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अब 130 किमी की गति से दौड़ सकेंगी ट्रेनें, इस तकनीक का लिया जा रहा सहारा

Fri, 16 Oct 2020 07:50 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 16 Oct 2020 07:50 PM IST
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Northeast Railway use double distent signal from Train speed in Chhapra to Barabanki
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : PTI

रेल गाड़ियां 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकें, इसके लिए रेलवे डबल डिस्टेंट सिग्नल तकनीक का सहारा ले रहा है। अभी अधिकतम 110 से 115 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से रेल गाड़ियां चल रही हैं। वह भी वैशाली और नाहरलागुन एक्सप्रेस जैसी गिनी-चुनी ट्रेनें ही इस गति से चल पाती हैं। डबल डिस्टेंट सिग्नल के बाद वंदेभारत और राजधानी एक्सप्रेस जैसी रेल गाड़ियों को चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि हादसे की भी गुंजाइश न के बराबर रहेगी।

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पूर्वोत्तर रेलवे में छपरा से गोरखपुर होकर बाराबंकी तक डबल डिस्टेंट सिग्नल लगाने के लिए केबल बिछाने और तकनीक को दुरुस्त करने के लिए एजेंसी तय कर दी गई है। जल्द काम शुरू हो जाएगा। अभी एक सिग्नल होने से चालक गति को नियंत्रित करके रेलगाड़ी चलाते हैं। इस कारण ज्यादातर ट्रेनें पूरी गति से नहीं चल पाती हैं।
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दो होम सिग्नल के सक्रिय होने से ड्राइवर पहले से ही सतर्क रहेंगे। एक-एक किलोमीटर की दूरी पर ये सिग्नल लगेंगे। पहला सिग्नल बताएगा कि आगे का रास्ता क्लियर है या व्यस्त है। दूसरा सिग्नल आने वाले स्टेशन की जानकारी देगा। सिग्नल के मुताबिक ड्राइवर ट्रेन को चलाएंगे।
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आउटर पर बेवजह खड़ी नहीं होंगी ट्रेनें

डबल डिस्टेंट सिग्नल स्टेशन यार्ड के बाहर लगे डिस्टेंस सिग्नल से पहले लगा होगा। इसमें सिर्फ लाल और पीली बत्ती होगी। यह सिग्नल लोको पायलट को ट्रेन की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए अलर्ट करेगा। हरी लाइट का मतलब होगा ट्रेन उसी गति से स्टेशन पर जा सकती है। पीली लाइट का मतलब होगा, लोको पायलट ट्रेन की रफ्तार को नियंत्रित कर ले। रेलवे के अनुसार इससे ट्रेनों के बिना वजह आउटर पर खड़े रहने की समस्या से छुटकारा मिलेगा।

बढ़ाई जा रही है पटरियों की क्षमता
पूर्वोत्तर रेलवे के रूट पर ट्रेनों की रफ्तार 110-160 किमी प्रति घंटे तक होगी। इन ट्रेनों के संचालन के लिए बाराबंकी से छपरा (425 किमी) तक पटरियों की क्षमता बढ़ाने का काम चल रहा है। मौजूदा पटरियों और उसके स्लीपर को बदला जा रहा है। अभी जो पटरियां लगी हैं उनका वजन 52 किलो प्रति मीटर होता है।

इसकी जगह 60 किलो प्रति मीटर वजन की पटरियां बिछाईं जा रही हैं। कोविड संक्रमण काल में जब ट्रेनें नहीं चल रही थीं तो यह काम तेजी से किया गया। नई पटरियों के वजन सहने की क्षमता ज्यादा होगी। इनमें फ्रैक्चर की आशंका न के बराबर होगी। पटरियों के नीचे से पत्थर हट जाएं या गैप हो जाने पर भी पटरियां टेढ़ी नहीं होंगी। पटरियों के बीच के गैप को खत्म करने के लिए इनकी लंबाई बढ़ाई जा रही है।

सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि छपरा से बाराबंकी तक डबल डिस्टेंट सिग्नल लगाने के लिए बजट पहले से मंजूर है। कार्यदायी एजेंसियां तय कर दी गई हैं। संरक्षा की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। ट्रेनों की गति बढ़ जाएगी, जिससे समय पालन में सुधार होगा।




 
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