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Gorakhpur News: ट्रेन नहीं, अब स्टेशन के किचन से आपूर्ति होगा खाना-नाश्ता
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अगले महीने से लागू होने जा रही नई व्यवस्था
ट्रेनों का बनेगा क्लस्टर, एक एजेंसी उठाएगी पूरे रूट का जिम्मा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ट्रेनों में पेंट्रीकार तो होगी, लेकिन उसमें अब भोजन या नाश्ता नहीं बनेगा। अगले माह से जो नई व्यवस्था लागू होने जा रही है, उसके अनुसार एक क्लस्टर (एक रूट की 10 ट्रेन) की ट्रेनों को संबंधित एजेंसी अपने किचन से भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराएगी। इसके लिए एजेंसी नामित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एजेंसी को स्टेशन या उसके आसपास अपना किचन बनाना होगा।
ट्रेनों में पेंट्रीकार होती है, जहां से भोजन-नाश्ता रेल यात्रियों को उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि खाने की गुणवत्ता समेत कई अन्य कारणों को लेकर यात्रियों की शिकायत भी रहती है। इसके अलावा पेंट्रीकार से हादसे की भी आशंका रहती है। कई घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने आईआरसीटीसी को व्यवस्था में बदलाव का निर्देश दिया है।
इस नई व्यवस्था के तहत अब ट्रेनों के पेंट्रीकार में केवल आपातकालीन स्थिति में चाय, पानी और दूध गर्म होंगे। इसकी जगह रेलवे स्टेशनों के आसपास इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) कलस्टर पर पेंट्रीकार को संचालित करने की तैयारी में है। यह कलस्टर ठेके पर दिए जाएंगे। एक कलस्टर में एक रूट की करीब 10 ट्रेनों को शामिल किया जाएगा। इससे एजेंसी को बड़ा किचन संचालित करना होगा। एक रूट पर चलने वाली ट्रेनों में एक तरह का ही गुणवत्ता वाला नाश्ता और भोजन मिलेगा।
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यात्रियों को मिलेगा फायदा
आईआरसीटीसी के विकास गुप्ता बताते हैं कि नई व्यवस्था लागू होने पर सभी ट्रेनों में जांच परख कर भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराया जाएगा। अभी जिन ट्रेनों में पेंट्रीकार नहीं है, उसमें बाहरी वेंडरों की भरमार होती है। पंजीकृत की आड़ में नकली वेंडर भी घुसे रहते हैं। वहीं जिन ट्रेनों में पेंट्रीकार नहीं है, उसमें भोजन व नाश्ता के लिए यात्रियों को मनमानी पैसा खर्च करना पड़ता है। इस व्यवस्था के तहत अब सभी ट्रेनों को एक समान रूप से भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा अगर खराब खाने की वजह से कोई बीमार होता है तो उसके लिए संबंधित एजेंसी को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की जद में लाया जा सकता है।
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ट्रेनों का बनेगा क्लस्टर, एक एजेंसी उठाएगी पूरे रूट का जिम्मा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ट्रेनों में पेंट्रीकार तो होगी, लेकिन उसमें अब भोजन या नाश्ता नहीं बनेगा। अगले माह से जो नई व्यवस्था लागू होने जा रही है, उसके अनुसार एक क्लस्टर (एक रूट की 10 ट्रेन) की ट्रेनों को संबंधित एजेंसी अपने किचन से भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराएगी। इसके लिए एजेंसी नामित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। एजेंसी को स्टेशन या उसके आसपास अपना किचन बनाना होगा।
ट्रेनों में पेंट्रीकार होती है, जहां से भोजन-नाश्ता रेल यात्रियों को उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि खाने की गुणवत्ता समेत कई अन्य कारणों को लेकर यात्रियों की शिकायत भी रहती है। इसके अलावा पेंट्रीकार से हादसे की भी आशंका रहती है। कई घटनाएं भी हो चुकी हैं। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड ने आईआरसीटीसी को व्यवस्था में बदलाव का निर्देश दिया है।
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इस नई व्यवस्था के तहत अब ट्रेनों के पेंट्रीकार में केवल आपातकालीन स्थिति में चाय, पानी और दूध गर्म होंगे। इसकी जगह रेलवे स्टेशनों के आसपास इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) कलस्टर पर पेंट्रीकार को संचालित करने की तैयारी में है। यह कलस्टर ठेके पर दिए जाएंगे। एक कलस्टर में एक रूट की करीब 10 ट्रेनों को शामिल किया जाएगा। इससे एजेंसी को बड़ा किचन संचालित करना होगा। एक रूट पर चलने वाली ट्रेनों में एक तरह का ही गुणवत्ता वाला नाश्ता और भोजन मिलेगा।
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यात्रियों को मिलेगा फायदा
आईआरसीटीसी के विकास गुप्ता बताते हैं कि नई व्यवस्था लागू होने पर सभी ट्रेनों में जांच परख कर भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराया जाएगा। अभी जिन ट्रेनों में पेंट्रीकार नहीं है, उसमें बाहरी वेंडरों की भरमार होती है। पंजीकृत की आड़ में नकली वेंडर भी घुसे रहते हैं। वहीं जिन ट्रेनों में पेंट्रीकार नहीं है, उसमें भोजन व नाश्ता के लिए यात्रियों को मनमानी पैसा खर्च करना पड़ता है। इस व्यवस्था के तहत अब सभी ट्रेनों को एक समान रूप से भोजन व नाश्ता उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा अगर खराब खाने की वजह से कोई बीमार होता है तो उसके लिए संबंधित एजेंसी को भी जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की जद में लाया जा सकता है।