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नवरात्रि 2021: तालाब के बीचों बीच है फूलमती माता का मंदिर, पहले तैरकर दर्शन को जाते थे श्रद्धालु

Fri, 08 Oct 2021 05:13 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया।
अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया। Published by: vivek shukla Updated Fri, 08 Oct 2021 05:13 PM IST
सार

मंदिर के चारों तरफ विशाल तालाब होने के कारण पूरे साल इसमें पानी भरा रहता है। 15 वर्ष पूर्व तक देवी दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को तैरकर मंदिर तक जाना पड़ता था। बाद में यहां पोखरे के बीच से सड़क का निर्माण करा दिया गया है।

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Phoolmati devi temple Sitting in Middle of Pond in deoria
फूलमती माता मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

देवरिया जिले के भागलपुर ब्लॉक के धर्मेर गांव के पश्चिमी छोर पर एक विशाल तालाब के बीचों बीच महल के खंडहर पर बना फूलमती माता का मंदिर श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र है। यह मंदिर मझौलीराज राज परिवार के वंशजों के कुल देवी का मंदिर है। वैसे तो पूरे साल इस मंदिर पर श्रद्धालु आते रहते हैं। लेकिन नवरात्रि के समय यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। यहां दूर दराज व बिहार सहित अन्य प्रांतों के भी श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

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कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले मझौलीराज पर दुखहरन मल्ल का शासन हुआ करता है। राजा को जब संतान के रूप में पुत्री प्राप्त हुई तो उन्होंने ज्योतिषियों से उनके भविष्य के बारे में पूछा। ज्योतिषियों ने राजा को बताया की राजकुमारी के विवाह के समय एक शेर द्वारा इनके पति का प्राणांत कर दिया जाएगा।
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पुत्री के भविष्य को लेकर चिंतित राजा ने धर्मेर गांव के महल के आसपास एक विशालकाय तालाब खुदवा कर उसमें पानी भरवा दिया। जिससे विवाह के समय कोई भी जानवर महल के अंदर न आने पाए। राज कुमारी के विवाह के दौरान ही महल में अचानक से शेर प्रकट होकर राजकुमारी के होने वाले पति का प्राणांत कर दिया। होने वाले पति के मौत के बाद राजकुमारी भी वहीं सती हो गईं।
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15 वर्ष पूर्व तैर कर जाते थे लोग

कालांतर में यह महल खंडहर में तब्दील हो गया। पहले तो महल के खंडहर पर ही देवी की पिंडी की पूजा की जाती थी लेकिन बाद में मझौलीराज परिवार के धर्मेर में रहने वाले वंशजों ने वहां मंदिर का निर्माण कराया। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से जो भी मांगा जाए वह कभी खाली नहीं जाता।

मंदिर के चारों तरफ विशाल तालाब होने के कारण पूरे साल इसमें पानी भरा रहता है। 15 वर्ष पूर्व तक देवी दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं को तैरकर मंदिर तक जाना पड़ता था। बाद में यहां पोखरे के बीच से सड़क का निर्माण करा दिया गया है। तालाब के बीच में होने के कारण यह मंदिर अपनी अद्वितीय मनमोहक दृश्य के कारण भी श्रद्धालुओं में आकर्षण का केंद्र है।


 

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