Gorakhpur News: पहले बुलाते हैं ऑन कॉल डॉक्टर, बाद में फार्मासिस्ट भी करते हैं इलाज
गोरखपुर शहर और गांव के कई निजी अस्पताल ऑन कॉल डॉक्टरों के भरोसे चल रहे हैं।
अस्पतालों की जांच न होने से बढ़ती जा रही है मनमानी।
विस्तार
जिले में इस वक्त 381 नर्सिंग होम, 256 क्लीनिक, 129 पैथालॉजी व एक्सरे और 290 अल्ट्रासाउंड सेंटर पंजीकृत हैं। पंजीकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन है। अवैध नर्सिंग होम, क्लीनिक व पैथालॉजी आदि के संचालन में नियमों का ही खास महत्व है।
ऐसे अस्पतालों में बाेर्ड पर डॉक्टर का नाम तो होता है, लेकिन वह डॉक्टर उस अस्पताल में नहीं होता। शुक्रवार की रात हुई छापेमारी में यह साबित भी हुआ। डॉक्टर की जगह फार्मासिस्ट व अन्य कर्मचारी ही इलाज का जिम्मा संभाले हुए थे।
इसके बाद शनिवार को शहर के जिन दो अस्पतालों को सील किया गया, उनमें से एक के साइन बोर्ड पर जिन डॉक्टरों का नाम लिखा था, उसमें से कोई नहीं मिला। उनकी जगह फार्मासिस्ट ही उपचार कर रहे थे। सोमवार को कैंपियरगंज में दो अल्ट्रासाउंड सेंटर सील किए गए। एक सेंटर पर जिस रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर का नाम लिखा था, उनकी जगह कोई अप्रशिक्षित व्यक्ति जांच कर रहा था।
तीन साल में 37 अस्पताल सील
| वर्ष | अस्पताल सील |
| 2022 | 13 अस्पताल |
| 2023 | 18 अस्पताल |
| 2024 | छह अस्पताल |
सीएमओ आशुतोष दूबे ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग को जब भी कहीं से शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराई जाती है। इसके अलावा समय-समय पर अभियान भी चलाए जाते हैं। अब ऐसे जो भी मामले मिलेंगे तो अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। अवैध अस्पतालों का संचालन रोकने के लिए हर संभव उपाय किए जाएंगे।