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Gorakhpur News: मोर्चरी में एक साल से लाइट नहीं, डीप फ्रीजर भी खराब
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मुर्दों का ख्याल नही रखता मेडिकल कॉलेज
मोबाइल की रोशनी से कर्मचारी खोजते हैं शव
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन मुर्दों का ख्याल नहीं रखता है। ट्रामा सेंटर के सामने स्थित मोर्चरी में तीन साल से डीप फ्रीजर खराब पड़ा है, वहीं एक साल से यहां की लाइट कटी है। अंधेरे कमरों में प्रतिदिन 10 से 12 शव रखे जाते हैं, जिन्हें रखने और खोजने के लिए कर्मचारियों को मोबाइल का रोशनी जलानी पड़ती है। डीप फ्रीजर न होने से शवों की दुर्गंध लोगों को परेशान करती है।
बृहस्पतिवार को भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मोर्चरी में जाने पर तेज दुर्गंध आ रही थी। एक कर्मचारी से इसका कारण पूछने पर पता चला कि वहां 17 शव रखे गए हैं। इसमें 13 शव अलग रखे गए हैं। जबकि चार अज्ञात शवों को मोर्चरी के एक अलग कमरे में रखा गया था। कर्मचारी का कहना था कि अज्ञात शव का 72 घंटे तक पोस्टमार्टम नहीं होता है। यहां डीप फ्रीजर न होने की वजह से इन शवों से दुर्गंध उठने लगती है। इसलिए इन्हें अंदर ले जाकर अलग कमरों में रखा जाता है। मेडिकल कॉलेज में छह डीप फ्रीजर वर्षों से खराब हैं, जिसमें छह शव रखे जाने की क्षमता है।
जिला अस्पताल की मोर्चरी में केवल तीन से चार शव रखने की जगह है। इसलिए जिले के हर थाना क्षेत्र से अधिकतर शव मेडिकल कॉलेज के मोर्चरी में आते हैं। इसमें हत्या, दुर्घटना, संदिग्ध मौत समेत अन्य मामलों में कब्जे में लिए गए शव को भेजा जाता है। ताकि पोस्टमार्टम से इनकी मौत का कारण स्पष्ट किया जा सके, लेकिन मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखे शव पहले ही काफी खराब हो जाते हैं, जिससे पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी इसका सीधा असर पड़ता है।
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अज्ञात शवों के पास रहते हैं चूहे
सूत्रों की मानें तो इधर कई मामले में परिजनों ने शिकायत की है कि शव का नाक, कान गायब है। मोर्चरी के आस-पास झाड़ झंखाड़ चारों तरफ फैली हुई है। कई वर्ष से यहां साफ सफाई भी नहीं हुई है। इस कारण चूहों का भी वहां खूब आतंक है। आए दिन चूहों द्वारा शव के अंगों को कुतरने का मामला सामने आता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल प्रशासन मोर्चरी की जिम्मेदारी एक दूसरे पर थोपते हैं, इस कारण कई वर्ष से यहां कोई काम नहीं हो पाया, इसकी वजह से मोर्चरी में आने वाले शवों की दुर्गति हो रही है।
डीप फ्रीजर नहीं होने पर शव के पोस्टमार्टम के समय इंजरी सही रूप से स्पष्ट नहीं हो पाती है। जिसकी वजह से मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता है। शव को डीप फ्रीजर में रखना बेहद जरूरी है। खास तौर से गर्मी के दिनों में करीब 15 घंटे के बाद स्किन सड़नी शुरू हो जाती है। बॉडी के आर्गन खराब हो जाते हैं। इसलिए कई मामलों में सही जांच और तथ्य नहीं मिल पाते हैं, मजबूरी में विसरा सुरक्षित करना पड़ता है।
- डॉ. अभिषेक जीना, सर्जरी विभाग
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मोबाइल की रोशनी से कर्मचारी खोजते हैं शव
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन मुर्दों का ख्याल नहीं रखता है। ट्रामा सेंटर के सामने स्थित मोर्चरी में तीन साल से डीप फ्रीजर खराब पड़ा है, वहीं एक साल से यहां की लाइट कटी है। अंधेरे कमरों में प्रतिदिन 10 से 12 शव रखे जाते हैं, जिन्हें रखने और खोजने के लिए कर्मचारियों को मोबाइल का रोशनी जलानी पड़ती है। डीप फ्रीजर न होने से शवों की दुर्गंध लोगों को परेशान करती है।
बृहस्पतिवार को भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मोर्चरी में जाने पर तेज दुर्गंध आ रही थी। एक कर्मचारी से इसका कारण पूछने पर पता चला कि वहां 17 शव रखे गए हैं। इसमें 13 शव अलग रखे गए हैं। जबकि चार अज्ञात शवों को मोर्चरी के एक अलग कमरे में रखा गया था। कर्मचारी का कहना था कि अज्ञात शव का 72 घंटे तक पोस्टमार्टम नहीं होता है। यहां डीप फ्रीजर न होने की वजह से इन शवों से दुर्गंध उठने लगती है। इसलिए इन्हें अंदर ले जाकर अलग कमरों में रखा जाता है। मेडिकल कॉलेज में छह डीप फ्रीजर वर्षों से खराब हैं, जिसमें छह शव रखे जाने की क्षमता है।
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जिला अस्पताल की मोर्चरी में केवल तीन से चार शव रखने की जगह है। इसलिए जिले के हर थाना क्षेत्र से अधिकतर शव मेडिकल कॉलेज के मोर्चरी में आते हैं। इसमें हत्या, दुर्घटना, संदिग्ध मौत समेत अन्य मामलों में कब्जे में लिए गए शव को भेजा जाता है। ताकि पोस्टमार्टम से इनकी मौत का कारण स्पष्ट किया जा सके, लेकिन मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखे शव पहले ही काफी खराब हो जाते हैं, जिससे पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी इसका सीधा असर पड़ता है।
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अज्ञात शवों के पास रहते हैं चूहे
सूत्रों की मानें तो इधर कई मामले में परिजनों ने शिकायत की है कि शव का नाक, कान गायब है। मोर्चरी के आस-पास झाड़ झंखाड़ चारों तरफ फैली हुई है। कई वर्ष से यहां साफ सफाई भी नहीं हुई है। इस कारण चूहों का भी वहां खूब आतंक है। आए दिन चूहों द्वारा शव के अंगों को कुतरने का मामला सामने आता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल प्रशासन मोर्चरी की जिम्मेदारी एक दूसरे पर थोपते हैं, इस कारण कई वर्ष से यहां कोई काम नहीं हो पाया, इसकी वजह से मोर्चरी में आने वाले शवों की दुर्गति हो रही है।
डीप फ्रीजर नहीं होने पर शव के पोस्टमार्टम के समय इंजरी सही रूप से स्पष्ट नहीं हो पाती है। जिसकी वजह से मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता है। शव को डीप फ्रीजर में रखना बेहद जरूरी है। खास तौर से गर्मी के दिनों में करीब 15 घंटे के बाद स्किन सड़नी शुरू हो जाती है। बॉडी के आर्गन खराब हो जाते हैं। इसलिए कई मामलों में सही जांच और तथ्य नहीं मिल पाते हैं, मजबूरी में विसरा सुरक्षित करना पड़ता है।
- डॉ. अभिषेक जीना, सर्जरी विभाग