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श्रद्धालु आज रखेंगे परम एकादशी का व्रत
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श्रद्धालुओं के मनोरथों को पूर्ण करती है परम एकादशी, आज रखेंगे व्रत
गोरखपुर। परम एकादशी का व्रत श्रद्धालुओं के सभी मनोरथों को पूर्ण करता है। आज श्रद्धालु विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करेंगे और व्रत रखेंगे। ऐसी मान्यता है कि यह एकादशी अन्य से अधिक फलदायी होती है। तीन साल में यह एकबार पड़ती है। इस वजह से इसका महात्म्य कहीं बढ़कर है।
अधिक मास की परम एकादशी मंगलवार को मनाई जाएगी। जो लोग अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी का व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और वह बैकुंठ धाम को प्राप्त करते हैं।
कुछ इस तरह है पूजा की विधि
ज्योतिर्विद् पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार परम एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठें। स्नानादि करें, इसके बाद साफ पीले रंग के वस्त्र पहनें। फिर एक चौकी लेकर उस पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। उस पर लाल कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। चावल और फूलों से कुमकुम की पूजा करें। इसके बाद चौकी पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा को विराजित करें।
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दीप, धूप और अगरबत्ती जलाएं। श्री विष्णु को फूलों का हार चढ़ाकर मस्तक पर चंदन का तिलक लगाएं। तुलसी दल भी अर्पित करें। विष्णु चालीसा, विष्णु स्तुति, विष्णु स्तोत्र, विष्णु सहस्त्रनाम और परम एकादशी व्रत की कथा पढ़ें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। फिर आरती कर उन्हें भोग लगाएं। इसी तरह व्रत वाले दिन के सूर्यास्त के बाद भी पूजन करें।
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गोरखपुर। परम एकादशी का व्रत श्रद्धालुओं के सभी मनोरथों को पूर्ण करता है। आज श्रद्धालु विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करेंगे और व्रत रखेंगे। ऐसी मान्यता है कि यह एकादशी अन्य से अधिक फलदायी होती है। तीन साल में यह एकबार पड़ती है। इस वजह से इसका महात्म्य कहीं बढ़कर है।
अधिक मास की परम एकादशी मंगलवार को मनाई जाएगी। जो लोग अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी का व्रत रखते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और वह बैकुंठ धाम को प्राप्त करते हैं।
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कुछ इस तरह है पूजा की विधि
ज्योतिर्विद् पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार परम एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठें। स्नानादि करें, इसके बाद साफ पीले रंग के वस्त्र पहनें। फिर एक चौकी लेकर उस पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। उस पर लाल कुमकुम से स्वास्तिक बनाएं। चावल और फूलों से कुमकुम की पूजा करें। इसके बाद चौकी पर भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा को विराजित करें।
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दीप, धूप और अगरबत्ती जलाएं। श्री विष्णु को फूलों का हार चढ़ाकर मस्तक पर चंदन का तिलक लगाएं। तुलसी दल भी अर्पित करें। विष्णु चालीसा, विष्णु स्तुति, विष्णु स्तोत्र, विष्णु सहस्त्रनाम और परम एकादशी व्रत की कथा पढ़ें। इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। फिर आरती कर उन्हें भोग लगाएं। इसी तरह व्रत वाले दिन के सूर्यास्त के बाद भी पूजन करें।