Gorakhpur News: अब एनसीआर नहीं मजबूरी...उद्यमियों को भा रही गीडा में सस्ती जमीन और मजदूरी
गीडा सीईओ अनुज मलिक ने कहा कि गीडा में नए-नए उद्योग आ रहे हैं। कई बड़ी कंपनियों से भी निवेश के लिए वार्ता की जा रही है। 18 बड़ी कंपनियों को गीडा के स्थापना दिवस समारोह में आने का न्यौता भेजा गया है, जिसमें से अधिकांश ने आने की सहमति दी है। उनकी मुख्यमंत्री के साथ बैठक भी प्रस्तावित है। माहौल सकारात्मक है, उम्मीद है कि जल्दी ही कुछ बड़े निवेशक भी गीडा आएंगे।
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गोरखपुर तेजी से उद्योगों का हब बन रहा है। कंपनियों को भी यहां का माहौल रास आने लगा है। सुरक्षा के साथ अब उन्हें वे सारे संसाधन मिल रहे हैं, जो उद्योग लगाने के लिए जरूरी हैं। मसलन, एनसीआर से चार गुना सस्ती जमीनें और कारीगर व मजदूर सबकी उपलब्धता है, वह भी कम मूल्य पर। उत्पाद को बेचने के लिए बिहार समेत पूर्वोत्तर भारत और पड़ोसी देश नेपाल तक का बाजार भी नजदीक में ही मौजूद है। ऐसे में उद्योग के लिए निवेश करने वाली कंपनियों की तलाश गोरखपुर के गीडा आकर पूरी हो रही है। यह बदलते गोरखपुर की तस्वीर है, जो बताती है कि उद्योगपति कभी गोरखपुर के बारे में सोचते भी नहीं थे, वे अब यहां उद्योग लगाने के लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं।
नब्बे के दशक में प्रदेश सरकार ने गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) का गठन कर यहां उद्योगों की स्थापना के लिए प्रयास शुरू किया था। करीब 13 हजार एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस औद्योगिक एरिया में शुरुआत में कम ही उद्योगों की स्थापना हुई थी। लेकिन बीते पांच साल से अचानक गीडा में उद्योग लगाने वालों की संख्या में तेजी से वृद्धि होने लगी है। उद्यमियों के सकारात्मक रुख के पीछे प्रदेश सरकार का प्रयास तो है ही, जो एक बात उन्हें सबसे अधिक प्रभावित कर रहा है, वह है यहां जमीनों की पर्याप्त मात्रा व उसकी कम मूल्य में उपलब्धता।
आसानी से जमीन मिलने और मूलभूत सुविधाओं में सुधार ने उद्यमियों को यहां उद्योग लगाने के लिए प्रेरित किया है। उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना कि पहले पूर्वांचल में केवल उपभोक्ता हुआ करते थे, उत्पादन शून्य था। जबकि यहां से बिहार, पश्चिम बंगाल, असम आदि प्रदेशों में तैयार माल भेजना दिल्ली-मुंबई से ज्यादा आसान व सस्ता है। शायद इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए गीडा की स्थापना भी हुई होगी।
आने वाले कुछ वर्षों में बदल जाएगा माहौल
गीडा के एसडीएम अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि प्रशासन लिंक एक्सप्रेसवे और धुरियापार में औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए जमीन अधिग्रहित कर रहा है। दिल्ली-मुंबई से काफी सस्ते मूल्य में यहां जमीन उपलब्ध होगी। कई बड़े उद्यमियों से बातचीत हो रही है। उनमें से अगर तीन-चार ने भी यहां अपना उद्योग स्थापित कर दिया तो आने वाले समय में यह इलाका पूरी तरह से बदल जाएगा। गीडा के स्थापना दिवस पर इसी को ध्यान में रखते हुए 18 बड़े निवेशकों के साथ मुख्यमंत्री की बैठक होनी है। इन निवेशकों को गीडा के अधिग्रहित क्षेत्र में जमीनों की उपलब्धता दिखाने की भी योजना है।
बोले उद्यमी
हमारी उत्तराखंड में प्लाई बोर्ड की फैक्टरी है। अब प्लास्टिक की नई फैक्टरी गीडा में लगाने जा रहा हूं। यहां जमीन, कारीगर व मजदूर अन्य औद्योगिक शहरों की अपेक्षा कम रेट में उपलब्ध हैं। मूलभूत सुविधाएं बढ़ी हैं। आवागमन के साधन बेहतर होने के चलते यहां से माल दूसरी जगह भेजना आसान है।- विनय अग्रवाल, उद्यमी
दिल्ली-मुंबई में फैक्टरी लगाने के लिए जमीन खरीदना काफी महंगा और मुश्किल काम है। प्रदूषण और जाम की समस्या के अलावा तैयार माल को वहां से बाजार भेजना भी महंगा पड़ता है, जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जा रही है। इसके सापेक्ष गीडा में उद्योग लगाने पर ये सब दिक्कतें नहीं आएंगी।- गुफरान अहमद-उद्यमी
गीडा में अलग-अलग प्रकार के उद्योग स्थापित कराए जा रहे हैं। इस इलाके में जितनी सस्ती जमीन व मजदूरी है, उतना ही बड़ा बाजार भी है। बड़ी कंपनियां यहां जितना खर्च कर माल भेजने व उसके लिए गोदाम बनाने में खर्च कर रही हैं, उसमें थोड़ी पूंजी और बढ़ाकर यहीं उत्पादन करना शुरू कर देंगी। इससे उन्हें भी फायदा होगा और आम लोगों को भी।- रमाशंकर शुक्ल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ गारमेंट्स गोरखपुर।
गीडा सीईओ अनुज मलिक ने कहा कि गीडा में नए-नए उद्योग आ रहे हैं। कई बड़ी कंपनियों से भी निवेश के लिए वार्ता की जा रही है। 18 बड़ी कंपनियों को गीडा के स्थापना दिवस समारोह में आने का न्यौता भेजा गया है, जिसमें से अधिकांश ने आने की सहमति दी है। उनकी मुख्यमंत्री के साथ बैठक भी प्रस्तावित है। माहौल सकारात्मक है, उम्मीद है कि जल्दी ही कुछ बड़े निवेशक भी गीडा आएंगे।