फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Online game addiction affecting brain of children in Gorakhpur

Online Game Effect: मोबाइल गेम बच्चों के दिमाग पर हावी, नींद में कह रहे, 'धांय-धांय'

Wed, 17 May 2023 03:24 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 17 May 2023 03:24 PM IST
सार

जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही ने बताया कि गेम की लत से बच्चों की सेहत भी प्रभावित हो रही है। वे डिप्रेशन और एंजाइटी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे बच्चों की काउंसिलिंग की जा रही है। अभी केवल पांच फीसदी बच्चों को दवा की जरूरत पड़ रही है।

विज्ञापन
Online game addiction affecting brain of children in Gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

गोरखपुर शहर के 14 वर्ष के एक किशोर को एफपीएस कमांडो सिक्रेट मिशन गेम खेलने की लत ऐसी लगी कि वह अब नींद में ऐसे-ऐसे शब्द बोलता है कि माता-पिता घबराए हुए हैं। नींद में वह धांय-धांय.. या आई किल यू, मार डालो.. जैसे शब्द बोलता है। ऐसी आवाजें सुनते ही माता-पिता उसे नींद से जगा देते हैं। तब जाकर वह सामान्य होता है। लेकिन, यह समस्या एक दिन की नहीं है। सप्ताह में चार-पांच दिन इसी तरह नींद में बड़बड़ाना सामान्य हो गया है।

विज्ञापन


ऐसे 200 से अधिक बच्चों की काउंसिलिंग बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक कर रहे हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि किसी भी चीज की लत दिमाग पर हावी हो जाए, तो उसे मनोचिकित्सक की भाषा में ड्रीम वर्क कहते हैं। यह ड्रीम वर्क दिमाग में इस कदर बैठ जाता है कि बच्चा हर वक्त उन्हीं बातों को सोचता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक प्रो. डॉ. अमिल हयात खान ने बताया कि गेम की लत बच्चों के दिमाग पर हावी होती जा रही है, जो उनके भविष्य के लिए ठीक नहीं है।
विज्ञापन


कोरोना काल में लैपटॉप-मोबाइल के इस्तेमाल ने बिगाड़े हालात
ऐसे मामले कोरोना महामारी के बाद तेजी से बढ़े हैं। महामारी के दौरान बच्चों के हाथों में लैपटॉप और मोबाइल पकड़ा दिया गया। उन पर नजर भी नहीं रखी गई। ऐसे में बच्चों को गेम की लत लग गई। इसमें ज्यादातर गेम हिंसक हैं। ये गेम उनके दिमाग पर अलग-अलग तरीके से असर कर रहे हैं। बच्चे नींद में बड़बड़ा रहे है। डॉ. अमिल हयात का कहना है यह समस्या जल्दी समाप्त नहीं होने वाली है। क्योंकि, बच्चों का दिमाग ज्यादा तेज चलता है। एक बार अगर दिमाग में कोई बात बैठ जाती है, तो वह हर वक्त गूंजती रहती है। इसी समस्या को ड्रीम वर्क कहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



 

बच्चे हो रहे डिप्रेशन और एंजाइटी के शिकार

जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही ने बताया कि गेम की लत से बच्चों की सेहत भी प्रभावित हो रही है। वे डिप्रेशन और एंजाइटी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे बच्चों की काउंसिलिंग की जा रही है। अभी केवल पांच फीसदी बच्चों को दवा की जरूरत पड़ रही है। माता-पिता को भी समझाया जा रहा है कि बच्चों को मोबाइल से दूर रखें। लेकिन अचानक नहीं, धीरे-धीरे एक नियम बनाएं और उन्हें मोबाइल के इस्तेमाल से रोकें।

बच्चों का अकेलापन भी बड़ा कारण
डॉ. अमित शाही ने बताया कि इस तरह के मामलों का दूसरा सबसे बड़ा कारण बच्चों का अकेलापन है। बच्चों ने खुद बताया कि उन्हें मम्मी और पापा समय नहीं देते हैं। घर में कोई भी बुजुर्ग नहीं हैं, जो उनसे बातें करे, सवालों के जवाब दे, उनके साथ खेले। यही कारण है कि ऐसे बच्चों का ज्यादा वक्त मोबाइल में बीत रहा है। इसलिए अभिभावकों की भी काउंसिलिंग की जा रही है कि बच्चों को समय दें, जिससे वे मोबाइल के इस्तेमाल से बच सकें।

इसे भी पढ़ें: डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला के निशाने पर थे हरिशंकर तिवारी, राजनीति में पाना चाहता था एंट्री

हैप्पी हार्मोंस भी वजह
डॉ. अमित शाही के अनुसार, ऑनलाइन गेम या अन्य मनोरंजक साधनों के इस्तेमाल से बच्चों के मस्तिष्क में न्यूरो केमिकल रिसाव होता है, जिसे हैप्पी हार्मोंस भी कहते हैं। इस बीच अचानक उसे गेम खेलने से रोक दिया जाए तो हैप्पी हार्माेंस का रिसाव रुक जाता है। इसकी वजह से बच्चे डिप्रेशन में आने लगते हैं। ऐसे बच्चों को काउंसिलिंग और दवाओं की जरूरत पड़ रही है।

इन गेम का असर दिमाग पर ज्यादा
चाइनीज गेम पब-जी के बैन होने के बाद भी कई ऐसे गेम हैं, जो बच्चों के दिमाग पर ज्यादा असर डाल रहे हैं। इनमें एफपीएस कमांडो सिक्रेट मिशन, निन्जा आरसी, निन्जा राइडेन रिवेंज, स्टॉर्म फाल सागा ऑफ सरवाइकल, रोबोलाॅक्स, रेड वाइपर जैसे गेम ज्यादा हिंसक हैं। यह मारधाड़ वाले गेम हैं। 90 फीसदी बच्चे इन्हीं गेम को खेलते हैं।






 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed