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Gorakhpur: भेड़ के बालों की बिक्री थमते ही थम गया जिंदगी का पहिया, परिवार चलाना हो गया मुश्किल

Tue, 22 Nov 2022 02:37 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 22 Nov 2022 02:37 PM IST
सार

भेड़ पालकों ने बताया कि साल में तीन बार भेड़ के बाल काटे जाते हैं। यदि समय पर भेड़ों के बाल नहीं काटे जाए तो वह एक निश्चित समय पर गिर जाते हैं और देर से बाल काटने पर भेड़ों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। जिस वजह से भेड़ों के बाल काटकर घर में रखना पड़ता है।

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parents who run household by selling sheep hair not getting customers
भेड़ पालक अपनी भेड़-बकरियों के साथ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर जिले में भेड़ के बालों की बिक्री थमी है। जिससे उसके दामों में काफी गिरावट आई है। 35 रुपये किलो बिकने वाले बाल अब 10 किलो रुपये में भी नहीं बिक रहे। इससे ग्रामीण इलाकों में भेड़ पालन कर जीविकोपार्जन करने वाले लोग गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। भेड़ों के बाल बेचकर गृहस्थी चलाने वाले पालकों को ग्राहक नहीं मिल रहे हैं।

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भेड़ पालकों का कहना है कि नई पीढ़ी ने तो परंपरागत कार्य को छोड़कर मजदूरी करना शुरू कर दिया है परंतु जीवन का आधा से अधिक हिस्सा इसमें लगाने के बाद भेड़पालकों को परिवार चलाने का दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा है। सभी ने कपड़े के कारोबार की तरह ही भेड़ के बालों से बने उत्पादों की बिक्री के लिए व्यवस्था करवाने की मांग की है। उनके घर में भेड़ के बाल तो एकत्र हैं लेकिन उनकी बिक्री नहीं हो रही।
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भेड़ पालकों का कहना है कि एक समय था जबकि बाल लेने के लिए ग्राहक बड़ी संख्या में आते थे और 35 रुपये प्रति किलो की दर से बालों को खरीदते थे, लेकिन अब बाल खरीदने वाले नहीं आ रहे हैं और कभी कोई खरीदने आ गया तो बाल की कीमत गिराकर बात करता है। 35 रुपये किलो की दर से बिकने वाले भेड़ों की बाल को 10 रुपये किलो का भी मूल्य नहीं मिल रहा है।
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सालों से बंद है बिक्री

क्षेत्र में भेड़ पालन कर जीवन यापन करने वाले लोगों का परंपरागत रूप से भेड़पालन करना ही मुख्य कार्य रहा है। बदलते समय के साथ भेड़ के बालों से बने कंबल आदि की मांग घट जाने से इसकी बिक्री नहीं हो पा रही है लेकिन पिछले छह सात सालों से इनके मुख्य व्यवसाय पर भी ग्रहण लग गया। भेड़पालकों का कहना है कि अब बाल एकत्र होते हैं लेकिन कोई खरीदने नहीं आता ऐसे में कभी कभी बालों को फेंकना पड़ जाता है।

साल में तीन बार कटते हैं बाल
भेड़ पालकों ने बताया कि साल में तीन बार भेड़ के बाल काटे जाते हैं। यदि समय पर भेड़ों के बाल नहीं काटे जाए तो वह एक निश्चित समय पर गिर जाते हैं और देर से बाल काटने पर भेड़ों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है। जिस वजह से भेड़ों के बाल काटकर घर में रखना पड़ता है।

ऐसे में अब यह भेड़पालक सरकार से मदद की गुहार कर रहे हैं। राजकीय ऊन वर्गीकरण एवं क्रय विक्रय केंद्र जंगल कौड़िया में लगभग 15 सालों से बंद है। जिसके कारण भेड़ पालकों को बाल को बेचने में अनेक समस्या का सामने करना पड़ता है।

भेड़ पालक श्यामदेव पाल ने कहा कि भेड़ के बालों का मूल्य दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा है, जिसके कारण जीविका उपार्जन में समस्या का सामना करना पड़ता है।

भेड़ पालक श्रीराम पाल ने कहा कि सरकारी क्रय केंद्र नहीं होने से सस्ते दाम में भेड़ के बाल को बेचना पड़ता है। जिससे हम भेड़ पालक आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं।

गोरखपुर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों की समस्या को शासन को अवगत कराया जाएगा। साथ ही ब्लॉक पर बना ऊन क्रय - विक्रय केंद्र नियमानुसार चालू कराया जाएगा।

 

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