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गोरखपुर जिले में छह सौ मेडिकल स्टोर्स पर उठी उंगली, एनजीओ ने जड़े गंभीर आरोप
Sat, 25 Jan 2020 01:38 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Sat, 25 Jan 2020 01:38 PM IST
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एक ही डिग्री पर कई मेडिकल स्टोर चलाने की हेराफेरी रोकने को फार्मासिस्टों की डिग्री आधार से लिंक करने की योजना दो साल बाद भी आधी-अधूरी लागू हो पाई है। नए मेडिकल स्टोर के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाले फार्मासिस्ट को तो आधार से लिंक किया जा रहा है, लेकिन पुराने मेडिकल स्टोर अभी भी ऑफलाइन लाइसेंस से ही संचालित हो रहे हैं।
यह आरोप है बेरोजगार फार्मासिस्ट उत्थान सेवा संस्थान के जिलाध्यक्ष कृष्ण प्रताप साहनी का। उन्होंने सभी फार्मासिस्टों की डिग्री आधार से लिंक कराए जाने की मांग भी की है। कृष्ण प्रताप साहनी के मुताबिक एक फार्मासिस्ट को केवल एक ही मेडिकल स्टोर के लिए लाइसेंस जारी किए जाने का प्रावधान है। तीन साल पहले जांच में पाया गया था कि एक फार्मासिस्ट के नाम कई जिलों में मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जारी किया गया है।
इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए शासन की ओर से फरवरी 2018 में फार्मासिस्टों की डिग्री को आधार से लिंक करने का निर्णय लिया गया था। उनका कहना है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से नए मेडिकल स्टोर को तो ऑनलाइन लाइसेंस जारी किया जा रहा है लेकिन जहां फर्जीवाड़ा हुआ है उस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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यह आरोप है बेरोजगार फार्मासिस्ट उत्थान सेवा संस्थान के जिलाध्यक्ष कृष्ण प्रताप साहनी का। उन्होंने सभी फार्मासिस्टों की डिग्री आधार से लिंक कराए जाने की मांग भी की है। कृष्ण प्रताप साहनी के मुताबिक एक फार्मासिस्ट को केवल एक ही मेडिकल स्टोर के लिए लाइसेंस जारी किए जाने का प्रावधान है। तीन साल पहले जांच में पाया गया था कि एक फार्मासिस्ट के नाम कई जिलों में मेडिकल स्टोर का लाइसेंस जारी किया गया है।
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इस फर्जीवाड़े को रोकने के लिए शासन की ओर से फरवरी 2018 में फार्मासिस्टों की डिग्री को आधार से लिंक करने का निर्णय लिया गया था। उनका कहना है कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से नए मेडिकल स्टोर को तो ऑनलाइन लाइसेंस जारी किया जा रहा है लेकिन जहां फर्जीवाड़ा हुआ है उस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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आरोप है कि जिले में छह सौ मेडिकल स्टोर अभी भी चल रहे हैं, जिनका न तो लाइसेंस ऑनलाइन किया गया है और न ही इनके फार्मासिस्टों की डिग्री आधार से लिंक की गई। यदि कार्रवाई हो तो एक ही फार्मासिस्ट की डिग्री पर कई मेडिकल स्टोर चलते हुए पाए जाएंगे। कई फार्मासिस्टों की डिग्री से दूसरे जिलों में भी मेडिकल स्टोर के लाइसेंस जारी मिलेंगे।
बताते हैं कि नियमानुसार जिस फार्मासिस्ट के नाम लाइसेंस जारी है, उसका मेडिकल स्टोर पर रहना अनिवार्य है, लेकिन यह व्यवस्था लागू नहीं हो रही। यही कारण है कि मेडिकल स्टोरों पर अप्रशिक्षित लोग दवाएं देते हैं, जो मरीजों की जीवन से खिलवाड़ है। उन्होंने बेरोजगार फार्मासिस्ट सेवा संस्थान की ओर से सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन को पत्र भेज कर यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू कराने की मांग की है।
क्या कहते हैं जिला औषधि निरीक्षक
जिला औषधि निरीक्षक जय सिंह ने बताया कि मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस ऑनलाइन किए जाने की प्रक्रिया जारी है। जिन मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस 2017 से पहले यानी ऑफलाइन जारी किए गए थे, उन सबको भी 2022 से पहले रिन्युअल कराने के लिए ऑनलाइन ही आवेदन करना होगा। फार्मासिस्टों की डिग्री भी आधार से जोड़ने का काम भी लगातार जारी है।
बताते हैं कि नियमानुसार जिस फार्मासिस्ट के नाम लाइसेंस जारी है, उसका मेडिकल स्टोर पर रहना अनिवार्य है, लेकिन यह व्यवस्था लागू नहीं हो रही। यही कारण है कि मेडिकल स्टोरों पर अप्रशिक्षित लोग दवाएं देते हैं, जो मरीजों की जीवन से खिलवाड़ है। उन्होंने बेरोजगार फार्मासिस्ट सेवा संस्थान की ओर से सहायक आयुक्त खाद्य एवं औषधि प्रशासन को पत्र भेज कर यह व्यवस्था पूरी तरह से लागू कराने की मांग की है।
क्या कहते हैं जिला औषधि निरीक्षक
जिला औषधि निरीक्षक जय सिंह ने बताया कि मेडिकल स्टोरों के लाइसेंस ऑनलाइन किए जाने की प्रक्रिया जारी है। जिन मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस 2017 से पहले यानी ऑफलाइन जारी किए गए थे, उन सबको भी 2022 से पहले रिन्युअल कराने के लिए ऑनलाइन ही आवेदन करना होगा। फार्मासिस्टों की डिग्री भी आधार से जोड़ने का काम भी लगातार जारी है।