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गोरखपुर: ट्रेन में चोरी गए सामान के बदले 3.83 लाख देने का आदेश, उपभोक्ता फोरम ने सुनाया फैसला

Fri, 15 Apr 2022 02:58 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 15 Apr 2022 02:58 PM IST
सार

आयोग के समक्ष रेलवे का कहना था कि परिवादी ने ट्रेन में यात्रा के दौरान संबंधित लगेज सामानों की बुकिंग नहीं थी, कथित सामानों को परिवादी ने खुद अपनी देखरेख में रखा था, जिसके लिए वह खुद जिम्मेदार है। इसलिए वाद निरस्त होने योग्य है।

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Order to give 3.83 lakhs in lieu of stolen goods in train
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

चोरी हुए सामान के बदले 3.83 लाख 296 रुपये देने का आदेश दिया गया है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश अस्थाना, सदस्य कृष्णानंद मिश्र व सुधा उपाध्याय ने पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक के खिलाफ यह फैसला सुनाया है।

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उपभोक्ता फोरम ने कहा कि आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से भुगतान करें। इसके अतिरिक्त बतौर क्षतिपूर्ति एवं वाद व्यय के रूप में 75 हजार रुपये भी प्रदान करें। आदेश का अनुपालन दो माह के अंदर न करने पर ब्याज नौ प्रतिशत देय होगा।
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जानकारी के मुताबिक, आयोग के समक्ष कैंट थाना क्षेत्र के उषा निकेतन मोहद्दीपुर, कूड़ाघाट निवासी परिवादी अतुल कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बृज बिहारी लाल श्रीवास्तव एवं अधिवक्ता अंबरीष कुमार मल्ल का कहना था कि परिवादी ने पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए 30 मार्च 2018 को अपना व अपनी पत्नी का गोरखपुर जंक्शन से सूरत जंक्शन के लिए आईआरटीसी से ऑनलाइन आरक्षण अवध आसाम एक्सप्रेस में एसी-2 में बुक किया था। 29 जुलाई 2018 को परिवादी अपनी पत्नी के साथ गोरखपुर से ट्रेन में बैठ गया।
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ट्रेन लखनऊ पहुंची और जब लखनऊ से चली तो परिवादी और उसकी पत्नी को नींद आ गई। बालामऊ स्टेशन आने वाला था तभी परिवादी की पत्नी की नींद खुली तो उसका पर्स गायब था, जिसमें सोने के जेवरात व नकद रुपये थे। आयोग के समक्ष रेलवे का कहना था कि परिवादी ने ट्रेन में यात्रा के दौरान संबंधित लगेज सामानों की बुकिंग नहीं थी, कथित सामानों को परिवादी ने खुद अपनी देखरेख में रखा था, जिसके लिए वह खुद जिम्मेदार है। इसलिए वाद निरस्त होने योग्य है।

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