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प्रधानमंत्री शहरी क्षेत्र आवास योजना में फर्जीवाड़े का आरटीआई से पर्दाफाश, अवैध कब्जे की जमीन पर घर बनाने के लिए 50 लोगों को बांट दिए पैसे

Tue, 21 Jan 2020 02:21 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jan 2020 02:21 AM IST
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pm awas yojna matter
प्रधानमंत्री शहरी क्षेत्र आवास योजना में फर्जीवाड़े का आरटीआई से पर्दाफाश, अवैध कब्जे की जमीन पर घर बनाने के लिए 50 लोगों को बांट दिए पैसे
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आवास विकास परिषद की भूमि पर बनकर तैयार हो गए घर, अब जागे अफसर
संतोष सिंह
गोरखपुर। शाहपुर आवास विकास कॉलोनी गीता वाटिका में 50 ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए 2 से 2.50 लाख रुपये दे दिए गए, जिनके पास अपनी या फिर सरकारी भूमि नहीं थी। जिस भूमि पर सभी आवास बनकर तैयार हो गए हैं, वह आवास विकास परिषद की है। आवास आयुक्त ने माना है कि यह निर्माण पूरी तरह से अवैध है। इस तरह सर्वे से लेकर आवास निर्माण के लिए धनराशि के आवंटन की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है कि आखिर किस लाभ की चाहत में अफसरों ने आंख मूंद कर इस तरह से सरकारी धन का दुरुपयोग किया।
आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के मुताबिक, गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) और जिला प्रशासन ने शाहपुर आवास विकास कॉलोनी गीता वाटिका में 24 लोगों को पट्टा आवंटित किया था, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 60 लोगों को घर निर्माण के लिए धनराशि दे दी गई। इस पर आवास विकास कॉलोनी के ए-36 निवासी राकेश कुमार ने आपत्ति की। राकेश कुमार का आरोप था कि जिन लोगों के पास अपनी या फिर सरकारी भूमि नहीं थी, उन्हें भी गलत तरीके से इस योजना में शामिल किया गया। राकेश ने आरटीआई के तहत आवास आवंटन की सूचना भी मांगी। डूडा के अफसरों ने लंबे समय तक मामला लटकाए रखा। इससे परेशान राकेश ने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।
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राज्य सूचना आयुक्त के हस्तक्षेप के बाद ही डूडा के परियोजना अधिकारी तेज कुमार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत रकम जारी करने की सूचना 4 जनवरी 2020 को दी। फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अब जिला प्रशासन और जीडीए को आगे कार्रवाई करनी है। ऐसा हुआ तो योजना के तहत बने सभी मकान ढहाने पड़ेंगे। सरकारी भूमि पर घर निर्माण की जानकारी डूडा के अफसरों को भी थी, इसके बावजूद मनमानी की गई। नियमानुसार, अपनी भूमि होने पर ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए धनराशि मिल सकती है।
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इस संबंध में परियोजना प्रबंधक डूडा तेज कुमार का कहना है कि हाउस टैक्स और बिजली बिल के आधार पर आवंटन किए गए हैं। जिन लोगों को पट्टा मिला था, उनके बच्चे बड़े हो गए। सब अलग-अलग हुए तो बड़े मकान की जरूरत पड़ी। शहरी क्षेत्र में 70 फीसदी लोगों के पास भूमि के मालिकाना हक से संबंधित दस्तावेज नहीं हैं। फर्जीवाड़े के आरोप निराधार हैं।
उधर, मुख्य अभियंता बिजली निगम देवेंद्र सिंह का कहना है कि मामले की जांच कराएंगे। यदि कनेक्शन देने में गड़बड़ी हुई तो उसे निलंबित करने की संस्तुति की जाएगी। दोषी कर्मचारी या फिर अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई भी होगी। सरकारी भूमि पर गलत तरीके से कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
लाभार्थियों की सूची में एक ही परिवार के कई लोग
धांधली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक ही परिवार के कई लोगों को योजना के तहत लाभ दिए गए। सालिक राम, शशि कपूर, ऋषि, प्रियंका, राजू और माया एक ही परिवार से संबंधित हैं। नियमानुसार, यह गलत है।
फर्जीवाड़े को सरकारी सिस्टम का सहारा
योजना के तहत आवंटन में फर्जीवाड़े के लिए सरकारी सिस्टम का सहारा लिया गया। आवास विकास परिषद की भूमि पर गलत तरीके से रहने वालों ने पहले सांठगांठ कर बिजली कनेक्शन लिया, फिर नगर निगम में हाउस टैक्स जमा करने की रसीद बनवा ली। बिजली बिल और हाउस टैक्स की रसीद डूडा को दिया, फिर अफसरों ने आवास आवंटित कर दिए। सर्वे की औपचारिकता पूरी नहीं की गई।
जिनके नाम भूमि का पट्टा, उसमें से 14 को नहीं मिला आवास
गोरखपुर। जीडीए और जिलाधिकारी ने जिन 24 लोगों को पीएम आवास योजना का पट्टा आवंटित किया था, उसमें से 14 को लाभ नहीं मिला है। इसके लिए उन्होंने मशक्कत भी की, पर लाभ नहीं मिल सका। शिव कुमार, बिजली, ओम प्रकाश, जुगनू, संजू, राकेश, सुभाष, चंदा देवी, अवधेश, शंभू, शिव कुमार, पार्वती देवी, सुनीता और छोटेलाल ने दौड़भाग भी की, लेकिन घर बनाने के लिए पैसा नहीं मिल सका। आरटीआई के तहत डूडा अधिकारी तेज कुमार ने जो सूचना दी है, उसके मुताबिक भूमि का पट्टा पाने वाले 10 लोगों को ही पीएम आवास योजना के तहत लाभ मिला है। इसमें मनोज, छैला, बेबी, सुनील, नंदलाल, मनोज, सोनू, संतोष, सालिक राम और प्रभावती का नाम शामिल है।
इनके नाम भूमि नहीं, फिर भी मिला आवास
शहरी क्षेत्र में इस योजना केे तहत लाभ लेने के लिए अपनी भूमि होना अनिवार्य शर्त है। बावजूद इसके अपनी भू्मि न होने पर भी मुन्नी देवी, खुशबू, शशि कपूर, जितेंद्र, शिमांगी देवी, सुनील कुमार मद्धेशिया, विमला देवी, शोभा देवी, धर्मनाथ, रामा, पिंकी देवी, सुनीता, कमलावती, राजेंद्र पिंकी, राधेश्याम बांसफोड़, राकेश कुमार बांसफोड़, टुनटुन कुमार, सनी, मीना देवी, लईशा देवी, संगम मघिया, उमा, अर्जुन कुमार, गायत्री देवी, ज्वाला कुमार, पार्वती देवी, गुलिची, मोनू, रूना देवी, कुंती देवी, सावित्री, नसिमा खातून, बतरे, सूरज कुमार, संतोला, मुन्नी, रेखा कुमारी सैनी, रेनू देवी, सावित्री गोंड, अमिता देवी, अमरावती, चंदा, प्रियंका, सुमित कुमार, विशाल, राजन, माया, मनोज कुमार, रीता देवी और गुड़िया को घर बनाने के लिए धनराशि दे दी गई।

आवास विकास परिषद की भूमि का पट्टा आवंटन भी गलत
जीडीए और जिला प्रशासन ने आवास विकास परिषद की शाहपुर गीता वाटिका की जिस भूमि का पट्टा दिया है, उसका अधिकार ही नहीं है। आवास विकास परिषद की भूमि का पट्टा नहीं दिया जा सकता है। यह मामला आवास आयुक्त तक पहुंचा था। आवास आयुक्त ने 24 पट्टों को गलत ठहराते हुए निरस्त कर दिया था। अब जीडीए और जिला प्रशासन को पट्टा निरस्त करने की अंतिम कार्रवाई करनी है। पट्टा आवंटन में गड़बड़ी सामने आने के बाद ही जिला प्रशासन ने शाहपुर आवास विकास कॉलोनी के 24 पट्टा आवंटियों को विस्थापित करने का फैसला किया है। साथ ही कहा है कि अवैध कब्जेदारों का निर्माण ढहाया जाएगा।
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