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Gorakhpur News: राष्ट्रीय लोक अदालत में निपटाए गए 11 लाख से अधिक वाद
Sun, 13 Sep 2026 02:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 13 Sep 2026 02:42 AM IST
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गोरखपुर। राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को मुकदमों के निस्तारण का बड़ा अभियान चला। जिले में सूचीबद्ध 12,12,956 वादों में से 11,80,849 का निस्तारण किया गया। यानी सूचीबद्ध मामलों में करीब 97 फीसदी का समाधान हुआ। इनमें राजस्व और अन्य विभागों के 11,58,859 पूर्व विवादित मामले शामिल हैं।
जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राज कुमार सिंह ने लोक अदालत का उद्घाटन किया और दो वादों का निस्तारण किया। परिवार न्यायालय में 41 मामले निपटाए गए। इनमें 13 दंपतियों के बीच सुलह कराकर उन्हें साथ विदा किया गया।
वहीं, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 256 मामलों का निस्तारण हुआ और पीड़ितों को 57 लाख रुपये का प्रतिकर दिलाया गया। वाणिज्यिक न्यायालय में तीन मामले निपटे। विभिन्न न्यायालयों में 2775 आपराधिक वाद सुलह-समझौते के आधार पर खत्म किए गए।
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बैंक और वित्तीय कंपनियों से जुड़े 761 पूर्व-विवादित मामलों का भी निस्तारण हुआ। इनमें संबंधित पक्षों से धनराशि जमा कराई गई। पारिवारिक विवादों से जुड़े पूर्व-विवादित और लंबित मिलाकर 117 मामलों का समाधान किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मिनाक्षी सिन्हा ने बताया कि लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों के साथ राजस्व अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।
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जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष राज कुमार सिंह ने लोक अदालत का उद्घाटन किया और दो वादों का निस्तारण किया। परिवार न्यायालय में 41 मामले निपटाए गए। इनमें 13 दंपतियों के बीच सुलह कराकर उन्हें साथ विदा किया गया।
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वहीं, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में 256 मामलों का निस्तारण हुआ और पीड़ितों को 57 लाख रुपये का प्रतिकर दिलाया गया। वाणिज्यिक न्यायालय में तीन मामले निपटे। विभिन्न न्यायालयों में 2775 आपराधिक वाद सुलह-समझौते के आधार पर खत्म किए गए।
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बैंक और वित्तीय कंपनियों से जुड़े 761 पूर्व-विवादित मामलों का भी निस्तारण हुआ। इनमें संबंधित पक्षों से धनराशि जमा कराई गई। पारिवारिक विवादों से जुड़े पूर्व-विवादित और लंबित मिलाकर 117 मामलों का समाधान किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मिनाक्षी सिन्हा ने बताया कि लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों के साथ राजस्व अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी की।