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Exclusive: मौसम के साथ बदल तो नहीं रहा निमोनिया, अब होगा शोध

Wed, 27 Jul 2022 02:04 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 27 Jul 2022 02:04 PM IST
सार

आरएमआरसी की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हीरावती देवल ने बताया कि ये ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें बैक्टीरियल, वायरल सहित अन्य कारणों से निमोनिया हुआ है। इनमें कुछ बच्चे आईसीयू में भर्ती थे, जबकि कुछ सामान्य ओपीडी में दिखाने आए थे। इन बच्चों के नमूने लिए गए हैं। जिनपर शोध शुरू करने की तैयारी है।

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Pneumonia is not changing with seasons, research will be done
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पूर्वांचल में वायरल निमोनिया से लेकर बैक्टीरियल निमोनिया तक के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। नियमित टीकाकरण कराने वाले बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में मौसम के साथ निमोनिया के वायरस के बदलते प्रभाव पर शोध करने का फैसला आरएमआरसी (रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर) ने किया है।

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शोध में वायरल निमोनिया से लेकर बैक्टीरियल, माइक्रोप्लाज्मा, एस्पिरेशन और फंगल निमोनिया तक को शामिल किया गया है। इसके लिए आरएमआरसी ने पांच साल से कम उम्र के 250 बच्चों के नमूने एकत्र किए हैं।  
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जानकारी के मुताबिक, पूर्वांचल में बच्चों में निमोनिया के मामले तेजी से बढ़े हैं। पिछले दो से तीन वर्ष में अचानक इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी है। इनमें 50 फीसदी से अधिक बच्चों को आईसीयू में गंभीर हाल में भर्ती करने की जरूरत भी पड़ी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में प्रतिदिन पांच से सात बच्चे भर्ती भी हो रहे हैं। ठंड में यह संख्या और भी बढ़ जाती है। इसे लेकर आरएमआरसी ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में एक साल में भर्ती हुए एक से पांच वर्ष तक के 250 बच्चों का ब्योरा एकत्र किया है।
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आरएमआरसी की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हीरावती देवल ने बताया कि ये ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें बैक्टीरियल, वायरल सहित अन्य कारणों से निमोनिया हुआ है। इनमें कुछ बच्चे आईसीयू में भर्ती थे, जबकि कुछ सामान्य ओपीडी में दिखाने आए थे। इन बच्चों के नमूने लिए गए हैं। जिनपर शोध शुरू करने की तैयारी है।
 

मौसम के साथ तो नहीं बदल रहा वायरस?

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि निमोनिया का असर बच्चों पर अब हर मौसम में पड़ा रहा है। पहले आम तौर पर ठंड में ही निमोनिया के मामले आते थे। हर मौसम में मरीज मिलना चिंता का विषय है। आरएमआरसी की टीम ने कुछ बच्चों के नमूने लिए हैं, जिसके जरिए यह पता करने की कोशिश की जा रही है कि मौसम के साथ कहीं वायरस का स्वरूप तो नहीं बदला है, जो अलग-अलग मौसमों में अपना असर दिखा रहा है।

डॉ. हीरावती देवल ने बताया कि शोध के जरिए यह देखा जा रहा है कि बच्चों में निमोनिया के कारण क्या हैं? निमोनिया का टीका लगने के बाद बच्चों के अंदर प्रतिरोधक क्षमता का असर कितना है? क्योंकि, कई बच्चे ऐसे भी हैं, जिन्हें निमोनिया का टीका लगा है, लेकिन वह भी इसका शिकार हुए हैं। इसके अलावा बच्चों के शरीर पर कौन सा निमोनिया ज्यादा प्रभावी साबित हो रहा है।  

 

क्या है निमोनिया

डॉ हीरावती देवल ने बताया कि निमोनिया वायरस, बैक्टीरिया, फफूंदी व परजीवी के कारण होने वाला रोग है। ये सब श्वांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचकर संक्रमण करते हैं। स्ट्रेप्टोकोकस नामक बैक्टीरिया के कारण यह सबसे अधिक फैलता है, जो बच्चों में सबसे अधिक होता है। यह अधिकांश फ्लू (बुखार) के बाद होता है।

बच्चों में हो रहा यह निमोनिया
डॉ भूपेंद्र शर्मा ने बताया कि निमोनिया पांच तरह का होता है। बीआरडी में सभी पांचों तरह के निमोनिया के मरीज मिल भी रहे हैं। इनमें बैक्टीरियल, वायरल, माइक्रोप्लाज्मा, एस्पिरेशन, फंगल निमोनिया शामिल हैं। जबकि, पहले केवल बैक्टीरिया और वायरल निमोनिया ही मरीज मिलते थे। बताया कि बच्चों को निमोनिया टीबी, रूबैला, खसरा और वायरल डिजीज से भी हो सकता है। जबकि, इनके टीके भी बच्चों को लगाए जा रहे हैं। ऐसे में शोध बेहद जरूरी है।

शोध के बाद इलाज के तरीके में हो सकता है बदलाव
डॉ. हीरावती देवल ने बताया शोध के बाद यह पता चल जाएगा कि आखिरकार कौन से निमोनिया का वायरस ज्यादा हानिकारक है और कौन सा कम। इसके बाद उसी तर्ज पर बच्चों का इलाज किया जाएगा। इससे इलाज के तरीके में बदलाव हो सकेगा, जो पूर्वांचल के बच्चों के लिए ज्यादा कारगर साबित होगा।

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