इस मामले में पुलिस वादी बनने में कर रही थी आनाकानी, अधिवक्ता की तहरीर पर दर्ज हुआ केस, जानें क्या है वजह
- अधिवक्ता प्रणव कुमार द्विवेदी की तहरीर पर दर्ज हुआ केस
- पुलिस वादी बनने में कर रही थी आनाकानी, मामले की जांच शुरू
विस्तार
बड़हलगंज इलाके के सखराखोर गांव के एक बागीचे में बीते सोमवार को फेंकी गई नवजात बच्ची के मामले में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। अधिवक्ता व मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रणव कुमार द्विवेदी की तहरीर पर पुलिस ने बच्चे के परित्याग करने की धारा में केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।
इस मामले में पहले पुलिस तहरीर नहीं मिलने का हवाला देकर केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी। जिले में इस तरह का यह छठवां मामला है, जिसमें केस दर्ज किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार की दोपहर बागीचे में चरवाहों ने कपड़े में लिपटी एक नवजात बच्ची को देखा। उन्होंने बागीचे के मालिक रामानंद दुबे को सूचना दी। रामानंद ने पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने बच्ची का हेल्थ चेकअप कराकर चाइल्डलाइन को तो सुपुर्द कर दिया, मगर कानूनी कार्रवाई पर खामोश बैठ गई।
यह है प्रावधान
तहरीर नहीं मिलने का हवाला देकर पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी। अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो इसका संज्ञान लेकर अधिवक्ता प्रणव थाने पहुंचे और तहरीर दी। उनकी तहरीर पर पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
धारा 317 : माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाले व्यक्ति द्वारा 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना अपराध है।
सजा : सात साल की कैद या फिर जुर्माना या कैद व जुर्माना दोनों