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Gorakhpur News: झगड़ रहे मां-बाप, डिप्रेशन के शिकार हो रहे बच्चे
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मां-बाप हमेशा बच्चों की भलाई चाहते हैं। उनका स्नेह बच्चों को भावात्मक रूप से मजबूत बनाता है। कई मनोवैज्ञानिक टेस्ट में यह बात साबित भी हो चुकी है। इसके बाद भी हर महीने 40 से 45 युगल आपसी झगड़े निपटाने पुलिस के पास पहुंच रहे हैं। रोज-रोज के इनके झगड़े बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर भी असर डाल रहे हैं। किसी का बच्चा दादा-दादी के पास पल रहा है तो किसी का नाना-नानी के पास। मनोविज्ञानी मानते हैं कि इन झगड़ों का असर बच्चों के विकास पर पड़ता है और वे जीवन भर इस त्रासदी से उबर नहीं पाते।
परिवार परामर्श केंद्र के परामर्शदाता का कहना है कि दंपती अपनी लड़ाई में उलझे हैं। उन्हें बच्चों के परवरिश की चिंता ही नहीं है। बच्चा कहां पढ़ाई कर रहा है और भविष्य को लेकर क्या योजना है, इस पर ऐसे दंपती सोच भी नहीं रहे हैं। इसका असर कई बच्चों पर इतना गहरा पड़ रहा है कि वे भी ऐसे मां-बाप को देखना नहीं चाह रहे हैं।
मां-बाप का मुंह नहीं देखना चाहते बच्चे
रामगढ़ताल इलाके की एक दंपती बैंकाक रहती थी। अपने तीन बच्चों को दादी के पास छोड़ दिए थे। बैंकाक में दोनों में विवाद हुआ और वापस आए। यहां आकर मामला इतना बढ़ गया कि तलाक तक बात पहुंच गई। घर जाने पर बच्चे भी उन्हें मां बाप मानने से इंकार करने लगे। बच्चे दादी को ही अपना सब कुछ मानते हैं, उन्हीं के साथ रहना चाहते हैं। अभी इस दंपती की काउंसलिंग परिवार परामर्श केंद्र में चल रही है।
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नानी के घर पल रहा बेटा
एम्स इलाके में पति-पत्नी के बीच हमेशा विवाद होता है। पत्नी ने तीन साल के बच्चे को नानी के पास छोड़ दिया है। नानी उसकी देखभाल करती हैं। इधर महिला अपने पति के साथ रहती है और हर दिन दोनों के बीच झगड़ा भी होता रहता है। पिछले महीने वह अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए घर लेकर आई, तब पति से झगड़ा शुरू हो गया। मामला थाने तक पहुंचा और बच्चा फिर नानी के घर भेजना पड़ा।
हमारे पास कई बच्चे जो डिप्रेशन के शिकार होकर आते हैं, उनकी काउंसलिंग में सामने आता है कि घर पर माहौल अच्छा नहीं था, इस वजह से उनके अंदर नकारात्मकता आ गई। माता-पिता के झगड़े का बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ता है। काउंसलिंग के दौरान माता-पिता को भी बच्चों के सामने झगड़ा न करने की सलाह दी जाती है।
डॉ. आकृति पांडेय,
मनोचिकित्सक
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परिवार परामर्श केंद्र के परामर्शदाता का कहना है कि दंपती अपनी लड़ाई में उलझे हैं। उन्हें बच्चों के परवरिश की चिंता ही नहीं है। बच्चा कहां पढ़ाई कर रहा है और भविष्य को लेकर क्या योजना है, इस पर ऐसे दंपती सोच भी नहीं रहे हैं। इसका असर कई बच्चों पर इतना गहरा पड़ रहा है कि वे भी ऐसे मां-बाप को देखना नहीं चाह रहे हैं।
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मां-बाप का मुंह नहीं देखना चाहते बच्चे
रामगढ़ताल इलाके की एक दंपती बैंकाक रहती थी। अपने तीन बच्चों को दादी के पास छोड़ दिए थे। बैंकाक में दोनों में विवाद हुआ और वापस आए। यहां आकर मामला इतना बढ़ गया कि तलाक तक बात पहुंच गई। घर जाने पर बच्चे भी उन्हें मां बाप मानने से इंकार करने लगे। बच्चे दादी को ही अपना सब कुछ मानते हैं, उन्हीं के साथ रहना चाहते हैं। अभी इस दंपती की काउंसलिंग परिवार परामर्श केंद्र में चल रही है।
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नानी के घर पल रहा बेटा
एम्स इलाके में पति-पत्नी के बीच हमेशा विवाद होता है। पत्नी ने तीन साल के बच्चे को नानी के पास छोड़ दिया है। नानी उसकी देखभाल करती हैं। इधर महिला अपने पति के साथ रहती है और हर दिन दोनों के बीच झगड़ा भी होता रहता है। पिछले महीने वह अपने बच्चे को पढ़ाने के लिए घर लेकर आई, तब पति से झगड़ा शुरू हो गया। मामला थाने तक पहुंचा और बच्चा फिर नानी के घर भेजना पड़ा।
हमारे पास कई बच्चे जो डिप्रेशन के शिकार होकर आते हैं, उनकी काउंसलिंग में सामने आता है कि घर पर माहौल अच्छा नहीं था, इस वजह से उनके अंदर नकारात्मकता आ गई। माता-पिता के झगड़े का बच्चों पर बहुत बुरा असर पड़ता है। काउंसलिंग के दौरान माता-पिता को भी बच्चों के सामने झगड़ा न करने की सलाह दी जाती है।
डॉ. आकृति पांडेय,
मनोचिकित्सक