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एमएमएमयूटी: अब ड्रोन बनाने और उसे उड़ाने में पारंगत होंगे छात्र, जानिए कैसे
Wed, 11 Aug 2021 01:49 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 11 Aug 2021 01:49 PM IST
सार
लैब का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जे पी पांडेय ने किया। उद्घाटन के साथ ही पांच दिवसीय ड्रोन असेंबलिंग एवं उड़ान प्रशिक्षण कार्यक्रम भी पूर्ण हुआ।
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- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
अब मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर के छात्र ड्रोन कैमरा को बनाने और उसे उड़ाने में पारंगत होंगे। विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग में 'ड्रोन लैब' स्थापित कर दिया गया है।
लैब का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जे पी पांडेय ने किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से एक शोध परियोजना चलाई जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत स्थानीय युवकों को विभिन्न टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित करना था।
ड्रोन लैब के उद्घाटन के साथ ही पांच दिवसीय ड्रोन असेंबलिंग एवं उड़ान प्रशिक्षण कार्यक्रम भी पूर्ण हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जे पी पाण्डेय ने छात्र-छात्राओं द्वारा निर्मित ड्रोन का अवलोकन किया। कुलपति की उपस्थिति में छात्र-छात्राओं ने अपने द्वारा निर्मित ड्रोन को उड़ा कर प्रदर्शित भी किया।
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छात्रों का आह्वान करते हुए कुलपति प्रो पाण्डेय ने कहा कि वे नवीनतम टेक्नोलॉजी खासकर ड्रोन टेक्नोलॉजी के बारे में ज्यादा से ज्यादा सीखने की ललक पैदा करें और आमजन की भलाई के लिए विभिन्न प्रकार के ड्रोन विकसित करने हेतु कार्य करें। उन्होंने कहा कि ड्रोन एक ऐसी तकनीक है जिससे कम खर्च, कम लागत, और कम मेहनत में बहुत सारे काम किए जा सकते हैं।
उन्होंने छात्रों से अपना स्टार्ट-अप शुरू करने का भी आह्वान किया जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस अवसर पर ड्रोन प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक प्रो एस के सोनी ने विभाग में 'ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सलेन्स' एवं 'आई ओ टी सेंटर ऑफ एक्सलेन्स' बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा।
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लैब का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जे पी पांडेय ने किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग द्वारा भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से एक शोध परियोजना चलाई जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत स्थानीय युवकों को विभिन्न टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षित करना था।
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ड्रोन लैब के उद्घाटन के साथ ही पांच दिवसीय ड्रोन असेंबलिंग एवं उड़ान प्रशिक्षण कार्यक्रम भी पूर्ण हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो जे पी पाण्डेय ने छात्र-छात्राओं द्वारा निर्मित ड्रोन का अवलोकन किया। कुलपति की उपस्थिति में छात्र-छात्राओं ने अपने द्वारा निर्मित ड्रोन को उड़ा कर प्रदर्शित भी किया।
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छात्रों का आह्वान करते हुए कुलपति प्रो पाण्डेय ने कहा कि वे नवीनतम टेक्नोलॉजी खासकर ड्रोन टेक्नोलॉजी के बारे में ज्यादा से ज्यादा सीखने की ललक पैदा करें और आमजन की भलाई के लिए विभिन्न प्रकार के ड्रोन विकसित करने हेतु कार्य करें। उन्होंने कहा कि ड्रोन एक ऐसी तकनीक है जिससे कम खर्च, कम लागत, और कम मेहनत में बहुत सारे काम किए जा सकते हैं।
उन्होंने छात्रों से अपना स्टार्ट-अप शुरू करने का भी आह्वान किया जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इस अवसर पर ड्रोन प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक प्रो एस के सोनी ने विभाग में 'ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सलेन्स' एवं 'आई ओ टी सेंटर ऑफ एक्सलेन्स' बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा।