इस बार तीन कैटेगरी के आधार पर होगी स्वच्छ सर्वेक्षण रैंकिंग, जारी की गई नई गाइडलाइन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में शहरों की रैंकिंग तीन कैटेगरी के आधार पर तय होगी। वहीं डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन को हटाते हुए इसे पब्लिक फीडबैक से जोड़ दिया गया है। यानी सर्वे के लिए आने वाली टीमें आम लोगों से चर्चा करके उनके फीडबैक के आधार पर ही तय करेंगी कि शहर धूल मुक्त और कचरा मुक्त है या नहीं। साथ ही शहर के विभिन्न क्षेत्रों में डस्टबिन के इंतजाम को भी जांचा जाएगा। स्वच्छ भारत मिशन 2021 के तहत जारी सरकार की नई गाइडलाइन में कई तरह के बदलाव करने के साथ ही पारदर्शिता पर पूरा जोर दिया गया है।
ये हैं नई कैटेगरी
- सिटीजन वॉयस (1800 अंक)- फीडबैक, इंगेजमेंट, एक्सपीरिएंस, स्वच्छता एप और इनोवेशन
- सर्विस लेवल प्रोग्राम (2400 अंक)- कूड़े को अलग-अलग करना, कूड़ा निस्तारण और सैनिटाइजेशन
- सर्टिफिकेशन (1800 अंक)- कूड़ा मुक्त शहर, ओडीएफ और जलापूर्ति
किस कैटेगरी के लिए कितने अंक
- 100 अंक स्वच्छता में इनोवेशन के हैं।
- 350 अंक स्वच्छता एप के। ऐप के जरिये आने वाली शिकायतों के निराकरण पर भी यह तय किए जाएंगे।
- 300 अंक सिटीजन अनुभव के हैं। ऑब्जरवेशन चर्चा के आधार पर किया जाएगा।
- 450 अंक सिटीजन वॉइस के हैं। सफाई में लोगों के जुड़ाव के आधार पर तय किए जाएंगे।
- 600 अंक सिटीजन फीडबैक के हैं। इसमें लोगों से सवाल पूछे जाएंगे और उसके बाद में उनके जवाबों के आधार पर इन अंको का निर्धारण
सिटीजन वॉइस के 1800 अंक मिलेंगे
पिछले सर्वे में 1500 अंक डायरेक्ट ऑब्जरवेशन के थे और इतने ही पब्लिक फीडबैक के यानी कि कुल 6000 अंकों के सर्वे में 50 फीसदी अंक इन दोनों कैटेगरी के थे, लेकिन इसमें कई जगह दोहराव था। इस बार इन दोनों को जोड़कर एक कैटेगरी बनाई गई है।
इस कैटेगरी का नाम है सिटीजन वॉइस। 6000 अंकों के सर्वे में इसके लिए इस बार 1800 अंक तय किए गए हैं। पहले कई शहर अक्सर इसमें गड़बड़ी किया करते थे। ऐसे में इस बार इस व्यवस्था के तहत ज्यादा पारदर्शिता होगी और गड़बड़ी की आशंका कम रहेगी।
अपर नगर आयुक्त एवं प्रभारी स्वच्छ सर्वेक्षण डीके सिन्हा ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए अन्य गतिविधियां सुचारू रूप से चल रहीं हैं। नगर निगम अपने स्तर पर इस बार भी बेहतर करने की कोशिश में लगा हुआ है। इस बार स्वच्छ भारत मिशन में पहली बार राज्यों और शहरों को मेडल मिलेंगे। सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले को प्लेटिनम मेडल मिलेगा।