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Gorakhpur News: अब नगर निगम नहीं पकड़ेगा बंदर, वन विभाग को मिला जिम्मा
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- एक साल से शहर में उत्पात मचाने वाले बंदरों को पकड़ रहा था नगर निगम
- कोर्ट के आदेश के बाद अब वन विभाग को मिली जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शासन के ताजा निर्देशों के बाद नगर निगम ने शहर में बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई रोक दी है। इसके साथ ही निगम की ओर से नियुक्त एजेंसी को भी यह काम करने से मना कर दिया गया है। अब बंदरों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने की पूरी जिम्मेदारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सौंप दी गई है। दरअसल, पिछले वर्ष बंदरों की बढ़ती संख्या और उनसे हो रही घटनाओं के चलते नगर निगम ने यह जिम्मेदारी अपने हाथ में ली थी।
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के निर्देश पर निगम ने कई इलाकों में अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ा था। उस दौरान शहर के कुछ हिस्सों में हालात सुधरे और लोगों को राहत मिली। बंदरों के हमले, घरों में घुसकर तोड़फोड़ और बच्चों-बुजुर्गों के घायल होने की शिकायतों में भी कमी आई थी। हालांकि, इससे पहले यह कार्य वन विभाग के जिम्मे था, लेकिन लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण समस्या विकराल हो गई थी।
नगर निगम और वन विभाग के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर असमंजस भी सामने आता रहा, जिससे आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ी। अब शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वन्यजीवों से जुड़े मामलों को विशेषज्ञता के साथ वन विभाग ही संभालेगा।
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प्रदेश सरकार के विशेष सचिव ने प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को एक महीने के भीतर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने बताया कि शासन के आदेश के बाद नगर निगम अब बंदर पकड़ने का कार्य नहीं करेगा।
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- कोर्ट के आदेश के बाद अब वन विभाग को मिली जिम्मेदारी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शासन के ताजा निर्देशों के बाद नगर निगम ने शहर में बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई रोक दी है। इसके साथ ही निगम की ओर से नियुक्त एजेंसी को भी यह काम करने से मना कर दिया गया है। अब बंदरों को पकड़ने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर छोड़ने की पूरी जिम्मेदारी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सौंप दी गई है। दरअसल, पिछले वर्ष बंदरों की बढ़ती संख्या और उनसे हो रही घटनाओं के चलते नगर निगम ने यह जिम्मेदारी अपने हाथ में ली थी।
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के निर्देश पर निगम ने कई इलाकों में अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ा था। उस दौरान शहर के कुछ हिस्सों में हालात सुधरे और लोगों को राहत मिली। बंदरों के हमले, घरों में घुसकर तोड़फोड़ और बच्चों-बुजुर्गों के घायल होने की शिकायतों में भी कमी आई थी। हालांकि, इससे पहले यह कार्य वन विभाग के जिम्मे था, लेकिन लंबे समय तक प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण समस्या विकराल हो गई थी।
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नगर निगम और वन विभाग के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर असमंजस भी सामने आता रहा, जिससे आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ी। अब शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वन्यजीवों से जुड़े मामलों को विशेषज्ञता के साथ वन विभाग ही संभालेगा।
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प्रदेश सरकार के विशेष सचिव ने प्रमुख सचिव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को एक महीने के भीतर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने बताया कि शासन के आदेश के बाद नगर निगम अब बंदर पकड़ने का कार्य नहीं करेगा।