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Gorakhpur: बीआरडी में पहली बार मरीज के शरीर में बदला प्लाज्मा, सुपर स्पेशियलिटी की नेफ्रोलॉजी टीम ने किया इलाज
Sun, 28 Aug 2022 10:48 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 28 Aug 2022 10:48 AM IST
सार
बीआरडी में पहली बार मरीज के शरीर में प्लाज्मा बदला गया है।
सुपर स्पेशियलिटी की नेफ्रोलॉजी टीम ने इलाज किया है। डायलिसिस की तर्ज पर युवती का प्लाज्मा बदला गया है।
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BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोरखपुर में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पहली बार मरीज की जान बचाने के लिए शरीर में प्लाज्मा बदला गया। साइंस की भाषा में इस विधि को प्लाज्मा एफरेसिस कहते हैं। प्लाज्मा बदलने के बाद से मरीज की हालत में पहले से कुछ सुधार है। मरीज का इलाज मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के डायलिसिस यूनिट में किया गया।
इसमें न्यूरोलॉजी के साथ नेफ्रोलॉजी की टीम भी शामिल थी। जानकारी के मुताबिक, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में शहर की रहने वाली 25 वर्षीय युवती इलाज के लिए 15 दिन पूर्व गई थी। तेज बुखार के साथ उसके शरीर के कई हिस्से पूरी तरह से सुन्न हो रहे थे। इस पर ओपीडी की टीम ने सुपर स्पेशियलिटी में जांच की सलाह दी।
मरीज की जांच की गई तो पता चला कि उसे ऑटोइम्यून बीमारी मॉग लांग सेगमेंट माईलाइटिस है। इसकी वजह से शरीर के कई अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर दे रहे थे। इसके बाद मरीज को प्लाज्मा एफरेसिस नेफ्रोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ विजय कुमार सिंह की निगरानी में भर्ती किया गया।
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टीम ने पहली बार प्लाज्मा फिल्टर का प्रयोग करते हुए प्लाज्मा बदल दिया। यह काम प्लाज्मा एफरेसिस डायलिसिस यूनिट में किया गया। इसमें मरीज के शरीर से प्लाज्मा निकालकर उसमें बन रही एंटीबॉडी को अलग कर दिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे नया प्लाज्मा शरीर में डाला गया। इस तकनीक के बाद से बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है।
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इसमें न्यूरोलॉजी के साथ नेफ्रोलॉजी की टीम भी शामिल थी। जानकारी के मुताबिक, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में शहर की रहने वाली 25 वर्षीय युवती इलाज के लिए 15 दिन पूर्व गई थी। तेज बुखार के साथ उसके शरीर के कई हिस्से पूरी तरह से सुन्न हो रहे थे। इस पर ओपीडी की टीम ने सुपर स्पेशियलिटी में जांच की सलाह दी।
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मरीज की जांच की गई तो पता चला कि उसे ऑटोइम्यून बीमारी मॉग लांग सेगमेंट माईलाइटिस है। इसकी वजह से शरीर के कई अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर दे रहे थे। इसके बाद मरीज को प्लाज्मा एफरेसिस नेफ्रोलॉजी के विशेषज्ञ डॉ विजय कुमार सिंह की निगरानी में भर्ती किया गया।
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टीम ने पहली बार प्लाज्मा फिल्टर का प्रयोग करते हुए प्लाज्मा बदल दिया। यह काम प्लाज्मा एफरेसिस डायलिसिस यूनिट में किया गया। इसमें मरीज के शरीर से प्लाज्मा निकालकर उसमें बन रही एंटीबॉडी को अलग कर दिया गया। इसके बाद धीरे-धीरे नया प्लाज्मा शरीर में डाला गया। इस तकनीक के बाद से बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है।