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नगर निगम ने बदला नियम: तकरार नहीं, पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते रखिए वरना लाडले के जन्मप्रमाण पत्र को तरस जाएंगे
Sun, 08 Oct 2023 07:10 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Updated Sun, 08 Oct 2023 07:10 AM IST
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गोरखपुर नगर निगम।
- फोटो : amar ujala
गोरखपुर में मोहल्ले में पड़ोसियों से रार-तकरार महंगी पड़ सकती है। यदि पड़ोसियों से संबंध अच्छे नहीं हैं तो आपके लाडले का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में मुश्किलें आ सकती हैं। शासन ने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के नियमों में बदलाव किया है। पड़ोसियों की गवाही के साथ आधार कॉर्ड भी मांगा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शासन के निर्देश पर कार्रवाई की जा रही है।
शासन की ओर से जन्म और मृत्य प्रमाणपत्र बनवाने के नियमों में बदलाव किया गया है। अब प्रमाण पत्र एसडीएम की ओर से कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) पर प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। इसका नया प्रारूप भी जारी हुआ है। नगर निगम जोन कार्यालयों से फाॅर्म लेकर आवेदन किया जा सकेगा। आवेदनों की जांच करने का अधिकार एसडीएम को दिया गया है। एसडीएम इसकी जांच नगर निगम के कर्मचारियों, लेखपाल या पुलिस से कराएंगे। इसका निर्णय एसडीएम के विवेक पर होगा।
शहर में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन करने पर नगर निगम के सफाई सुपरवाइजर मोहल्लों में पहुंचते हैं। वे आवेदक के बारे में जानकारी लेकर इंस्पेक्टर को रिपोर्ट देेते हैं। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ती है। नगर निगम के जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों ने बताया कि 21 दिन के भीतर प्रमाणपत्र के लिए हॉस्पिटल की रिपोर्ट और आधार कार्ड के आधार पर जारी किया जाएगा। 21 दिन या उससे अधिक एक साल तक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सीएमओ के नाम से 10 रुपये के स्टांप पेपर नोटरी बनवानी होगी। एक साल से अधिक समय गुजरने पर प्रमाण पत्र बनने में पेंच फसेंगे।
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पड़ोसी ने नहीं दी गवाही तो फंस जाएगा मामला
एक साल से अधिक समय बीतने पर जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने पर मुश्किल होगी। आवेदन की जांच एसडीएम की ओर से लेखपाल या नगर निगम कर्मचारी को सौंपी जाएगी। ये कर्मचारी आवेदक के मोहल्ले में जाकर छानबीन करेंगे। इसके लिए कर्मचारी मोहल्ले में जाकर आवेदक के पड़ोसियों से जानकारी लेंगे। उनकी गवाही कराएंगे। इसमें पड़ोसी को यह बताना होगा कि आवेदक के घर बच्चा कहां, कब पैदा हुआ था। या उसके परिजन की मौत कैसे और कब हुई थी। यह बात बताने के साथ पड़ोसी को आधार कार्ड और हस्ताक्षर भी देने होंगे। यदि पड़ोसी ने गवाही के साथ आधार कार्ड की प्रति नहीं दी तो प्रमाणपत्र बनवाने में मुश्किल आएगी।
वर्जन
शासन की ओर जारी दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा। नगर निगम में आने वाले लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाएगा।
-गौरव सिंह सोंगरवाल, नगर आयुक्त
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शासन की ओर से जन्म और मृत्य प्रमाणपत्र बनवाने के नियमों में बदलाव किया गया है। अब प्रमाण पत्र एसडीएम की ओर से कंप्यूटरीकृत प्रबंधन प्रणाली (आरसीसीएमएस) पर प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे। इसका नया प्रारूप भी जारी हुआ है। नगर निगम जोन कार्यालयों से फाॅर्म लेकर आवेदन किया जा सकेगा। आवेदनों की जांच करने का अधिकार एसडीएम को दिया गया है। एसडीएम इसकी जांच नगर निगम के कर्मचारियों, लेखपाल या पुलिस से कराएंगे। इसका निर्णय एसडीएम के विवेक पर होगा।
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शहर में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन करने पर नगर निगम के सफाई सुपरवाइजर मोहल्लों में पहुंचते हैं। वे आवेदक के बारे में जानकारी लेकर इंस्पेक्टर को रिपोर्ट देेते हैं। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ती है। नगर निगम के जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों ने बताया कि 21 दिन के भीतर प्रमाणपत्र के लिए हॉस्पिटल की रिपोर्ट और आधार कार्ड के आधार पर जारी किया जाएगा। 21 दिन या उससे अधिक एक साल तक प्रमाण पत्र बनवाने के लिए सीएमओ के नाम से 10 रुपये के स्टांप पेपर नोटरी बनवानी होगी। एक साल से अधिक समय गुजरने पर प्रमाण पत्र बनने में पेंच फसेंगे।
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पड़ोसी ने नहीं दी गवाही तो फंस जाएगा मामला
एक साल से अधिक समय बीतने पर जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने पर मुश्किल होगी। आवेदन की जांच एसडीएम की ओर से लेखपाल या नगर निगम कर्मचारी को सौंपी जाएगी। ये कर्मचारी आवेदक के मोहल्ले में जाकर छानबीन करेंगे। इसके लिए कर्मचारी मोहल्ले में जाकर आवेदक के पड़ोसियों से जानकारी लेंगे। उनकी गवाही कराएंगे। इसमें पड़ोसी को यह बताना होगा कि आवेदक के घर बच्चा कहां, कब पैदा हुआ था। या उसके परिजन की मौत कैसे और कब हुई थी। यह बात बताने के साथ पड़ोसी को आधार कार्ड और हस्ताक्षर भी देने होंगे। यदि पड़ोसी ने गवाही के साथ आधार कार्ड की प्रति नहीं दी तो प्रमाणपत्र बनवाने में मुश्किल आएगी।
वर्जन
शासन की ओर जारी दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा। नगर निगम में आने वाले लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाएगा।
-गौरव सिंह सोंगरवाल, नगर आयुक्त