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Gorakhpur News: गांवों में फैला म्यूल खातों का जाल...साइबर ठगी के लिए हो रहे इस्तेमाल
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गोरखपुर। साइबर ठगों का जाल अब गांवों तक फैल चुका है। वहां गरीब लोगों को यह झांसे में लेकर म्यूल खाते खुलवाते हैं और इसके बाद दूसरे प्रदेशों में हुई साइबर ठगी की रकम को इन खातों की मदद से ठिकाने लगाते हैं। दूर बैठे सरगना इसकी मॉनिटरिंग करते हैं और इस वजह से आम लोग जांच में फंस जाते हैं। पुलिस ने अभी तक 1700 से अधिक म्यूल खातों का सत्यापन किया है लेकिन यह संख्या हजारों में है।
दरअसल, साइबर ठगी के बाद जालसाज उसकी रकम को थोड़ी ही देर में कई अलग-अलग बैंक खातों में भेज देते हैं। इससे शिकायत के बाद पुलिस को ट्रेस करने में दिक्कत आती है। ज्यादातर मामलों में यह पकड़ में भी नहीं आते।
जानकारी के अनुसार, म्यूल खाते खुलवाने के लिए कई गिरोह सक्रिय हैं। यह ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते हैं। इसके बाद उनसे या तो उनके बैंक खाते का पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक लेकर अपने पास रख लेते हैं या आधार कार्ड, पैन कार्ड लेकर एक नया खाता खुलवाते हैं। इस खाते से रुपये निकालने का सारा एक्सेस गिरोह के गुर्गों के पास होता है। बदले में वह खाताधारक को 1500 रुपये से दो हजार रुपये तक दे देते हैं। साइबर सेल की टीम इन खातों का सत्यापन कर रही है।
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पकड़े जा चुके हैं पांच गिरोह
हाल ही में पांच थानों की पुलिस ने इस तरह के गिरोह का पर्दाफाश किया है। इसमें खोराबार, एम्स, तिवारीपुर, कोतवाली और उरुवा बाजार शामिल है। इसमें गिरोह के गुर्गे पकड़े गए लेकिन सरगना अब भी पकड़ से दूर हैं। खास बात यह है कि गुर्गों को पता भी नहीं था कि वह किसके लिए काम कर रहे हैं। काम के बदले उन्हें समय से रुपये मिल जाते थे। सारा गिरोह टेलीग्राम के जरिये संचालित होता था। एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि जिले भर में म्यूल खातों का सत्यापन किया जा रहा है। गिरोह के सरगना तक पहुंचने की कोशिश जारी है।
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दरअसल, साइबर ठगी के बाद जालसाज उसकी रकम को थोड़ी ही देर में कई अलग-अलग बैंक खातों में भेज देते हैं। इससे शिकायत के बाद पुलिस को ट्रेस करने में दिक्कत आती है। ज्यादातर मामलों में यह पकड़ में भी नहीं आते।
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जानकारी के अनुसार, म्यूल खाते खुलवाने के लिए कई गिरोह सक्रिय हैं। यह ग्रामीण इलाकों में जाकर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देते हैं। इसके बाद उनसे या तो उनके बैंक खाते का पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक लेकर अपने पास रख लेते हैं या आधार कार्ड, पैन कार्ड लेकर एक नया खाता खुलवाते हैं। इस खाते से रुपये निकालने का सारा एक्सेस गिरोह के गुर्गों के पास होता है। बदले में वह खाताधारक को 1500 रुपये से दो हजार रुपये तक दे देते हैं। साइबर सेल की टीम इन खातों का सत्यापन कर रही है।
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पकड़े जा चुके हैं पांच गिरोह
हाल ही में पांच थानों की पुलिस ने इस तरह के गिरोह का पर्दाफाश किया है। इसमें खोराबार, एम्स, तिवारीपुर, कोतवाली और उरुवा बाजार शामिल है। इसमें गिरोह के गुर्गे पकड़े गए लेकिन सरगना अब भी पकड़ से दूर हैं। खास बात यह है कि गुर्गों को पता भी नहीं था कि वह किसके लिए काम कर रहे हैं। काम के बदले उन्हें समय से रुपये मिल जाते थे। सारा गिरोह टेलीग्राम के जरिये संचालित होता था। एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि जिले भर में म्यूल खातों का सत्यापन किया जा रहा है। गिरोह के सरगना तक पहुंचने की कोशिश जारी है।