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Gorakhpur News: युवाओं की एक ऐसी भी टीम...इबादत के साथ जरूरतमंद रोजेदारों के बने मददगार
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गोरखपुर। माह-ए-रमजान में सभी इबादत कर अल्लाह को राजी करने में जुटे हुए हैं। रोजे तो रखे जा रहे हैं, वहीं नफ्ली इबादत भी खूब की जा रही है। इसके साथ ही कोई भी सवाब कमाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहा है। ऐसे में सबसे जोश युवाओं में देखने को मिल रहा है। एक तरफ वह इबादत कर नेकी कमाने में जुटे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर वह जरूरतमंदों के मददगार भी बने हैं। जिस घर में राशन की जरूरत है, उन्हें राशन मुहैया करा रहे हैं, वहीं जिसे दवा या दूसरी जरूरतें हैं, उसका इंतजाम भी कर रहे हैं। ये युवा अकेले मदद करने के साथ ही टोलियों में भी लोगों की जरूरत को पूरा करने में लगे हुए हैं।
बेतियाहाता के रहने वाले अबुजर की अगुवाई में युवाओं की टीम लोगों की मदद कर रही है, जबकि वसीम की सरपरस्ती में एक अलग टीम भी जरूरतमंदों की मददगार बनी है। अबुजर कहते हैं, रमजान में सभी घरों में लजीज व्यंजन बनाए जाते हैं, लेकिन कई ऐसे परिवार भी हैं, जहां लजीज व्यंजन बनना तो दूर वहां पर खाने के भी लाले पड़े रहते हैं। ऐसे ही लोगों को तलाश कर उनकी टीम कम से कम खाने की जरूरी वस्तुएं मुहैया करा रही है, जिससे कि उनको बेहतरीन व्यंजन न सही, पेट भरने के लिए जरूरी खाने-पीने की चीजें दी जा सकें।
अबुजर ने बताया कि रमजान के दौरान इफ्तार के वक्त उनके घर एक व्यक्ति आया जो रोजा खोलने के लिए कुछ मांग रहा था, उन्होंने उसे इफ्तार करा दिया। लेकिन उनके मन में अजीब सी सिहरन पैदा हो गई। सोचा कि आसपास के लोगों में भी काफी लोग ऐसे होंगे, जिनको इफ्तार नसीब नहीं हो रहा होगा। ऐसे में उन्होंने अपने दोस्त फैसल, फजल, अकमल, आमिर, हाशिर और फैजान के साथ मिलकर पैसा जमा कर इफ्तार किट तैयार करने की ठानी और इसके बाद जमा हुए पैसे से इफ्तार किट तैयार की। इसमें आटा, चावल, दाल के साथ चना, बेसन और तेल भी शामिल रहता है। इसे जरूरतमंदों को मुहैया कराया। कमो-बेश ऐसा ही वाकया वसीम के साथ भी हुआ और उन्होंने भी दोस्तों संग पैसा इकट्ठा कर लोगों की मदद शुरू कर दी। अबुजर ने अपने ग्रुप को खिदमत, जबकि वसीम ने नौजवानों की कमेटी बनाकर इसे ब्रदर्स कम्युनिटी नाम दिया है। दोनों ही अब रोजा रखने वाले गरीब और जरूरतमंदों की मदद करने में लगे हुए हैं।
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इबादत के साथ गुजर रहा है दिन
रमजान में फर्ज इबादत का 70 गुना सवाब मिलता है। यही वजह है कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इबादत में मशगूल रहते हैं। चाहे काम करने वाला व्यक्ति हो या फिर स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं, सभी अपने दूसरे कामों के साथ इबादत भी कर रहे हैं। जब भी काम से फुर्सत मिल रही है तो वह इबादत में मशगूल हो जा रहे हैं। गोरखपुर के युवाओं से बातचीत में उन्होंने बताया कि सुबह सहरी के बाद ही उनका इबादत का सिलसिला शुरू हो जा रहा है। इसके बाद कॉलेज से लौटने पर वह इबादत में मशगूल हो जा रहे हैं। दिन में थोड़ा आराम करने के बाद फिर वह शाम में फिर नमाज और तिलावत कर रहे हैं। यही हाल ऑफिस में काम करने वाले युवाओं का भी है।
मैं सुबह उठ जाता हूं। सहरी करने के बाद फज्र की नमाज अदा करता हूं। इसके बाद जो असाइनमेंट रहते हैं, उन्हें पूरा करने के बाद कॉलेज चला जाता हूं। वापस लौटकर आराम करता हूं और रोजा खोलने के बाद थोड़ा आराम कर तरावीह के लिए चला जाता हूं।
मोहम्मद हुजैफा, छात्र
सहरी में उठना लाजिमी है, ऐसे में सहरी करने के बाद मैं नमाज अदा कर थोड़ी देर के लिए सो जाता हूं। इसके बाद ऑफिस चला जाता हूं। शाम में लौटने के बाद इफ्तार का वक्त हो जाता है। इफ्तार के बाद फिर आराम कर तरावीह पढ़ता हूं, यही रूटीन है।
मुसव्विर उलहक, नौकरीपेशा
माह-ए-रमजान के पहले जुमा की नमाज अदा, मांगी दुआ
गोरखपुर। माह-ए-रमजान के पहले जुमा की नमाज शहर की सभी मस्जिदों में अदा की गई। मुल्क में अमनों अमन व खुशहाली की दुआ मांगी गई। फर्ज नमाजों के साथ नफ्ल नमाज पढ़ी गई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई। माह-ए-रमजान का पहला जुमा व चौथा रोजा अल्लाह को राजी करने में गुजरा। मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक, जामा मस्जिद उर्दू बाजार, जामा मस्जिद रसूलपुर, गोरखनाथ जामा मस्जिद, दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद जामा मस्जिद नार्मल, मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह, अबु बाजार उंचवा, गाजी मस्जिद गाजी रौजा, सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर, मक्का मस्जिद मेवातीपुर, चिश्तिया मस्जिद में बक्शीपुर, गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार सहित सभी मस्जिदों में भीड़ उमड़ी।
उलमा किराम ने की तकरीर
मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने जुमे और रोजे की खूबियां बताईं। उन्होंने कहा कि रोजा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है बल्कि खुद पर नियंत्रण का जरिया भी है। असल रोजा तो वह है जिससे अल्लाह राजी हो जाए। नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना मो. असलम रजवी ने बेहूदा बातों से बचने की सलाह दी। गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर में मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी ने अल्लाह की इनायतों, रहमतों का जिक्र किया। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि नमाज और कुरआन पढ़ें, क्योंकि इस महीने में जो इबादत की जाती है, आम दिनों के मुकाबले ज्यादा सवाब देती है। एक दूसरे की मदद करें, जकात और फित्रा अदा करें। गरीबों को ज्यादा से ज्यादा सदका व खैरात दें। रोजेदारों को इफ्तार कराएं।
मिर्गी का दौरा पड़ने से रोजा नहीं टूटेगा : उलमा किराम
उलमा-ए-अहले सुन्नत द्वारा जारी रमजान हेल्पलाइन नंबरों पर जुमा को सवाल-जवाब का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने नमाज, रोजा, जकात, फित्रा आदि के बारे में सवाल किए। उलमा किराम ने कुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया। जमुनहिया बाग के आसिफ ने पूछा कि रोजे की हालत में अगर मिर्गी के रोगी को दौरा पड़ जाए तो क्या रोजा टूट जाएगा? इस पर मुफ्ती मेराज अहमद ने रोजा न टूटने की बात कही। बड़ेकाजीपुर की निकहत ने रोजे की हालत में बच्चे को दूध पिलाना कैसा क्या इससे भी रोजा टूट जाएगा? इस पर मुफ्ती अख्तर हुसैन ने दूध पिलाने में कोई हर्ज नहीं नहीं बताया। वहीं गोरखनाथ के शुएब अंसारी ने आंख में सुर्मा लगाने और सर में तेल लगाने से जुड़ा सवाल किया, जिस पर मौलाना जहांगीर अहमद ने रोजा न टूटने की बात बताई।
मुफ्ती-ए-शहर ने किया ''रमजान के मसाइल'' पुस्तक का विमोचन
गोरखपुर। मजलिस असहाबे कलम की ओर से हिंदी में प्रकाशित ''रमजान के मसाइल'' नामक पुस्तक का विमोचन चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में जुमा की नमाज के बाद मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी व नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने किया। पुस्तक में रोजा, सहरी, इफ्तार, तरावीह, एतिकाफ, शबे कद्र, ईद, चांद रात व मुक़द्दस तारीखों का उल्लेख किया गया है। पुस्तक की 1100 प्रतियां अवाम में मुफ्त बांटी जाएंगी। युवा लेखक हाफिज अशरफ रजा द्वारा लिखी गई पुस्तक ''रमजान के मसाइल'' के विमोचन के अवसर पर गोष्ठी भी हुई। इस दौरान हाफिज नजरे आलम कादरी, मुफ्ती मेराज अहमद कादरी, मौलाना दानिश रजा अशरफी, मौलाना महमूद रजा कादरी, हाफिज आमिर हुसैन, हाफिज रहमत अली निजामी, सैयद नदीम अहमद, अली गजनफर शाह, समीर अली आदि ने मुबारकबाद पेश की।
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बेतियाहाता के रहने वाले अबुजर की अगुवाई में युवाओं की टीम लोगों की मदद कर रही है, जबकि वसीम की सरपरस्ती में एक अलग टीम भी जरूरतमंदों की मददगार बनी है। अबुजर कहते हैं, रमजान में सभी घरों में लजीज व्यंजन बनाए जाते हैं, लेकिन कई ऐसे परिवार भी हैं, जहां लजीज व्यंजन बनना तो दूर वहां पर खाने के भी लाले पड़े रहते हैं। ऐसे ही लोगों को तलाश कर उनकी टीम कम से कम खाने की जरूरी वस्तुएं मुहैया करा रही है, जिससे कि उनको बेहतरीन व्यंजन न सही, पेट भरने के लिए जरूरी खाने-पीने की चीजें दी जा सकें।
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अबुजर ने बताया कि रमजान के दौरान इफ्तार के वक्त उनके घर एक व्यक्ति आया जो रोजा खोलने के लिए कुछ मांग रहा था, उन्होंने उसे इफ्तार करा दिया। लेकिन उनके मन में अजीब सी सिहरन पैदा हो गई। सोचा कि आसपास के लोगों में भी काफी लोग ऐसे होंगे, जिनको इफ्तार नसीब नहीं हो रहा होगा। ऐसे में उन्होंने अपने दोस्त फैसल, फजल, अकमल, आमिर, हाशिर और फैजान के साथ मिलकर पैसा जमा कर इफ्तार किट तैयार करने की ठानी और इसके बाद जमा हुए पैसे से इफ्तार किट तैयार की। इसमें आटा, चावल, दाल के साथ चना, बेसन और तेल भी शामिल रहता है। इसे जरूरतमंदों को मुहैया कराया। कमो-बेश ऐसा ही वाकया वसीम के साथ भी हुआ और उन्होंने भी दोस्तों संग पैसा इकट्ठा कर लोगों की मदद शुरू कर दी। अबुजर ने अपने ग्रुप को खिदमत, जबकि वसीम ने नौजवानों की कमेटी बनाकर इसे ब्रदर्स कम्युनिटी नाम दिया है। दोनों ही अब रोजा रखने वाले गरीब और जरूरतमंदों की मदद करने में लगे हुए हैं।
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रमजान में फर्ज इबादत का 70 गुना सवाब मिलता है। यही वजह है कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इबादत में मशगूल रहते हैं। चाहे काम करने वाला व्यक्ति हो या फिर स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं, सभी अपने दूसरे कामों के साथ इबादत भी कर रहे हैं। जब भी काम से फुर्सत मिल रही है तो वह इबादत में मशगूल हो जा रहे हैं। गोरखपुर के युवाओं से बातचीत में उन्होंने बताया कि सुबह सहरी के बाद ही उनका इबादत का सिलसिला शुरू हो जा रहा है। इसके बाद कॉलेज से लौटने पर वह इबादत में मशगूल हो जा रहे हैं। दिन में थोड़ा आराम करने के बाद फिर वह शाम में फिर नमाज और तिलावत कर रहे हैं। यही हाल ऑफिस में काम करने वाले युवाओं का भी है।
मैं सुबह उठ जाता हूं। सहरी करने के बाद फज्र की नमाज अदा करता हूं। इसके बाद जो असाइनमेंट रहते हैं, उन्हें पूरा करने के बाद कॉलेज चला जाता हूं। वापस लौटकर आराम करता हूं और रोजा खोलने के बाद थोड़ा आराम कर तरावीह के लिए चला जाता हूं।
मोहम्मद हुजैफा, छात्र
सहरी में उठना लाजिमी है, ऐसे में सहरी करने के बाद मैं नमाज अदा कर थोड़ी देर के लिए सो जाता हूं। इसके बाद ऑफिस चला जाता हूं। शाम में लौटने के बाद इफ्तार का वक्त हो जाता है। इफ्तार के बाद फिर आराम कर तरावीह पढ़ता हूं, यही रूटीन है।
मुसव्विर उलहक, नौकरीपेशा
माह-ए-रमजान के पहले जुमा की नमाज अदा, मांगी दुआ
गोरखपुर। माह-ए-रमजान के पहले जुमा की नमाज शहर की सभी मस्जिदों में अदा की गई। मुल्क में अमनों अमन व खुशहाली की दुआ मांगी गई। फर्ज नमाजों के साथ नफ्ल नमाज पढ़ी गई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई। माह-ए-रमजान का पहला जुमा व चौथा रोजा अल्लाह को राजी करने में गुजरा। मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक, जामा मस्जिद उर्दू बाजार, जामा मस्जिद रसूलपुर, गोरखनाथ जामा मस्जिद, दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद जामा मस्जिद नार्मल, मस्जिद सुब्हानिया तकिया कवलदह, अबु बाजार उंचवा, गाजी मस्जिद गाजी रौजा, सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर, मक्का मस्जिद मेवातीपुर, चिश्तिया मस्जिद में बक्शीपुर, गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर, सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार सहित सभी मस्जिदों में भीड़ उमड़ी।
उलमा किराम ने की तकरीर
मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने जुमे और रोजे की खूबियां बताईं। उन्होंने कहा कि रोजा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं है बल्कि खुद पर नियंत्रण का जरिया भी है। असल रोजा तो वह है जिससे अल्लाह राजी हो जाए। नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना मो. असलम रजवी ने बेहूदा बातों से बचने की सलाह दी। गौसिया जामा मस्जिद छोटे काजीपुर में मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी ने अल्लाह की इनायतों, रहमतों का जिक्र किया। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि नमाज और कुरआन पढ़ें, क्योंकि इस महीने में जो इबादत की जाती है, आम दिनों के मुकाबले ज्यादा सवाब देती है। एक दूसरे की मदद करें, जकात और फित्रा अदा करें। गरीबों को ज्यादा से ज्यादा सदका व खैरात दें। रोजेदारों को इफ्तार कराएं।
मिर्गी का दौरा पड़ने से रोजा नहीं टूटेगा : उलमा किराम
उलमा-ए-अहले सुन्नत द्वारा जारी रमजान हेल्पलाइन नंबरों पर जुमा को सवाल-जवाब का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने नमाज, रोजा, जकात, फित्रा आदि के बारे में सवाल किए। उलमा किराम ने कुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया। जमुनहिया बाग के आसिफ ने पूछा कि रोजे की हालत में अगर मिर्गी के रोगी को दौरा पड़ जाए तो क्या रोजा टूट जाएगा? इस पर मुफ्ती मेराज अहमद ने रोजा न टूटने की बात कही। बड़ेकाजीपुर की निकहत ने रोजे की हालत में बच्चे को दूध पिलाना कैसा क्या इससे भी रोजा टूट जाएगा? इस पर मुफ्ती अख्तर हुसैन ने दूध पिलाने में कोई हर्ज नहीं नहीं बताया। वहीं गोरखनाथ के शुएब अंसारी ने आंख में सुर्मा लगाने और सर में तेल लगाने से जुड़ा सवाल किया, जिस पर मौलाना जहांगीर अहमद ने रोजा न टूटने की बात बताई।
मुफ्ती-ए-शहर ने किया ''रमजान के मसाइल'' पुस्तक का विमोचन
गोरखपुर। मजलिस असहाबे कलम की ओर से हिंदी में प्रकाशित ''रमजान के मसाइल'' नामक पुस्तक का विमोचन चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में जुमा की नमाज के बाद मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी व नायब काजी मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने किया। पुस्तक में रोजा, सहरी, इफ्तार, तरावीह, एतिकाफ, शबे कद्र, ईद, चांद रात व मुक़द्दस तारीखों का उल्लेख किया गया है। पुस्तक की 1100 प्रतियां अवाम में मुफ्त बांटी जाएंगी। युवा लेखक हाफिज अशरफ रजा द्वारा लिखी गई पुस्तक ''रमजान के मसाइल'' के विमोचन के अवसर पर गोष्ठी भी हुई। इस दौरान हाफिज नजरे आलम कादरी, मुफ्ती मेराज अहमद कादरी, मौलाना दानिश रजा अशरफी, मौलाना महमूद रजा कादरी, हाफिज आमिर हुसैन, हाफिज रहमत अली निजामी, सैयद नदीम अहमद, अली गजनफर शाह, समीर अली आदि ने मुबारकबाद पेश की।