियान के तहत जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों के पोलियो बूथोें पर 2.88 लाख बच्चों को पोलियो से बचाव के लिए दवा पिलाई गई। इस बार शहरी क्षेत्रों के लिए 10 डोज का वॉयल दिया गया है।
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इससे पहले 20 डोज का वॉयल आता था। अधिक समय तक बाहर रहने से इसकी क्षमता घटने या खराब होने का अंदेशा रहता था। अभियान में विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ, यूएनडीपी समेत कई स्वयंसेवी संगठन अभियान में मदद करेंगे। अभियान को सफल बनाने में शिक्षा विभाग, आईसीडीएस समेत सभी संबंधित विभागों से सहयोग मांगा गया है।
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