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जब आत्मा अपने स्वरूप में अवस्थित हो जाए तब योग : डॉ. जयंत
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फोटो
गोरखनाथ मंदिर के स्मृति भवन में साप्ताहिक योग शिविर में योग संबंधी दी गई जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर के स्मृति भवन में चल रहे साप्ताहिक योग शिविर के तीसरे दिन सैद्धांतिक सत्र में 'समसामयिक परिप्रेक्ष्य में योग का महत्व' विषय पर व्याख्यान हुआ। योगाचार्य डॉ. जयंतनाथ ने कहा कि योग शब्द वेदों, उपनिषदों, गीता एवं पुराणों आदि में अति पुरातन काल से प्रचलित है। भारतीय दर्शन में योग एक अति महत्वपूर्ण शब्द है। आत्मदर्शन एवं समाधि से लेकर कर्म क्षेत्र तक योग का व्यापक व्यवहार हमारे शास्त्रों में हुआ है। जब आत्मा अपने स्वरूप में अवस्थित हो जाता है, तब योग होता है।
योगाचार्य ने कहा कि योग एक स्वस्थ, समृद्ध, प्रगतिशील, सभ्य, उन्नत भव्य एवं दिव्य जीवन का पथ है। इसका संबंध मात्र कुछ यौगिक प्रक्रियाओं एवं अभ्यासों से ही नहीं है, अपितु श्रेष्ठतम दिव्य आचरण या दिव्य जीवन जीना ही योग का अंतिम ध्येय है। कार्यक्रम में कबीर मठ मगहर के डॉ. हरिशरण दास, बृजेश मणि मिश्र, विनय गौतम, प्रभात शास्त्री, मंगला त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे ।
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गोरखनाथ मंदिर के स्मृति भवन में साप्ताहिक योग शिविर में योग संबंधी दी गई जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर के स्मृति भवन में चल रहे साप्ताहिक योग शिविर के तीसरे दिन सैद्धांतिक सत्र में 'समसामयिक परिप्रेक्ष्य में योग का महत्व' विषय पर व्याख्यान हुआ। योगाचार्य डॉ. जयंतनाथ ने कहा कि योग शब्द वेदों, उपनिषदों, गीता एवं पुराणों आदि में अति पुरातन काल से प्रचलित है। भारतीय दर्शन में योग एक अति महत्वपूर्ण शब्द है। आत्मदर्शन एवं समाधि से लेकर कर्म क्षेत्र तक योग का व्यापक व्यवहार हमारे शास्त्रों में हुआ है। जब आत्मा अपने स्वरूप में अवस्थित हो जाता है, तब योग होता है।
योगाचार्य ने कहा कि योग एक स्वस्थ, समृद्ध, प्रगतिशील, सभ्य, उन्नत भव्य एवं दिव्य जीवन का पथ है। इसका संबंध मात्र कुछ यौगिक प्रक्रियाओं एवं अभ्यासों से ही नहीं है, अपितु श्रेष्ठतम दिव्य आचरण या दिव्य जीवन जीना ही योग का अंतिम ध्येय है। कार्यक्रम में कबीर मठ मगहर के डॉ. हरिशरण दास, बृजेश मणि मिश्र, विनय गौतम, प्रभात शास्त्री, मंगला त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे ।
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