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Gorakhpur News: ओटीपी से बदल जाएगा बेचे गए वाहनों का मालिकाना हक
Tue, 12 Mar 2024 12:50 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 12 Mar 2024 12:50 PM IST
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विक्रेता के साथ क्रेता को भी मिलेगी दौड़ भाग से मुक्ति
ऑनलाइन व्यवस्था को प्रभावी करने की है तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। बेचे गए पुराने वाहनों को ट्रांसफर कराने के लिए अब भागदौड़ नहीं करनी होगी। परिवहन विभाग अब ऑनरशिप ट्रांसफर की सुविधा विभागीय वेबसाइट के माध्यम देने की व्यवस्था में है। विक्रेता के साथ ही क्रेता सत्यापन के लिए दोनों के मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। जहां दोनों आपस में ओटीपी साझा करेंगे और विभाग के वेब पर दर्ज करेंगे। इसके बाद वाहन का ट्रांसफर हो जाएगा।
परिवहन विभाग में वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया ओटीपी आधारित की जा रही है, क्योंकि पुराना वाहन बेचने के बाद ट्रांसफर की प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है। पहले पुरानी व्यवस्था के तहत विक्रेता व क्रेता को आरटीओ कार्यालय आना पड़ता था।
यहां प्रभारी अधिकारी दोनों से अपने सामने हस्ताक्षर करवाकर प्रक्रिया पूरी कराते थे, लेकिन नई व्यवस्था लागू करने पर पहले दस्तावेज को ऑनलाइन ही स्कैन किया जाएगा। फिर आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी से क्रेता-विक्रेता का सत्यापन होगा। फिर मालिकाना हक ट्रांसफर करने के लिए परिवहन विभाग की वेबसाइट पर जाना होगा।
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यहां वाहन की ऑनरशिप ट्रांसफर पर बेचने वाले को क्लिक करना होगा जिसके बाद उपलब्ध फॉर्म को भरने के बाद बेचने वाले से उसका डाटा लिया जाएगा। दोबारा एक ओटीपी आएगा जिसे डालने पर वाहन बेचने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
खरीदार खरीदी जाने वाली गाड़ी का पंजीकरण नंबर डालेगा। इसके बाद बेचने वाले की ओर से भरी गई जानकारी उसके सामने आ जाएगी। खरीदार ने स्वीकृति दिया तो अंतिम ओटीपी आएगा, जिसे लोड करते ही वाहन की ऑनरशिप बदलने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
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कोट
ऑनलाइन व्यवस्था पहले से प्रभावी है। अबतक सिर्फ विक्रेता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ही मैसेज जाता था। इसमें सत्यापन के लिए खरीदार को कार्यालय आना पड़ता है, लेकिन नई व्यवस्था जो ऑनलाइन की चल रही है उसमें ओटीटी से ही कार्य पूर्ण होंगे।
- अरुण कुमार, एआरटीओ प्रशासन
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ऑनलाइन व्यवस्था को प्रभावी करने की है तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। बेचे गए पुराने वाहनों को ट्रांसफर कराने के लिए अब भागदौड़ नहीं करनी होगी। परिवहन विभाग अब ऑनरशिप ट्रांसफर की सुविधा विभागीय वेबसाइट के माध्यम देने की व्यवस्था में है। विक्रेता के साथ ही क्रेता सत्यापन के लिए दोनों के मोबाइल नंबर पर ओटीपी भेजा जाएगा। जहां दोनों आपस में ओटीपी साझा करेंगे और विभाग के वेब पर दर्ज करेंगे। इसके बाद वाहन का ट्रांसफर हो जाएगा।
परिवहन विभाग में वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया ओटीपी आधारित की जा रही है, क्योंकि पुराना वाहन बेचने के बाद ट्रांसफर की प्रक्रिया ऑनलाइन की जा रही है। पहले पुरानी व्यवस्था के तहत विक्रेता व क्रेता को आरटीओ कार्यालय आना पड़ता था।
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यहां प्रभारी अधिकारी दोनों से अपने सामने हस्ताक्षर करवाकर प्रक्रिया पूरी कराते थे, लेकिन नई व्यवस्था लागू करने पर पहले दस्तावेज को ऑनलाइन ही स्कैन किया जाएगा। फिर आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी से क्रेता-विक्रेता का सत्यापन होगा। फिर मालिकाना हक ट्रांसफर करने के लिए परिवहन विभाग की वेबसाइट पर जाना होगा।
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यहां वाहन की ऑनरशिप ट्रांसफर पर बेचने वाले को क्लिक करना होगा जिसके बाद उपलब्ध फॉर्म को भरने के बाद बेचने वाले से उसका डाटा लिया जाएगा। दोबारा एक ओटीपी आएगा जिसे डालने पर वाहन बेचने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
खरीदार खरीदी जाने वाली गाड़ी का पंजीकरण नंबर डालेगा। इसके बाद बेचने वाले की ओर से भरी गई जानकारी उसके सामने आ जाएगी। खरीदार ने स्वीकृति दिया तो अंतिम ओटीपी आएगा, जिसे लोड करते ही वाहन की ऑनरशिप बदलने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
कोट
ऑनलाइन व्यवस्था पहले से प्रभावी है। अबतक सिर्फ विक्रेता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर ही मैसेज जाता था। इसमें सत्यापन के लिए खरीदार को कार्यालय आना पड़ता है, लेकिन नई व्यवस्था जो ऑनलाइन की चल रही है उसमें ओटीटी से ही कार्य पूर्ण होंगे।
- अरुण कुमार, एआरटीओ प्रशासन