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संकल्प विकल्प के प्रवाह को ही कहा जाता है मन: डॉ. बलवंत

Sun, 18 Jun 2023 07:26 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jun 2023 07:26 PM IST
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On the fourth day of the ongoing weekly yoga camp at Gorakhnath temple, Dr. Balwan Singh, former Vice Chancellor, Department of Defense Studies on the subject of Amansk Yoga, said that Amansk Yoga means such a state
गोरखनाथ मंदिर में चल रहे साप्ताहिक योग शिविर में अमनस्क योग का महत्व समझाया
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संवाद न्यूज एजेंसी

गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर में चल रहे साप्ताहिक योग शिविर के चौथे दिन अमनस्क योग विषय पर रक्षा अध्ययन विभाग के पूर्व उपाचार्य डॉ. बलवान सिंह ने कहा कि अमनस्क योग का अर्थ है ऐसी अवस्था जहां मन की सत्ता नहीं रहती है। जिस योग में मन, अमन हो जाता है, वह अमनस्क योग है। योगिराज बाबा गंभीर नाथ ने योग रहस्य में कहा है कि उठने वाले संकल्प, विकल्प ही मन है।

रविवार को शिविर के दौरान डॉ. बलवंत ने कहा कि मन अस्तित्व और प्रकृति के बीच सेतु का काम करता है। अस्तित्व में उठी हुई लहर मन है। मन का स्वभाव है दौड़ते रहना। दौड़ समाप्त होते ही अथवा तृष्णा एवं इच्छा समाप्त होते ही मन समाप्त हो जाता है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि अमन की अवस्था प्राप्त करने का क्या उपाय है। अमन की अवस्था प्राप्त करने का उपाय ही अमनस्क योग है। इस अमनस्क योग को भगवान शिव ने शांभवी मुद्रा अथवा विद्या कहा है। शिव द्वारा बनाई गई अमनस्क विद्या गुरु गोरखनाथ द्वारा लोक कल्याण के लिए साधकों को दी गई। अमनस्क विद्या वास्तव में योग की महाविद्या है। महायोगी गुरु गोरखनाथ ने कहा है कि योगी को किसी भी विषय वस्तु का चिंतन न करते हुए सहज स्वरूप में निरंजन परम शून्य तत्व में समाहित रहना चाहिए। जब साधक विहंगम योग की प्रक्रिया में अपने चित्त की चंचलता को वश में करके मन की वृत्तियों का निरोध करते हुए मन को परम तत्व में लीन कर देता है तब मन अपने विषयों से विरत होकर उन्मनी भाव को प्राप्त हो जाता है। यहीं राज योग का द्वार है।
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