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Gorakhpur News: पहले बुलाते हैं ऑन कॉल डॉक्टर, बाद में फार्मासिस्ट भी करते हैं इलाज

Thu, 22 Feb 2024 04:26 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Feb 2024 04:26 PM IST
सार

गोरखपुर शहर और गांव के कई निजी अस्पताल ऑन कॉल डॉक्टरों के भरोसे चल रहे हैं।
अस्पतालों की जांच न होने से बढ़ती जा रही है मनमानी।
 

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Patient-ambulance mafia: Seven suspects detained, CCTV DVR seized
सीएमओ डॉ. आशुतोष दूबे- (सांकेतिक)

विस्तार

डेढ़ साल में स्वास्थ्य विभाग ने 30 नर्सिंग होम, सात अल्ट्रासाउंड व पैथालॉजी सेंटरों को सील कराया। 16 मामलों में केस भी दर्ज कराया है। बावजूद इसके अवैध नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड व पैथालॉजी का खेल बंद नहीं हो रहा। दरअसल इसके पीछे नियमों की ढील ही मुख्य वजह है। किसी डॉक्टर के नाम पर नर्सिंग होम का पंजीकरण कराने वाले पहले ऑन काॅल डॉक्टर बुलाकर लोगों को बेहतर इलाज दिलाते हैं और कुछ दिन बाद वहां के फार्मासिस्ट व वार्ड बॉय भी खुद डॉक्टर बनकर इलाज करने लगते हैं।
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जिले में इस वक्त 381 नर्सिंग होम, 256 क्लीनिक, 129 पैथालॉजी व एक्सरे और 290 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं। पंजीकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन है। अवैध नर्सिंग होम, क्लीनिक व पैथालॉजी आदि के संचालन में नियमों का ही खास महत्व है।

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पंजीकरण के लिए हुआ आवेदन अगर किसी कारण से निरस्त हो जाता है, तो आवेदक दोबारा भी ऑनलाइन आवेदन कर लेता है। इसलिए कई धंधेबाज ऐसा करते हैं कि अपने नर्सिंग होम, अस्पताल या पैथालॉजी आदि सेंटर का पंजीकरण नहीं होने पर जांच के दौरान दोबारा आवेदन करने की कहानी सुनाने लगते हैं। इससे जांच के वक्त आरोपी बच निकलते हैं। पीपीगंज में जांच के दौरान एक ऐसा ही अस्पताल सामने आया जिसके संचालक यह दलील देकर बच निकले।


ऐसे अस्पतालों में बाेर्ड पर डॉक्टर का नाम तो होता है, लेकिन वह डॉक्टर उस अस्पताल में नहीं होता। शुक्रवार की रात हुई छापेमारी में यह साबित भी हुआ। डॉक्टर की जगह फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारी ही इलाज का जिम्मा संभाले हुए थे।

 

इसके बाद शनिवार को शहर के जिन दो अस्पतालों को सील किया गया, उनमें से एक के साइन बोर्ड पर जिन डॉक्टरों का नाम लिखा था, उसमें से कोई नहीं मिला। उनकी जगह फार्मासिस्ट ही उपचार कर रहे थे। सोमवार को कैंपियरगंज में दो अल्ट्रासाउंड सेंटर सील किए गए। एक सेंटर पर जिस रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर का नाम लिखा था, उनकी जगह कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति जांच कर रहा था।
 

तीन साल में 37 अस्पताल सील

 

वर्ष अस्पताल सील
2022 13 अस्पताल
2023 18 अस्पताल
2024 छह अस्पताल


सीएमओ आशुतोष दूबे ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को जब भी कहीं से शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराई जाती है। इसके अलावा समय-समय पर अभियान भी चलाए जाते हैं। अब ऐसे जो भी मामले मिलेंगे तो अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अवैध अस्पतालों का संचालन रोकने के लिए हर संभव उपाय किए जाएंगे।

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