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मरीज-एंबुलेंस माफिया: दलालों और उनके खैरख्वाहों की अब अच्छी तरह खबर लेंगे जिलाधीश, एक महीने तक चलेगा अभियान
Mon, 11 Sep 2023 10:55 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 11 Sep 2023 10:55 AM IST
सार
डीएम कृष्णा करुणेश ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज व दवाओं की उपलब्धता की जांच के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। सभी को रोजाना पांच अस्पतालों की जांच कर रिपोर्ट देनी है। यह अभियान एक महीने तक चलेगा। अगर कहीं दलाल व बाहरी तत्वों की सक्रियता मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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मेडिकल कॉलेज ट्रामा सेंटर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
डॉक्टर के साथ दलाल की गलत हरकत और दबंगई अपना असर दिखा रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में दलालों की मनमानी हावी है। मरीज-एंबुलेंस माफिया के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अब जिला प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। अब एडीएम सिटी के अलावा सभी एसडीएम रोजाना पांच सरकारी अस्पतालों में जाएंगे और दवा व इलाज की जानकारी लेंगे।
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इसके लिए नोडल अधिकारी तय किए गए हैं, जो ओपीडी के साथ ही भर्ती मरीजों व तीमारदारों से फीडबैक भी लेंगे। डीएम (जिलाधीश) ने दलालों और सिस्टम में रहकर उनकी पैरोकारी करने वालों की कमर तोड़ने का मन बना लिया है। उनके निर्देश पर एक महीने तक इसे अभियान के रूप में चलाया जाएगा।
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मेडिकल कॉलेज में बार-बार मरीजों की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। वहीं, जिला अस्पताल के हड्डी रोग विभाग के ओटी में डॉक्टर की कुर्सी पर दलाल के बैठने और बाद में डॉक्टर को धमकाने का मामला आने के बाद जिला प्रशासन ने अब सभी अस्पतालों में जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके तहत बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल व महिला अस्पताल पर विशेष निगरानी की जाएगी।
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इसके लिए एडीएम सिटी के साथ अन्य अधिकारियों को लगाया गया है। वहीं, जिले के सभी प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच के लिए एसडीएम को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वे अपने क्षेत्र में रोजाना पांच अस्पतालों की जांच करेंगे। वहां मरीजों के इलाज व दवा की उपलब्धता के बारे में जानकारी लेकर डीएम को रिपोर्ट सौंपेंगे।
दोपहर दो बजे के पहले एमआर मिले तो कार्रवाई
सरकारी अस्पतालों में ओपीडी के समय अगर डॉक्टर से मिलने एमआर (मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव) पहुंचे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। डीएम ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। नोडल बनाए गए अधिकारी सरकारी अस्पतालों में जांच के दौरान यह देखेंगे कि कोई एमआर तो ओपीडी के आसपास भटक नहीं रहा है।
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दरअसल, प्रशासन को यह शिकायत मिली थी कि ओपीडी के समय बहुत सारे एमआर पहुंच जाते हैं और डॉक्टर उन्हें ज्यादा समय देते हैं। उनके प्रभाव में आकर निजी कंपनियों की दवाएं भी लिखी जाती हैं। इसके बाद डीएम ने जांच कराने का निर्देश नोडल अधिकारियों को दिया है।
डीएम कृष्णा करुणेश ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज व दवाओं की उपलब्धता की जांच के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। सभी को रोजाना पांच अस्पतालों की जांच कर रिपोर्ट देनी है। यह अभियान एक महीने तक चलेगा। अगर कहीं दलाल व बाहरी तत्वों की सक्रियता मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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दरअसल, प्रशासन को यह शिकायत मिली थी कि ओपीडी के समय बहुत सारे एमआर पहुंच जाते हैं और डॉक्टर उन्हें ज्यादा समय देते हैं। उनके प्रभाव में आकर निजी कंपनियों की दवाएं भी लिखी जाती हैं। इसके बाद डीएम ने जांच कराने का निर्देश नोडल अधिकारियों को दिया है।
डीएम कृष्णा करुणेश ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज व दवाओं की उपलब्धता की जांच के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। सभी को रोजाना पांच अस्पतालों की जांच कर रिपोर्ट देनी है। यह अभियान एक महीने तक चलेगा। अगर कहीं दलाल व बाहरी तत्वों की सक्रियता मिलती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।