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पापा की तरह बनूंगा बहादुर : प्रतीक
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पापा की तरह बनूंगा बहादुर : प्रतीक
विवेक जायसवाल
महराजगंज। शहीद पंकज त्रिपाठी का मासूम बेटा प्रतीक त्रिपाठी की महज छह साल का है। दूसरी बरसी पर शहीद के घर आए लोग शहीद की चर्चा कर रहे थे। इसी बीच बेटा सभी लोगों से बेखबर दरवाजे पर फुटबॉल खेलते हुए पहुंचा।
यहां आ-जा रहा हर शख्स उसे देखकर भावुक हो जाता। प्रतीक आनंदनगर कस्बे के एमपी पब्लिक स्कूल में एलकेजी में पढ़ रहा है। पूछने पर तुतलाते उसने पिता की तरह देश की सेवा करने की बात कही तो वहां मौजूद लोगों ने उसे गोद में उठा लिया। इस बीच वह कभी अपनी मां के पास तो कभी मामा के पास जाकर छिपता रहा। शहीद के पिता अपने नाती प्रतीक की मासूमियत देखकर अपने आंसू पोंछते नजर आए। संवाद
खेल मैदान अब भी अधूरा
पुलवामा में शहीद पंकज त्रिपाठी के शहादत पर सरकार द्वारा किए गए अधिकांश वादे पूरे हो गए हैं। गांव तक पहुंचने वाली सड़क शहीद के नाम है। शहीद द्वार, शहीद स्मारक, गांव के प्राथमिक विद्यालय को शहीद पंकज त्रिपाठी के नाम पर है। वहीं गांव में शहीद के नाम पर घोषित खेल के मैदान अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है। खेल के मैदान के बाहर एक गेट बनवाया गया। न तो बाउंड्री बनी है। न ही खेल सामग्री मिली। धन के अभाव में काम पूरा नहीं किया जा सका। धन के लिए वादा किया गया लेकिन मिला नहीं।
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अधूरे कार्य को पूरा किया जाएगा
फरेंदा विधायक बजरंग बहादुर सिंह ने कहा कि हरपुर बेलहिया के शहीद पंकज त्रिपाठी के शहादत के बाद जितने वादे सरकार ने किए थे सभी को पूरा किया। परिवार को हर संभव मदद भी मिली। सड़क, बिजली, पानी आदि की सुविधाएं दी गई। जो भी अधूरे कार्य हैं, उसको जल्दी पूरा कराया जाएगा।
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शहीद पंकज का जीवन परिचय
-12 मार्च 1990 को पंकज त्रिपाठी का जन्म हुआ था
- 2012 में सीआरपीएफ में चालक के पद पर भर्ती हुए
-14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकियों के हमले में शहीद
- जब वह शहीद हुए थे उस वक्त उनके बेटे की उम्र तीन साल थी।
- शहीद होने के कुछ ही दिन बाद उनकी बेटी वान्या का जन्म हुआ
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विवेक जायसवाल
महराजगंज। शहीद पंकज त्रिपाठी का मासूम बेटा प्रतीक त्रिपाठी की महज छह साल का है। दूसरी बरसी पर शहीद के घर आए लोग शहीद की चर्चा कर रहे थे। इसी बीच बेटा सभी लोगों से बेखबर दरवाजे पर फुटबॉल खेलते हुए पहुंचा।
यहां आ-जा रहा हर शख्स उसे देखकर भावुक हो जाता। प्रतीक आनंदनगर कस्बे के एमपी पब्लिक स्कूल में एलकेजी में पढ़ रहा है। पूछने पर तुतलाते उसने पिता की तरह देश की सेवा करने की बात कही तो वहां मौजूद लोगों ने उसे गोद में उठा लिया। इस बीच वह कभी अपनी मां के पास तो कभी मामा के पास जाकर छिपता रहा। शहीद के पिता अपने नाती प्रतीक की मासूमियत देखकर अपने आंसू पोंछते नजर आए। संवाद
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खेल मैदान अब भी अधूरा
पुलवामा में शहीद पंकज त्रिपाठी के शहादत पर सरकार द्वारा किए गए अधिकांश वादे पूरे हो गए हैं। गांव तक पहुंचने वाली सड़क शहीद के नाम है। शहीद द्वार, शहीद स्मारक, गांव के प्राथमिक विद्यालय को शहीद पंकज त्रिपाठी के नाम पर है। वहीं गांव में शहीद के नाम पर घोषित खेल के मैदान अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है। खेल के मैदान के बाहर एक गेट बनवाया गया। न तो बाउंड्री बनी है। न ही खेल सामग्री मिली। धन के अभाव में काम पूरा नहीं किया जा सका। धन के लिए वादा किया गया लेकिन मिला नहीं।
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अधूरे कार्य को पूरा किया जाएगा
फरेंदा विधायक बजरंग बहादुर सिंह ने कहा कि हरपुर बेलहिया के शहीद पंकज त्रिपाठी के शहादत के बाद जितने वादे सरकार ने किए थे सभी को पूरा किया। परिवार को हर संभव मदद भी मिली। सड़क, बिजली, पानी आदि की सुविधाएं दी गई। जो भी अधूरे कार्य हैं, उसको जल्दी पूरा कराया जाएगा।
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शहीद पंकज का जीवन परिचय
-12 मार्च 1990 को पंकज त्रिपाठी का जन्म हुआ था
- 2012 में सीआरपीएफ में चालक के पद पर भर्ती हुए
-14 फरवरी 2019 को पुलवामा में आतंकियों के हमले में शहीद
- जब वह शहीद हुए थे उस वक्त उनके बेटे की उम्र तीन साल थी।
- शहीद होने के कुछ ही दिन बाद उनकी बेटी वान्या का जन्म हुआ
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